फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   wheat

किसानों को भी आराम, लोगों को मिल गया काम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2020 01:06 AM IST
विज्ञापन
wheat
मुरादाबाद। ‘खुद को तपाकर धूप में हलधर ने इसे कुंदन कर डाला, हर हाथ करेगा काम तो इसी से मिलेगा सभी को निवाला’
विज्ञापन

कभी बारिश तो कभी आंधी तूफान से लड़कर आखिरकार धरतीपुत्रों ने उस फसल को चमका दिया जो सोने से भी अनमोल है। खेतों में लहलहाती कुंदन सरीखी दिखने वाली इस गेहूं की फसल की कटाई जनपद में तेजी से शुरू हो गई है। इस बार लॉकडाउन के चलते जहां देश भर में हाहाकार है तो किसानों के लिए इस दर्द में भी एक सुकून उभरा है। इस बार फसल काटने के लिए कामगाराें की कमी नहीं। जो लोग बाहर चले गए और लॉकडाउन में बेरोजगार होकर अपने गांवों को लौटे, उन्हें भी यहां कटाई के रूप में काम मिल गया। सस्ते में मजूदर मिलने से किसान को भी राहत मिली तो लोगों को रोजगार मिला। दो जून की रोटी का जुगाड़ बन पड़ा।
खुद ही काम में लग गए
पाकबड़ा। गेहूं की कटाई के समय मजदूरों का मिलना बड़ा मुश्किल काम था लेकिन कोरोना के चलते हुये लॉकडाउन ने गांव के दैनिक मजदूरों की मजदूरी आधी कर दी है। परिवारों के सभी सदस्य लॉकडाउन के चलते घरों में मौजूद हैं इसलिए परिवार मिलजुलकर गेहूं काट रहे हैं। हासमपुर गोपाल गांव निवासी बलवीर सिंह किसान है। पूरा परिवार लॉकडाउन के चलते घर है आज वह अपने तीनों बेटों रोहित, विनीत और राजू के साथ खेत पर पहुंच गये और गेंहू काटना शुरू कर दिया। छह बीघा जमीन में से करीब तीन बीघा जमीन उन्होने एक दिन में ही काट दी है। बलबीर सिंह ने बताया की जब परिवार के सभी सदस्य घर पर खाली बैठे हैं। हसमपुर गोपाल गांव निवासी ही दैनिक मजदूर अजब सिंह और उसकी पत्नी सुनीता देवी ने बताया की इस बार मजदूरी आधी हो गई है। खेत मालिक खुद ही गेंहू काटना चाह रहा था लेकिन जैसे उन्होंने खेत मालिक को तैयार किया और वह खेत काटने आ गये हैं। अब कम से कम पूरे साल का गेहूं तो इकट्ठा हो जायेगा। भाड़ली गांव निवासी शाकिर हुसैन ने बताया की खेत से गेंहू काटने के लिए मजदूर घर पर चक्कर लगा रहे लेकिन इतने ज्यादा मजदूर घर पर आ रहे है वह किसकों खेत कटाने को कहे और किसे मना करें। रतनपुर कलां गांव निवासी दैनिक मजदूर राम सिंह ने बताया कई दिनों से वह किसानों के घर चक्कर लगा रहे है लेकिन किसानों के परिवार के सभी सदस्य घरों पर है इसलिए वह खुद ही काट रहे हैं।
विज्ञापन

ताबड़तोड़ कटाई शुरू
कुंदरकी। क्षेत्र में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। लॉकडाउन की वजह से मजदूर भी मिल रहे हैं। वहीं किसान भी परिवार के सदस्यों सहित काटने में जुट गए हैं। इधर, मौसम के उतार-चढ़ाव को लेकर भी किसान चिंतित हैं। लॉकडाउन के चलते गांव-गांव में मजदूर भी आसानी से मिले रहे क्योंकि गेहूं की कटाई से मजदूरों के परिवार के लिए अनाज की व्यवस्था हो जाएगी। किसान राजीव त्यागी,कल्लू खां, रवि सैनी, धर्मवीर सिंह आदि का कहना है कि मौसम का उतार-चढ़ाव से खेतों में तैयार फसल अधिक प्रभावित हो सकती है। इसलिए जल्द से जल्द गेेहूं की कटाई और मशीन से निकलवाई और ढुलाई की जा सके। किसानों का कहना था कि एक सप्ताह के बाद गेेेहूं की कटाई में पूरी तरह से तेजी आ जाएगी। गेहूं की कटाई के साथ ही मक्का की बुवाई, खेतों में गन्ने की छिलाई और मैंथा की निराई का कार्य भी खेतों में मजदूर कर रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

