यूपी की सबसे बड़ी टैक्स चोरी: मुख्य आरोपी तक नहीं पहुंच सकी एसआईटी, राज्य कर ने पुलिस को साैंपे सभी साक्ष्य
मुरादाबाद में 400 करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले में राज्य कर विभाग के ठोस साक्ष्यों के बावजूद एसआईटी अब तक मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंच सकी है। 31 अक्तूबर को दर्ज दो मुकदमों में नौ लोगों और दो फर्मों को नामजद किया गया था। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। मुख्य आरोपी ने दो मोबाइल नंबरों के आधार पर 144 फर्जी फर्मों का पंजीयन कर 1861 करोड़ का टर्नओवर दिखाया था।
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राज्य कर विभाग द्वारा काफी साक्ष्य देने के बावजूद एसआईटी जीएसटी चोरी के मास्टर माइंड तक नहीं पहुंची है। इस मामले में आरोपियों को कानूनी रूप से भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई भी नहीं की गई है। सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने राज्य कर अधिकारियों की तहरीर पर 31 अक्तूबर को जीएसटी चोरी के मामले में दो केस दर्ज किए थे।
इस मामले में नौ लोगों को नामजद और दो फर्मों को आरोपी बनाया गया। एसएसपी ने एक नवंबर को एसआईटी गठित कर दी। दो दिन बाद एसआईटी ने राज्य कर अधिकारियों के साथ बैठक कर अहम साक्ष्य लिए। बताया गया कि सिर्फ दो मोबाइल नंबरों के आधार पर लखनऊ के अंकित कुमार ने 144 बोगस फर्मों का पंजीयन कराया है।
आरोपी ने केंद्र और राज्य सरकार को करीब 400 करोड़ टैक्स का चूना लगाया है। साथ ही 1861 करोड़ का आरोपियों ने टर्नओवर किया है।एसआईटी में सर्विलांस सेल भी काम कर रहा है। आरोपियों के सीडीआर भी मंगाए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में राज्य कर अधिकारियों, ट्रक चालकों का बयान ले चुकी है।
फिर भी जीएसटी चोरी में शामिल आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े हैं। पुलिस ने आरोपियों को भरोड़ा घोषित करने के लिए अदालत में कोई प्रार्थनापत्र भी नहीं दिया है। लोगों का कहना है कि पुलिस को आरोपियों के खिलाफ धावा बोलना चाहिए। एसआईटी ने लकड़ी कारोबार में दर्ज मुकदमों की भी छानबीन की है लेकिन उसमें भी कोई आरोपी नहीं पकड़ा गया है।
करोड़ों के बिल घूम रहे पर माल नहीं
देश में वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया था। इसी व्यवस्था का सबसे अधिक दुरुपयोग इनपुट टैक्स क्रेडिट चेन के माध्यम से किया जा रहा है। हाल के महीनों में स्टेट जीएसटी द्वारा कुछ ऐसे नेटवर्क पकड़े गए हैं, जो असली व्यापार किए बगैर कागजी बिलों के जरिये करोड़ों रुपये का टैक्स क्रेडिट ले लिए हैं।
राज्य कर विभाग ने लखनऊ के अंकित कुमार की फर्मों को उजागर कर लोहे के स्क्रैप का अवैध धंधा पर गहरी चोट पहुंचाई है। पता चला है कि बोगस फर्मों के माध्यम से अंकित ने लखनऊ से मुजफ्फर नगर और पंजाब तक एक नेटवर्क खड़ा कर दिया था। इस नेटवर्क के माध्यम से लोहे के कारोबारियों ने फर्जी अभिलेखों के आधार पर अरबों का कारोबार किया।
मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर जिले के राज्य कर अधिकारियों ने मुकदमा दर्ज कराकर इस नेटवर्क का खुलासा किया है लेकिन अभी भी देश के अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क का खुलासा नहीं हुआ है। अन्य नेटवर्क की जांच होने पर टैक्स चोरी का दायरा बढ़ता जाएगा।
पता चला है कि कारोबारियों का एक गिरोह एक फर्म का पंजीयन कराकर दूसरे कारोबारियों को फर्जी बिल जारी कर रहे हैं लेकिन माल की बिक्री नहीं करते हैं। वहीं आईटीसी अपने जीएसटीआर 3-बी में क्लेम कर देते हैं। इसी प्रकार फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है।
कुछ फर्में फर्जी बिल और ईवे बिल बनाती हैं। इन फर्मों के प्रोपराइटर मजदूर, ड्राइवर या झुग्गी बस्ती में रहने वाले व्यक्ति भी होते हैं। उनके नाम से पैन कार्ड,आधार कार्ड आदि बनवाकर कारोबारी अपना काला धंधा चमका रहे हैं। लकड़ी की फर्मों की जांच के दौरान राज्य कर अधिकारियों ने इस प्रकार का फर्जीवाड़ा पकड़ा था।