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जेल भूमि घोटाले में फंसे दो डिप्टी कलक्टर
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मुरादाबाद। करोड़ों रुपये के जिस जेल भूमि घोटाले में मुरादाबाद के पूर्व जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर और सेवानिवृत्त एडीएम सिटी एके श्रीवास्तव विजिलेंस मुकदमे का सामना कर रहे हैं, उसी में अब दो डिप्टी कलक्टर विभागीय जांच में फंस गए हैं। तत्कालीन एसडीएम सदर विजय कुमार और तहसीलदार संजय श्रीवास्तव को विभागीय जांच में नियमों के विरुद्ध भूमि विनिमय का दोषी पाया गया है। जांच अधिकारी / एडीएम प्रशासन लक्ष्मी शंकर सिंह का कहना है कि दोनों के अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है।
रामपुर रोड पर जीरो प्वाइंट के पास नियमातपुर इकरोटिया में नई जेल के भूमि खरीदी गई थी। विजिलेंस जांच में खुलासा हो चुका है कि इस भूमि खरीद में अफसरों ने बड़े पैमाने पर घोटाला किया। विजिलेंस रिपोर्ट के मुताबिक इसमें तत्कालीन डीएम, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार से लेकर दूसरे कई अधिकारी शामिल थे। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लक्ष्मी शंकर सिंह ने बताया कि विभागीय जांच में उजागर हुआ है कि तत्कालीन एसडीएम सदर विजय कुमार और तत्कालीन तहसीलदार संजय श्रीवास्तव ने नियमों के विपरीत जाकर जेल प्रोजेक्ट के लिए वक्फ की भूमि का विनिमय किया था। विजय कुमार अब मुजफ्फर नगर में तैनात हैं। जबकि संजय श्रीवास्तव भी तरक्की पाकर डिप्टी कलक्टर बन चुके हैं। एडीएम प्रशासन ने बताया कि आरोप पत्र तैयार कर लिया गया है। इसे शासन को भेजा जाएगा। जबकि मामले में दोषी पाए गए कई अन्य कर्मचारियों को स्थानीय स्तर से चार्जशीट दे दी गई है।
दरअसल तत्कालीन डीएम जुहैर बिन सगीर व अन्य अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने जेल प्रोजेक्ट के बगल में अपने करीबी एक होटल कारोबारी को सस्ती दरों पर भूमि खरीदवाई और बाद में यह भूमि चार गुना दाम पर जेल प्रोजेक्ट के लिए खरीद ली गई। जबकि यह भूमि जेल प्रोजेक्ट के दायरे में नहीं थी। बाद में नियमों को ताक पर रखकर इस भूमि का विनिमय जेल प्रोजेक्ट के अंदर आ रही वक्फ भूमि से कर दिया गया था।
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रामपुर रोड पर जीरो प्वाइंट के पास नियमातपुर इकरोटिया में नई जेल के भूमि खरीदी गई थी। विजिलेंस जांच में खुलासा हो चुका है कि इस भूमि खरीद में अफसरों ने बड़े पैमाने पर घोटाला किया। विजिलेंस रिपोर्ट के मुताबिक इसमें तत्कालीन डीएम, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार से लेकर दूसरे कई अधिकारी शामिल थे। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लक्ष्मी शंकर सिंह ने बताया कि विभागीय जांच में उजागर हुआ है कि तत्कालीन एसडीएम सदर विजय कुमार और तत्कालीन तहसीलदार संजय श्रीवास्तव ने नियमों के विपरीत जाकर जेल प्रोजेक्ट के लिए वक्फ की भूमि का विनिमय किया था। विजय कुमार अब मुजफ्फर नगर में तैनात हैं। जबकि संजय श्रीवास्तव भी तरक्की पाकर डिप्टी कलक्टर बन चुके हैं। एडीएम प्रशासन ने बताया कि आरोप पत्र तैयार कर लिया गया है। इसे शासन को भेजा जाएगा। जबकि मामले में दोषी पाए गए कई अन्य कर्मचारियों को स्थानीय स्तर से चार्जशीट दे दी गई है।
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दरअसल तत्कालीन डीएम जुहैर बिन सगीर व अन्य अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने जेल प्रोजेक्ट के बगल में अपने करीबी एक होटल कारोबारी को सस्ती दरों पर भूमि खरीदवाई और बाद में यह भूमि चार गुना दाम पर जेल प्रोजेक्ट के लिए खरीद ली गई। जबकि यह भूमि जेल प्रोजेक्ट के दायरे में नहीं थी। बाद में नियमों को ताक पर रखकर इस भूमि का विनिमय जेल प्रोजेक्ट के अंदर आ रही वक्फ भूमि से कर दिया गया था।
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