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जल संचयन में अमरोहा, रामपुर से भी खराब है मुरादाबाद

Wed, 11 Sep 2019 06:57 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अभिषेक मिश्रा, अमर उजाला, मुरादाबाद
अभिषेक मिश्रा, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Wed, 11 Sep 2019 06:57 AM IST
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moradabad lacks in water harvesting
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
बारिश के पानी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने में मुरादाबाद की स्थिति अच्छी नहीं है। केंद्र सरकार ने जल शक्ति अभियान के तहत 254 शहरों की रैंक जारी की है। इसमें अमरोहा, रामपुर, बिजनौर और संभल जिले अंडर 100 रैंक तक पहुंचने में कामयाब हुए हैं। लेकिन मुरादाबाद की रैंक 162 है। केंद्र सरकार जल शक्ति अभियान की अंतिम रैंक 15 सितंबर के बाद जारी करेगी।
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देश में भूमिगत जलस्तर के लिहाज से डार्क जोन में आने वाले शहरों को जल शक्ति अभियान में शामिल किया गया था। मुरादाबाद मंडल के पांच जिले इस अभियान में हैं। प्रशासन ने बारिश का पानी सुरक्षित करने के लिए तालाब खुदाई, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, नदियों को पुनर्जीवन देने के प्रयास पहली जुलाई से शुरू कराए थे। महानगर में 300 से अधिक तालाब की खुदाई कराई गई थी। सरकारी और गैर सरकारी इमारतों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए गए। खासतौर पर डार्क जोन में शामिल ब्लॉक बिलारी, डिलारी और छजलैट में अधिक प्रयास हुए। बावजूद इसके मुरादाबाद अच्छी रैंक नहीं हासिल कर सका है।
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मुरादाबाद मंडल की स्थिति :

जिला रैंक
  • अमरोहा:     36
  • रामपुर:       72
  • बिजनौर:     78
  • संभल:        92
  • मुरादाबाद: 162
(केंद्र सरकार की जल शक्ति अभियान की वेबसाइट पर रैंक जारी)

इन बिंदुओं पर होता है रैंकिंग का आंकलन
  • रेन वाटर हार्वेस्टिंग ढांचा
  • इसके तहत छत के पानी के रखरखाव की व्यवस्था।
  • पानी की व्यवस्था के लिए तालाब व खाई की व्यवस्था।
  • पारंपरिक तालाब, कुएं व बावड़ी का रखरखाव।
  • खराब पानी को स्वच्छ कर दोबारा इस्तेमाल में लाना।
  • जमीन के पानी को रिचार्ज करना।
  • सोखते, गड्ढे खोदकर बारिश के पानी को जमीन के पानी के रिचार्ज के लिए इस्तेमाल करना व रिचार्ज बोर तैयार करना।
  • पौध रोपण कर पर्यावरण व जल संरक्षण करना।
वर्जन

सांसद डॉ एसटी हसन ने कहा कि मैने पार्लियामेंट में नदियों में बारिश के पानी आने के बाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए भूमिगत जल को रिचार्ज करने का सुझाव अभी हाल में रखा है। इसको लागू कराने की आवश्यकता है। 90 फीसदी बारिश का पानी नदियों के जरिए समुद्र में चला जाता है। अगर इसका 20 फीसदी भी संचय कर लिया जाए तो बात बन जाएगी। मंडल की रैकिंग में सुधार की गुंजाइश है।
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