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UP: विवेचकों को नई धाराओं का ज्ञान नहीं.. केस का घोंट रहे दम, कमजोर पड़ रहे मामले, अफसरों तक पहुंच रही शिकायत

Thu, 15 May 2025 04:45 PM IST
विमल शर्मा जितेंद्र कुमार, अमर उजाला, मुरादाबाद
जितेंद्र कुमार, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 15 May 2025 04:45 PM IST
सार

एक जुलाई 2024 से नए कानून लागू हुए दस माह बीत चुके हैं लेकिन पुलिसकर्मियों को बीएनएस और अन्य नए कानूनों की धाराओं की पूरी जानकारी नहीं हो सकी है। केस दर्ज करने से लेकर विवेचना तक में मुंशी, दरोगा और इंस्पेक्टर लगातार गलती कर रहे हैं। इसका मुकदमों पर असर पड़ रहा है।

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UP: Investigators not have knowledge of new sections, cases are getting suffocated, cases are getting weak
यूपी पुलिस जांच के दाैरान - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

नए कानून लागू हुए 10 माह बीत चुके हैं, लेकिन पुलिसकर्मियों को अभी तक बीएनएस की सही धाराओं का ज्ञान नहीं हो पाया है। केस दर्ज करने वाले मुंशी हों या विवेचना करने वाले दरोगा और इंस्पेक्टर, कुछ न कुछ खामियां छोड़ रहे हैं। इसका असर मुकदमों पर पड़ रहा है। विवेचक किसी केस में अतिरिक्त धाराएं लगा रहे हैं तो किसी केस से धाराएं ही गायब कर दे रहे हैं।

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वादी इसकी शिकायत पुलिस अफसरों से कर रहे हैं। बाद में धाराओं को दुरुस्त कराकर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा रही है। एक जुलाई 2024 से तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू किए गए थे।
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तीनों कानून लागू होने से पहले मुंशी, दरोगा, इंस्पेक्टर, सीओ, एसपी को नए कानूनों की ट्रेनिंग दी गई थी, जिसमें बताया गया था कि एक जुलाई 2024 से पहले की घटनाओं के मुकदमे पुराने कानूनों के तहत दर्ज होंगे। इसके बाद के मुकदमे नए कानूनों के तहत दर्ज होंगे, लेकिन विवेचकों ने एक जुलाई 2024 के भी कई मामलों में पुरानी धाराओं में केस दर्ज कर लिया।
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इसके कारण चार्जशीट दाखिल करने के दाैरान धाराओं में संशोधन करना पड़ा। वहीं कुछ मामलों में वादीपक्ष ने अधिकारियों से भी मुकदमे में गलत धाराएं लगाने की शिकायत की। इसके बाद अधिकारियों ने धाराएं दुुरुस्त  कराईं।

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मुकदमे में नहीं लगाई धोखाधड़ी की धारा
मझोला थाने में एक महिला ने 16 फरवरी 2025 को अपने पति समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। महिला ने बताया कि उसकी शादी 24 नवंबर 2016 को मेरठ निवासी युवक के साथ हुई थी। पीड़िता ने बताया कि आरोपी युवक ने खुद को सरकारी विभाग में कार्यरत बताकर उससे शादी की थी। आरोपी ने आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज भी दिखाए थे।

शादी के बाद आरोपी ने पीड़िता को तरह-तरह से प्रताड़ित किया। आरोपी ने अप्राकृतिक संबंध भी बनाए। यह घटना नए कानून लागू से पहले हुई थी, लेकिन ने पुलिस ने केस में न धोखाधड़ी की धारा-420 आईपीसी और न ही अप्राकृतिक संबंध की धारा-377 आईपीसी केस में लगाई। पीड़िता ने पुलिस अफसरों को प्रार्थनापत्र देकर इसकी शिकायत की।

पुराने कानून के तहत लगा दीं धाराएं 
एक जुलाई 2024 को नए कानून लागू किए गए थे, लेकिन छजलैट थाने में 23 जुलाई 2024 को एक महिला से छेड़खानी और अभद्रता के मामले में केस दर्ज किया गया। इस मामले में पुरानी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। पीड़िता की ओर से इस मामले में पुलिस अफसरों से शिकायत की गई। इसके बाद पुलिस ने चार्जशीट नई धाराओं के तहत दाखिल की।

अपराधों में लगने वाली धाराएं

घटना              आईपीसी      बीएनएस
हत्या                   302         103 (1)
जानलेवा हमला     307         109
दुष्कर्म                 376(1)     64 (1)
छेड़खानी             354          74
धोखाधड़ी            420           318(4)
लूट                     392          309 (2)
रंगदारी               384           308 (2)

विवेचकों और केस दर्ज करने वाले मुंशी को अभी ट्रेनिंग की जरूरत है। नि दरोगा और इंस्पेक्टरों को विवेचना मिल रही है, उनका सेवाकाल लंबा है और उन्हें आईपीसी और सीआरपीसी का अच्छा ज्ञान है। हालांकि, बीएनएस के मामले में वह अल्पज्ञानी हैं। उन्हें अभी नए कानून पढ़ने की जरूरत है। इसके बाद ही सुधार हो सकता है। अन्यथा इस तरह की गलतियां होती रहेंगी। - पीके गोस्वामी, अधिवक्ता

नए कानून लागू हुए 10 माह बीत गए हैं, लेकिन अब भी केस दर्ज करने में धाराओं में गलतियां की जा रही हैं। केस में धाराएं गलत लगने से शुरुआत से लेकर कोर्ट में पैरवी तक परेशानी होती है। इससे बचने के लिए हर थाने में एक जिम्मेदार अधिकारी को समीक्षा के लिए लगाया जाए, जो दर्ज होने वाले केस की जांच करे और सही धाराओं में केस दर्ज कराए। - आनंद मोहन गुप्ता, अधिवक्ता

नए कानून लागू होने से पहले से ही पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को ट्रेनिंग दी गई थी। चार्जशीट की पूरी समीक्षा के बाद ही उसे अदालत में दाखिल किया जाता है। इसके अलावा बीच-बीच में विवेचकों के साथ बैठक कर उनसे नए कानून से संबंधित जानकारियां भी साझा की जाती हैं। - चंद्रप्रकाश मणि त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक, अभियोजन

कुछ विवेचक मुकदमे दर्ज करने में धाराओं में गलतियां कर रहे हैं। वहीं, बीच-बीच में मीटिंग कर अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारियों को इस संबंध में निर्देशित किया जा रहा है। गलत धाराएं लगाने की कुछ शिकायतें आई थीं, जिन्हें ठीक करा दिया गया था। - कुमार रणविजय सिंह, एसपी सिटी

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