UPPCS Result: राम मंदिर पर पूछे गए सवाल का दिया सटीक जवाब, मुरादाबाद के उपदेश दूसरे प्रयास में बने डिप्टी जेलर
मुरादाबाद के उपदेश कुमार को यूपी पीसीएस परीक्षा के दूसरे प्रयास में सफलता मिली है। इसकी बदौलत उनका चयन डिप्टी जेलर के पद के लिए किया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिक विषय में बीएससी ऑनर्स करने वाले उपदेश ने पीसीएस की तैयारी वर्ष 2019 से शुरू की थी।
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मुरादाबाद के गांव सिरसवां गौड़ निवासी उपदेश कुमार सिंह ने पीसीएस की परीक्षा पास कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पीसीएस परिणाम में उपदेश ने 60वीं रैंक हासिल की है। उनका चयन डिप्टी जेलर के पद पर हुआ है।
उपदेश को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है। उनके चयन से गांव में खुशी का माहौल है। उपदेश कुमार सिंह के पिता हरस्वरूप सिंह काशीपुर के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसईं में कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं।
उपदेश ने बताया कि उनकी मम्मी रेखा गृहिणी हैं। वह तीन भाई और एक बहन है। उपदेश तीनों भाइयों सबसे छोटे हैं। उन्होंने पीसीएस की तैयारी वर्ष 2019 से शुरू की थी। दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिक विषय में उपदेश ने बीएससी ऑनर्स किया है।
इसके बाद बीएड भी किया है। उपदेश ने बताया कि मेरे सबसे बड़े भैया आदेश कुमार पीसीएस की तैयारी कर रहे थे। उनको देखकर मेरा भी मन इस परीक्षा की तैयारी करने का हुआ तो उन्होंने इसके बारे में मुझे समझाया। हालांकि इस बार उनका मेंस चरण सफल नहीं हो पाया है।
भैया करते थे मेरी उत्तरों का मूल्यांकन
उपदेश ने बताया कि पिछली बार मेंस में मुझे असफलता मिली थी। इसकी वजह थी कि मैं लिखित परीक्षा का ज्यादा अभ्यास नहीं कर पाया था। इस पर मैंने शुरुआत से ही मेंस को लक्ष्य बना लिया। पिछले वर्षों के सवालों को हल करता था। 20 सवाल तीन घंटे में हल हो जाएं, इसका ध्यान रखता था।
आंकड़ों, डायग्राम, मैपिंग और वाक्य विन्यास पर पूरा ध्यान दिया। मेरे उत्तरों का मूल्यांकन बड़े भैया आदेश करते थे और मेरी गलतियों को मुझे समझाते थे। इसके अलावा टेस्ट सीरीज से भी लिखने का अभ्यास किया था। पिछले वर्षों के सफल अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं से भी मैंने लिखना सीखा।
30 मिनट चला साक्षात्कार, राम मंदिर पर पूछा सवाल
उपदेश ने बताया कि जब साक्षात्कार हुआ तो उस वक्त राम मंदिर का मुद्दा चल रहा था। मुझसे पूछा गया कि राम मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री जा रहे हैं, क्या यह पंथ निरपेक्षता का उल्लंघन हैं। मैंने कहा कि राज्य हर धर्म के साथ सकारात्मक व्यवहार करता है, इसलिए यह सकारात्मक पंथ निरपेक्षता है और यह पंथ निरपेक्षता का उल्लघंन नहीं है।
मुझसे नोट बंदी, निजी शिक्षा और सरकारी शिक्षा की तुलना, ऑनलाइन शिक्षा और ऑफलाइन शिक्षा की तुलना, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से संबंधित सवाल पूछे थे। मेरा साक्षात्कार 30 मिनट चला था। शुरुआत में नर्वस हो रहा था, लेकिन साक्षात्कार के लिए अंदर गया तो डर दूर हो गया। वहां का माहौल बहुत सकारात्मक था। वह घबराहट को दूर करने में सहयोग कर रहे थे।
डायरी में नोट कर लेता था डाटा
उपदेश ने बताया कि मैं आठ से दस घंटा नियमित पढ़ता है। परीक्षा के दौरान दस से 12 घंटे पढ़ता था। इतिहास और भूगोल पर मेरी पकड़ अच्छी थी। मुझे अंदाजा था कि मैं इस बार सफल हो जाऊंगा, क्योंकि मेंस चरण अच्छा गया था।
मैं इतिहास और भूगोल के डाटा को डायरी में नोट कर लेता था। इसके बाद शॉर्ट नोट्स बनाए थे। अखबार पढ़कर समाज के घटनाक्रम के लिए जागरुक रहता था। उन्होंने युवाओं से कहा कि लिखने का जितना अभ्यास करोगे, धैर्य रखोगे तो सफलता जरूर मिलेगी।
भैया ने देखा रिजल्ट, खुशी से झूमे परिजन
उपदेश ने बताया कि मुझे पता था कि मंगलवार को परिणाम आएगा। मैं घर के बारह खड़ा था और आदेश भैया परिणाम देख रहे थे। जैसे ही उन्हें मेरा नाम दिखाई दिया बोले उपदेश तू पास हो गया। यह सुनते ही परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। इसके बाद से शुभकामनाएं देने वालों के लगातार फोन आ रहे हैं।
इस बार मैं लिखने का करुंगा अभ्यास
आदेश ने बताया कि प्रोत्साहन आंतरिक होता है। स्वप्रेरणा हो संघर्षशील बनाती है। हम दोनों साथ में तैयारी कर रहे थे। उपदेश के लिए मैं बहुत खुश हूं। मुझे लगता है कि मेरी लिखने की समस्या है। उस कमी को दूर करना है। कॉपी में सुंदरता दिखनी चाहिए। डायग्राम और मैपिंग पर काम करुंगा।