लॉक डाउन में चालू नहीं हुए गेहूं क्रय केन्द्र
कुंदरकी। लॉक डाउन के चलते इस वर्ष सरकारी गेहूं क्रय केन्द्र संचालित नहीं हो सके। जबकि एक अप्रैल से चालू होने की उम्मीद थी। गेेहूं क्रय केन्द्रों का संचालन अब 15 अप्रैल के बाद की होने की उम्मीद है।
भाकियू ने सरसों खरीद केन्द्र लगाने की मांग की
कुंदरकी। भाकियू किसान यूनियन के मंडल सचिव एवं समाजसेवी प्रदीप त्यागी ने सरकार से सरसों खरीद केन्द्र लगाकर सरकारी रेट पर खरीद कराने की मांग की है। मंडल सचिव प्रदीप त्यागी का कहना है कि बेमौसम बारिश के चलते सरसों की फसल अधिक प्रभावित हुई। जिसकी वजह से आधी पैदावार हुई। बारिश की वजह से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई हो सके। इसलिए सरसों खरीद केन्द्र लगाकर किसानों से सरकारी रेट पर सरसों की खरीद की जाए।
कटाई आसान, मजदूरी भी हुई कम
ठाकुरद्वारा। क्षेत्र में गेहूं की कटाई का कार्य शुरू हो गया है। लॉकडाउन की वजह से इस बार बाहर रहने वाले लोग भी गांव में मौजूद हैं। जिससे कटाई कराने के लिए मजदूर भी आसानी से मिल रहे हैं। वहीं, मजदूरी भी नहीं बढ़ी है। गांव रामूवाला गणेश के किसान राजेंद्र चौधरी ने बताया कि गेहूं की कटाई के लिए मजदूर आसानी से मिल रहे हैं। पिछले वर्ष एक एकड़ गेहूं की कटाई की मजदूरी प्रति एकड़ करीब दो क्विंटल लेते थे। लेकिन इस बार मजदूरी करीब एक क्विंटल 80 किलो है। उन्होंने बताया कि इस बार खराब मौसम के कारण गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ा है। उधर, गांव कुआखेड़ा खालसा निवासी किसान घनेंद्र शर्मा ने बताया कि पहले उत्पादन एक बीघा में तीन क्विंटल गेहूं का होता था। जो इस बार खराब मौसम के कारण दो से ढाई क्विंटल बीघा है। उन्होंने बताया कि गेहूं कटाई की मजदूरी लगभग पहले की तरह ही है। लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण मजदूर आसानी से मिल रहे हैं। गांव गोपीवाला निवासी किसान दिनेश कुमार ने कहा कि इस बार गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। प्रति बीघा दो से ढाई क्विंटल तक गेहूं निकलने का अनुमान है। जबकि इस बार मजदूरी पहले के मुकाबले एक एकड़ पर डेढ़ क्विंटल बीघा कटाई की जा रही है। पिछली बार यह मजदूरी अधिक थी और आसानी से मजदूर भी नहीं मिलते थे। गांव मानपुर दत्तराम निवासी किसान आशुतोष शर्मा ने बताया कि इस बार एक एकड़ की मजदूरी मजदूर एक एकड़ पर एक क्विंटल 10 किलो के हिसाब से ले रहे हैं। जो पहले के मुकाबले कम है। उनका कहना है कि लॉकडाउन के कारण मजदूरी कम हुई है। बाहर से आए मजदूर भी गांव में ही हैं।
खुद ही गेहूं की कटाई में जुटे किसान
बिलारी। लॉकडाउन में अधिकतर किसान इस वर्ष स्वयं ही गेहूं की कटाई में जुट गए हैं। हालांकि बाहरी शहरों में काम करने वाले मजदूर भी अब अपने गांव में हैं। किसान परिवारों के जो सदस्य बाहर मजदूरी या अन्य कारोबार करते थे। वह भी इन दिनों अपने घरों पर हैं। ऐसी स्थिति में बिना मजदूरों के कटाई शुरू कर दी है।

कर कर रहे मनुहार, गेहूं कटवा लो यार
डिलारी। किसानों के घर पहुंच कर मजदूर गेहूूं काटने का आग्रह कर रहे हैं। लॉकडाउन में अधिक संख्या में मजदूर मिलने से किसान खुश हैं। इस वर्ष 25 किलो से लेकर 30 किलो गेहूं प्रति बीघा पर कटाई करने के लिए खूब घूम रहे हैं। क्षेत्र के जोगपुरा निवासी प्रधान सत्यपाल सिंह यादव का कहना है कि इस बार गेहूं की कटाई से लेकर गेहूं निकालने में कोई समस्या नही हैं। सस्ते में मजदूर मिल रहे हैं। डिलारी निवासी राजकुमार सिंह ठाकुर का कहना है कि मेरे पास लगभग 25 बीघा गेहूं हैं। लोग खुद ही आकर कह रहे हैं कि कटाई हमसे ही करवाना। यहां तक कि जाकर देखा तो आधे से ज्यादा गेंहू की फसल कट चुकी थी । कुछ मजदूर गेहूं की फसल काट रहे थे। तो कुछ मजदूर एकत्र कर रहे थे। उन्होंने मुझसे 30 किलो गेंहू प्रति बीघा की कटाई ली। धीगर पुर गांव निवासी मौहम्मद जान का कहना है कि हमारे गांव के अधिकतर लोग फरीदाबाद में काम करते थे। लॉकडाउन में सभी लोग अपने गांव आ गए। इस बार गेहूं की फसल हमारे यहां 25 किलो प्रति बीघा से कटाई हो रही है। लगभग एक सप्ताह में हमारे क्षेत्र में कटाई और गहाई का कार्य पूरा हो जाएगा। जसराम कहते है कि हमने लगभग 10 बीघा जमीन ठेके पर ली है। पूरा परिवार घर पर है तो मिलकर ही गेंहू की कटाई कर रहे हैं। कम से कम मजदूरी तो बचेगी। यही बात धर्म पाल सिंह का कहना है कि वह भी जमीन ठेके पर खेती करते हैं। फसल की बुआई और कटाई मेरा परिवार मिलकर ही करता है। अपना कार्य पूरा करने के उपरांत और किसानों की कटाई करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed