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बेलवाडा मिल में खराब हुआ चार करोड़ का शीरा 

Fri, 24 Jun 2016 10:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Fri, 24 Jun 2016 10:56 AM IST
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wasted in sugar syrup in  Belvada Sugar mill of Crore
शुगर मिल - फोटो : demo
एक ओर गन्ना किसान अपने बकाए के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों का पैसा देने के लिए इंतजाम करने के बजाय राणा शुगर मिल ने करोड़ों रुपये का शीरा सड़ा दिया। जबकि इसे बेचकर किसानों को कुछ भुगतान किया जा सकता था।   मंडल में राणा ग्रुप की तीन चीनी मिलें बिलारी, करीमगंज और बेलवाड़ा चल रही हैं। किसानों का भुगतान करने में यही मिलें सबसे पीछे चल रही हैं।
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इसके चलते बिलारी शुगर मिल पर मुकदमा दर्ज करने के साथ ही उसकी चीनी नीलाम करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके बावजूद मिल की ओर से भुगतान ऐसा करने की कोशिश भी नहीं की जा रही है। राणा ग्रुण की बेलवाड़ा चीनी मिल में शीरा रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम तक नहीं है। जबकि मिल को आबकारी विभाग की ओर से हर साल शीरा रखने के लिए टैंक बनाने का नोटिस जारी किया जाता है।
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लेकिन मिल मालिक टैंक बनवाने के लिए तैयार ही नहीं है। इस साल भी हर साल की तरह गड्ढा खोदकर उसमें त्रिपाल लगाया गया और शीरा भर दिया गया। वहीं उसे शीरा बेचने की भी अनुमति नहीं मिल पाई। खुले आसमान के नीचे पड़े शीरा में बारिश का पानी भर गया। पानी भरने से शीरा में फरमेंटेशन शुरू हो गया। शीरा की खास बात ये है कि इसमें एक बार पानी भरने के बाद इसकी रिकवरी नहीं हो सकती।
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गन्ना विभाग और आबकारी विभाग के अनुमान के अनुसार करीब चार करोड़ रुपये का शीरा खराब हो गया। अगर यह शीरा बिक जाता तो किसानों को कुछ रुपये मिल जाते। जिससे वे भी अपने काम करने के साथ आगे की अच्छी फसल के लिए खाद पानी का इंतजाम कर पाते। 

 
पांच हजार रुपये के जुर्माने पर बचाते हैं करोड़ों 
मुरादाबाद। बेलवाड़ा मिल में सालों से शीरा रखने के लिए टैंक की व्यवस्था नहीं है। टैंक निर्माण कराने के बजाय मिल की ओर से आबकारी विभाग को एक लैटर हर साल भेजा जाता है। इसमें टैंक बनवाने लायक बजट नहीं होने की दुहाई देकर उसे गड्ढा खोदकर भरने की छूट मांगी जाती है। आबकारी विभाग पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाकर उसे छूट दे देता है। हर साल की तरह इस साल भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। लेकिन शीरा बिकने से पहले ही बारिश आ गई और गड्ढे में पानी भरने से पूरा शीरा खराब हो गया। इस तरह हर साल मात्र पांच हजार रुपये की जुर्माना भरकर मिल प्रबंधन हर साल टैंक बनाने में आने वाली लागत बचाने के साथ ही गड्ढे से शीरा बेचकर करोड़ों रुपये कमा लेते हैं। 


एक ही डिस्ट्रलरी की मांगते हैं स्वीकृति 
मुरादाबाद। मिल प्रबंधन को शीरा बेचने के लिए आबकारी और गन्ना विभाग से स्वीकृति लेनी होती है। लेकिन राणा शुगर मिल ग्रुप की ओर से इस साल रामपुर डिस्टिलरी को शीरा बेचने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अन्य मिलों के साथ पहले ही अनुबंध हो चुका था। नियमानुसार पहला शीरा खत्म होने के बाद ही दूसरी मिल से माल उठाया जाता है। जिसके चलते उसे शीरा बेचने की अनुमति नहीं मिली। अगर वह किसी और डिस्टिलरी के साथ अनुबंध करते तो शायद शीरा बिक जाता और इसका फायदा किसानों को मिलता।    
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