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जब माननीय का ये हाल...तो आम जनता कैसे मानेगी कोविड प्रोटोकॉल
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मुरादाबाद। एक तरफ मास्क न लगाने वालों पर पुलिस डंडे चला रही है तो वहीं कोविड नियमों को न मानने वाले आम लोगों पर जुर्माने तक की कार्रवाई हो रही है, जबकि भाजपा एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त कोरोना संक्रमण का टेस्ट कराने के बाद छह दिनों तक विभिन्न समारोहों में शिरकत कर संक्रमण बांटते रहे। फेसबुक पर कोरोना टेस्ट के बाद भी कार्यक्रमों में शिरकत करने की जानकारी उनके फेसबुक से लोगों को पता लगी तो हड़कंप मच गया है।
जिले में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मशक्कत कर रहे हैं। पिछले दिना नोडल अधिकारी नामित कर नगर विकास विभाग के विशेष सचिव डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को जिले में कैंप करने के लिए भेजा गया था। प्रशासन का यही जोर है कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जाए, लेकिन भाजपा एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त ने कोरोना संक्रमण का संदेह होने पर 10 अप्रैल को टेस्ट कराया, लेकिन होम आइसोलेट होने के बजाय महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में जाते रहे। उन्होंने अगले दिन 11 अप्रैल को ही टीकाकरण अभियान की शुरुआत तक कर डाली। जब कोविड प्रोटोकॉल केे अपनाने में माननीय का ही ये हाल है तो आम जनता इसका पालन कितना करती है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। एमएलसी ने गुरुवार को अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट डाली कि उन्होंने 10 अप्रैल को कोविड 19 की जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है। आगे लिखा कि हमने अपने को आइसोलेट कर लिया है। साथ ही पिछले दिनों खुद के संपर्क में आने वाले लोगों को सचेत भी किया है। इतना ही नहीं एमएलसी ने इससे पहले 11 अप्रैल को जिला अस्पताल में विशेष टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। 13 अप्रैल को भाजपा कार्यालय में आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर दीप जलाए और 14 अप्रैल को बिलारी विधानसभा में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पंचायत चुनाव से संबंधित बैठक की। उन्होंने इन कार्यक्रमों को भी फेसबुक पर अपलोड किया। कोरोना टेस्ट के बाद छह दिनों में वे कितने कार्यक्रमों में शामिल हुए होंगे, और आम जनता से लेकर कितने अधिकारियों प्रबुद्ध लोगों तक से मिले होंगे। आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है। वहीं एमएलसी के कोरोना संक्रमित होने के बाद कार्यक्रमों में शामिल होने से संक्रमण फैलने की आशंका से लोग भयभीत हैं।
ये है नियम
कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार कोरोना संक्रमण का अंदेशा होने और टेस्ट कराते ही मरीज को आइसोलेट हो जाना चाहिए। उसे किसी भी समूह अथवा दूसरे व्यक्ति के संपर्क में नहीं आना चाहिए। इस नियम की अवज्ञा करने पर कोरोना महामारी अधिनियम की धारा के तरह एफआईआर का प्राविधान किया गया है।
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एमएलसी का अजीब तर्क, छह दिन बाद मिलनी थी रिपोर्ट, इसलिए कार्यक्रमों में गए एमएलसी जयपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने आरटीपीसीआर टेस्ट कराया था, जिसकी रिपोर्ट छठे दिन मिलनी थी। उनकी तबियत पूरी तरह ठीक थी, इसलिए कार्यक्रमों में चले गए, लेकिन अब पॉजिटिव आने के बाद खुद को पूरी तरह आइसोलेट कर लिया है।
कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत कोरोना संक्रमण की आशंका होने पर खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए। कोरोना टेस्ट के दौरान चिकित्सक भी यही सलाह देते हैं, लेकिन यदि कोई कोविड मरीज जानबूझकर संक्रमण फैलाता है तो उसके विरुद्ध महामारी अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आनंद वर्धन, सीडीओ/प्रभारी डीएम।
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जिले में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मशक्कत कर रहे हैं। पिछले दिना नोडल अधिकारी नामित कर नगर विकास विभाग के विशेष सचिव डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी को जिले में कैंप करने के लिए भेजा गया था। प्रशासन का यही जोर है कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जाए, लेकिन भाजपा एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त ने कोरोना संक्रमण का संदेह होने पर 10 अप्रैल को टेस्ट कराया, लेकिन होम आइसोलेट होने के बजाय महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में जाते रहे। उन्होंने अगले दिन 11 अप्रैल को ही टीकाकरण अभियान की शुरुआत तक कर डाली। जब कोविड प्रोटोकॉल केे अपनाने में माननीय का ही ये हाल है तो आम जनता इसका पालन कितना करती है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। एमएलसी ने गुरुवार को अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट डाली कि उन्होंने 10 अप्रैल को कोविड 19 की जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है। आगे लिखा कि हमने अपने को आइसोलेट कर लिया है। साथ ही पिछले दिनों खुद के संपर्क में आने वाले लोगों को सचेत भी किया है। इतना ही नहीं एमएलसी ने इससे पहले 11 अप्रैल को जिला अस्पताल में विशेष टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। 13 अप्रैल को भाजपा कार्यालय में आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर दीप जलाए और 14 अप्रैल को बिलारी विधानसभा में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पंचायत चुनाव से संबंधित बैठक की। उन्होंने इन कार्यक्रमों को भी फेसबुक पर अपलोड किया। कोरोना टेस्ट के बाद छह दिनों में वे कितने कार्यक्रमों में शामिल हुए होंगे, और आम जनता से लेकर कितने अधिकारियों प्रबुद्ध लोगों तक से मिले होंगे। आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है। वहीं एमएलसी के कोरोना संक्रमित होने के बाद कार्यक्रमों में शामिल होने से संक्रमण फैलने की आशंका से लोग भयभीत हैं।
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ये है नियम
कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार कोरोना संक्रमण का अंदेशा होने और टेस्ट कराते ही मरीज को आइसोलेट हो जाना चाहिए। उसे किसी भी समूह अथवा दूसरे व्यक्ति के संपर्क में नहीं आना चाहिए। इस नियम की अवज्ञा करने पर कोरोना महामारी अधिनियम की धारा के तरह एफआईआर का प्राविधान किया गया है।
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एमएलसी का अजीब तर्क, छह दिन बाद मिलनी थी रिपोर्ट, इसलिए कार्यक्रमों में गए एमएलसी जयपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने आरटीपीसीआर टेस्ट कराया था, जिसकी रिपोर्ट छठे दिन मिलनी थी। उनकी तबियत पूरी तरह ठीक थी, इसलिए कार्यक्रमों में चले गए, लेकिन अब पॉजिटिव आने के बाद खुद को पूरी तरह आइसोलेट कर लिया है।
कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत कोरोना संक्रमण की आशंका होने पर खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए। कोरोना टेस्ट के दौरान चिकित्सक भी यही सलाह देते हैं, लेकिन यदि कोई कोविड मरीज जानबूझकर संक्रमण फैलाता है तो उसके विरुद्ध महामारी अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आनंद वर्धन, सीडीओ/प्रभारी डीएम।