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टीकाकरण पर कोरोना की मार, बच्चे कहीं पड़ न जाएं अब बीमार
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मुरादाबाद। कोविड 19 से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह लड़खड़ा गई हैं। टीकाकरण सत्र पर भी कोरोना की मार पड़ी है। स्वास्थ्य विभाग के वारियर्स की कोरोना ड्यूटी और लोगों में दहशत से मुरादाबाद जिले में अप्रैल माह में लक्ष्य के सापेक्ष मात्र दो फीसदी (अस्पतालों में पैदा होने वाले नवजात) का टीकाकरण हुआ है। 30 हजार 907 यानी 98 फीसदी बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए हैं। ऐसे बच्चों के आने वाले दिनों में मौसमी बदलाव से बीमार होने की संभावना भी बढ़ जाएंगी।
नवजात के पैदा होने से 16 साल की उम्र तक टीके लगाए जाते हैं। इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। टीके बच्चों को संक्रामक और खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलघोंटू, काली खांसी और हेपेटाइटिस बी जैसी जानलेवा बीमारी से बचाते हैं। टीकाकरण सत्र नियमित चलता है। सालाना और मासिक लक्ष्य के हिसाब से बच्चों की टीकाकरण होता है। जो बच्चे इसमें छूट जाते हैं उनके लिए विशेष सत्र भी चलता है।
वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले ही इस साल कोरोना का साया मंडराने लगा। कोरोना के चलते राज्य मुख्यालय से टीकाकरण का लक्ष्य जारी नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल के टीकाकरण के आधार पर वित्तीय साल और महीनों का लक्ष्य निर्धारित कर लिया। लेकिन कोरोना के चलते टीकाकरण शुरू नहीं हो सका। अप्रैल माह में अस्पतालों में 655 शिशुओं का जन्म हुआ है। इन्हीं बच्चों को बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस बी का टीका लग सका है। जबकि लक्ष्य 31562 बच्चों के टीकाकरण का था। लक्ष्य के सापेक्ष मात्र दो फीसदी नवजात बच्चों का टीकाकरण हुआ है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीकाकरण बाधित होने से बच्चों पर तत्काल कोई असर नहीं होगा। लेकिन मौसमी बदलाव से होने वाली संक्रामक बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं। डायरिया और डिप्थीरिया बच्चों की मौत की बड़ी वजह बनता है।
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टीकाकरण का सालाना और अप्रैल माह का लक्ष्य
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टीका सालाना अप्रैल
टीटी (एम) 104601 2722
ओपीवी-3 91195 3344
बीसीजी 91195 3577
एमआर 91195 3862
डीपीटी 5 साल 76815 1563
टीटी 10 साल 74409 708
टीटी 16 साल 61367 553
ओपीवी जीरो डोज 91195 1803
पैंटा 3 91195 3292
एफआईपीवी-1 91195 3519
एफआईपीवी-2 91195 3327
एफआईपीवी-3 91195 3292
- कोरोना महामारी के चलते टीकाकरण सत्र नहीं हुए। केवल डिलीवरी प्वाइंटों पर नवजात 655 शिशुओं को बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया गया। -
डा. दीपक वर्मा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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नवजात के पैदा होने से 16 साल की उम्र तक टीके लगाए जाते हैं। इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। टीके बच्चों को संक्रामक और खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलघोंटू, काली खांसी और हेपेटाइटिस बी जैसी जानलेवा बीमारी से बचाते हैं। टीकाकरण सत्र नियमित चलता है। सालाना और मासिक लक्ष्य के हिसाब से बच्चों की टीकाकरण होता है। जो बच्चे इसमें छूट जाते हैं उनके लिए विशेष सत्र भी चलता है।
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वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले ही इस साल कोरोना का साया मंडराने लगा। कोरोना के चलते राज्य मुख्यालय से टीकाकरण का लक्ष्य जारी नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल के टीकाकरण के आधार पर वित्तीय साल और महीनों का लक्ष्य निर्धारित कर लिया। लेकिन कोरोना के चलते टीकाकरण शुरू नहीं हो सका। अप्रैल माह में अस्पतालों में 655 शिशुओं का जन्म हुआ है। इन्हीं बच्चों को बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस बी का टीका लग सका है। जबकि लक्ष्य 31562 बच्चों के टीकाकरण का था। लक्ष्य के सापेक्ष मात्र दो फीसदी नवजात बच्चों का टीकाकरण हुआ है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीकाकरण बाधित होने से बच्चों पर तत्काल कोई असर नहीं होगा। लेकिन मौसमी बदलाव से होने वाली संक्रामक बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं। डायरिया और डिप्थीरिया बच्चों की मौत की बड़ी वजह बनता है।
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टीकाकरण का सालाना और अप्रैल माह का लक्ष्य
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टीका सालाना अप्रैल
टीटी (एम) 104601 2722
ओपीवी-3 91195 3344
बीसीजी 91195 3577
एमआर 91195 3862
डीपीटी 5 साल 76815 1563
टीटी 10 साल 74409 708
टीटी 16 साल 61367 553
ओपीवी जीरो डोज 91195 1803
पैंटा 3 91195 3292
एफआईपीवी-1 91195 3519
एफआईपीवी-2 91195 3327
एफआईपीवी-3 91195 3292
- कोरोना महामारी के चलते टीकाकरण सत्र नहीं हुए। केवल डिलीवरी प्वाइंटों पर नवजात 655 शिशुओं को बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया गया। -
डा. दीपक वर्मा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी