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ऑक्सीमीटर कम बताए ऑक्सीजन तो अंगुली के साथ नाखून भी साफ कराएं
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मुरादाबाद। कोरोना के बिना लक्षणों वाले मरीज मुरादाबाद में भी होम आइसोलेट होने लगे हैं। होम आइसोलेट में मरीजों को अधिक सजग रहने की जरूरत है। खुद के स्वास्थ्य का सेल्फ असेसमेंट करने के साथ परिवार के दूसरे सदस्यों को भी संक्रमण से बचाना है। सेल्फ असेसमेंट के लिए पल्स ऑक्सीमीटर सबसे अहम है। इससे ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल मापा जाता है। स्वस्थ्य व्यक्ति के ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल 95 से 100 के बीच होता है। इससे कम आने पर चिकित्सक की सलाह जरूरी है। लेकिन कई बार नाखून गंदे (नेल पॉलिश लगी) होने से ऑक्सीमीटर का स्तर गलत दर्शाता है। ऐसे में आपको घबराने की जरूरत नहीं है। अपनी अंगुलियों के साथ नाखूनों को साफ करें, ताकि ऑक्सीजन का सही लेवल मापा जा सके।
संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। कोविड अस्पतालों में बेड संख्या बढ़ाई जा रही है। होम आइसोलेशन से अस्पतालों में मरीजों का दबाव भले ही कम होगा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का काम बढ़ गया है। होम आइसोलेट होने वाले बिना लक्षणों के मरीजों की उनके घर जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है। सरकार द्वारा निर्धारित मानक पूरा करने पर ही होम आइसोलेट की अनुमति दी जा रही है। मुुरादाबाद जिले में 17 मरीज होम आइसोलेट हैं। उपचार की दवाओं के साथ पल्स ऑक्सीमीटर की अनिवार्यता है। मरीज को प्रतिदिन अपने स्वास्थ्य का सेल्फ असेसमेंट करना है। इसके लिए पल्स ऑक्सीमटर सबसे बड़ा हथियार है।
सीएमओ डा. एमसी गर्ग का कहना है कि बिना लक्षणों वाले मरीजों में सांस लेने संबंधी परेशानी नहीं है। यदि किसी को परेशानी होती है तो उसे होम आइसोलेट नहीं किया जा रहा है। होम आइसोलेट फार्म भरवाने के दौरान भी मरीजों को अंगुलियों के साथ नाखून साफ रखने की सलाह दी जा रही है। यदि नाखूनों में नेल पॉलिश लगी होगी तो ऑक्सीमीटर ऑक्सीजन का लेवल सामान्य से कम दर्शाएगा। इसलिए नाखूनों की सफाई बेहद जरूरी है। कोरोना आशंकित भी यदि अपना ऑक्सीजन लेवल मापते हैं तो अंगुली के साथ नाखून का साफ होना जरूरी है। इससे ऑक्सीजन का लेवल सटीक आएगा।
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ऑक्सीजन लेवल कम होने से परेशानी
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डा. प्रवीण शाह बताते हैं, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के कोरोना की चपेट में आने पर कई लोगों को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ रही है। ऑक्सीजन लेवल गिरने से सांस लेने में परेशानी होती है। छाती और सिर में दर्द और दिल की धड़कन बढ़ने लगती है। दिमाग तक ऑक्सीजन का स्तर गिरने से कइयों में सूंघने की शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसे मरीजों को वेंटीलेटर पर रखा जा रहा है।
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संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। कोविड अस्पतालों में बेड संख्या बढ़ाई जा रही है। होम आइसोलेशन से अस्पतालों में मरीजों का दबाव भले ही कम होगा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का काम बढ़ गया है। होम आइसोलेट होने वाले बिना लक्षणों के मरीजों की उनके घर जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है। सरकार द्वारा निर्धारित मानक पूरा करने पर ही होम आइसोलेट की अनुमति दी जा रही है। मुुरादाबाद जिले में 17 मरीज होम आइसोलेट हैं। उपचार की दवाओं के साथ पल्स ऑक्सीमीटर की अनिवार्यता है। मरीज को प्रतिदिन अपने स्वास्थ्य का सेल्फ असेसमेंट करना है। इसके लिए पल्स ऑक्सीमटर सबसे बड़ा हथियार है।
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सीएमओ डा. एमसी गर्ग का कहना है कि बिना लक्षणों वाले मरीजों में सांस लेने संबंधी परेशानी नहीं है। यदि किसी को परेशानी होती है तो उसे होम आइसोलेट नहीं किया जा रहा है। होम आइसोलेट फार्म भरवाने के दौरान भी मरीजों को अंगुलियों के साथ नाखून साफ रखने की सलाह दी जा रही है। यदि नाखूनों में नेल पॉलिश लगी होगी तो ऑक्सीमीटर ऑक्सीजन का लेवल सामान्य से कम दर्शाएगा। इसलिए नाखूनों की सफाई बेहद जरूरी है। कोरोना आशंकित भी यदि अपना ऑक्सीजन लेवल मापते हैं तो अंगुली के साथ नाखून का साफ होना जरूरी है। इससे ऑक्सीजन का लेवल सटीक आएगा।
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ऑक्सीजन लेवल कम होने से परेशानी
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डा. प्रवीण शाह बताते हैं, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के कोरोना की चपेट में आने पर कई लोगों को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ रही है। ऑक्सीजन लेवल गिरने से सांस लेने में परेशानी होती है। छाती और सिर में दर्द और दिल की धड़कन बढ़ने लगती है। दिमाग तक ऑक्सीजन का स्तर गिरने से कइयों में सूंघने की शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसे मरीजों को वेंटीलेटर पर रखा जा रहा है।