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Valentine Week 2024: जाति-भाषा देखी, न दूरी... प्यार देख एक दूजे के हुए तान्या-काब्यिक; दंपती ने साझा की कहानी
Wed, 07 Feb 2024 11:17 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 07 Feb 2024 11:17 AM IST
सार
वैलेंटाइन वीक के मौके पर मुरादाबाद निवासी डॉ. तान्या अग्रवाल और कोलकाता निवासी डॉ. काब्यिक ने अपनी कहानी साझा की।
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Valentine Week 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुरादाबाद शहर के गौर ग्रेसियस निवासी डॉ. तान्या अग्रवाल व कोलकाता निवासी डॉ. काब्यिक गोलदर ने जाति-भाषा देखी और न घरों की दूरी। घरवालों की नापसंद का ख्याल दिल में आया तो अपनी बात उनके सामने खुलकर रख दी।
परिजनों ने भी समझदारी दिखाई और एक-दूसरे से मिले। आखिरकार फैसला प्यार के पक्ष में हुआ। 25 नवंबर 2023 को मुरादाबाद की बेटी डॉ. तान्या अग्रवाल बंगाल के डॉ. काब्यिक की पत्नी बन गईं। दंपती ने वैलेंटाइन वीक के मौके पर अपनी कहानी अमर उजाला से साझा की है।
डॉ. तान्या ने कहा कि बात उन दिनों की है जब मैंने वर्ष 2020 में पीजी में एडमिशन लिया था और डॉ. काब्यिक पीजी अंतिम वर्ष के छात्र थे। पढ़ाई व अभ्यास के दौरान हम दोनों में बातचीत शुरू हुई। मैं डॉ. काब्यिक के सहज व्यवहार व पढ़ाई में मदद करने की आदत की सराहना करने लगी।
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धीरे-धीरे काब्यिक की बंगाली भाषा भी अच्छी लगने लगी, फिर न सिर्फ बंगाली सीखी बल्कि इसी भाषा में अपने प्यार का इजहार भी किया। आज हम दोनों पति-पत्नी हैं। बातचीत के दौरान हम दोनों जानते थे कि हमारा सीनियर-जूनियर का रिश्ता गहरी दोस्ती में बदल रहा है।
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परिजनों ने भी समझदारी दिखाई और एक-दूसरे से मिले। आखिरकार फैसला प्यार के पक्ष में हुआ। 25 नवंबर 2023 को मुरादाबाद की बेटी डॉ. तान्या अग्रवाल बंगाल के डॉ. काब्यिक की पत्नी बन गईं। दंपती ने वैलेंटाइन वीक के मौके पर अपनी कहानी अमर उजाला से साझा की है।
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डॉ. तान्या ने कहा कि बात उन दिनों की है जब मैंने वर्ष 2020 में पीजी में एडमिशन लिया था और डॉ. काब्यिक पीजी अंतिम वर्ष के छात्र थे। पढ़ाई व अभ्यास के दौरान हम दोनों में बातचीत शुरू हुई। मैं डॉ. काब्यिक के सहज व्यवहार व पढ़ाई में मदद करने की आदत की सराहना करने लगी।
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धीरे-धीरे काब्यिक की बंगाली भाषा भी अच्छी लगने लगी, फिर न सिर्फ बंगाली सीखी बल्कि इसी भाषा में अपने प्यार का इजहार भी किया। आज हम दोनों पति-पत्नी हैं। बातचीत के दौरान हम दोनों जानते थे कि हमारा सीनियर-जूनियर का रिश्ता गहरी दोस्ती में बदल रहा है।
इसके बावजूद कभी कॉलेज कैंपस के बाहर कदम नहीं रखा। मैं अपने माता पिता की अकेली संतान हूं, मैंने देखा कि काब्यिक मेरे माता-पिता को भी अपने माता-पिता की तरह सम्मान देते हैं। तब तय कर लिया कि हम जीवनसाथी बन सकते हैं। सामने कहने की हिम्मत नहीं जुटा सकी तो व्हाट्सएप मैसेज पर लिखा आमी तोमाके भालोबाशी...।
वहीं डॉ. काब्यिक का कहना है कि शुरुआत में मेरी तरफ से कुछ नहीं था। एक दिन तान्या का बैच गेल्डन टेंपल टूर पर गया। वहां से उन्होंने मुझे अपने फोटो भेजे। तब लगा कि उन्हें मुझसे लगाव है। जब मैं छुट्टियों में बंगाल गया तो मैंने भी दुर्गा पूजा के फोटो साझा किए। इस तरह उनके बंगाली सीखने की शुरुआत हुई। हालांकि मैं चाहता था कि मैं ही इजहार करूं लेकिन तान्या से वो शब्द सुनना बेहद सुखद था।