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Moradabad News: सत्र के तीन माह गुजरे, विद्यार्थियों को नहीं मिलीं किताबें

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2024 07:03 AM IST
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Three months of the session have passed, students have not received books
मुरादाबाद।
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नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत हुए साढ़े तीन माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन परिषदीय स्कूलों के कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों को अभी तक किताबें नहीं मिल सकी हैं। इसकी वजह से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बीएसए का कहना है कि बृहस्पतिवार से किताबों का वितरण शुरू हो जाएगा।
मुरादाबाद में बेसिक शिक्षा विभाग के 1408 विद्यालयों में करीब एक लाख 80 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। छात्रों को शासन की ओर से निशुल्क किताबें दी जाती हैं। इस बार कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों को बदले हुए पाठ्यक्रम की लगभग दो लाख 85 हजार किताबें मिलनी हैं। बताया जाता है कि करीब दस दिन पहले जिला स्तर पर करीब 90 हजार किताबें पहुंच भी चुकी हैं, लेकिन अभी तक विद्यालयों में नहीं पहुंची हैं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला कोषाध्यक्ष संजय कुमार का कहना है कि शासन द्वारा निर्धारित समय सीमा के हिसाब से बच्चों की पढ़ाई करवाई जाती है। किताबों में ही पढ़ाई का कार्यक्रम महीने के हिसाब से लिखा होता है। ऐसे में किताबें न मिलने की वजह से पढ़ाई बहुत ज्यादा प्रभावित हो रही है। बीएसए विमलेश कुमार ने बताया कि मंगलवार तक सत्यापन कार्य करवाया गया है। अब बृहस्पतिवार से स्कूलों में किताबों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
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सभी बच्चों को नहीं मिल पाईं पुरानी किताबें
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन ने पुरानी किताबों को जमा करने के भी निर्देश दिए हैं। कक्षा एक और दो में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र बहुत कम होती है। इसकी वजह से ज्यादातर बच्चे सत्र पूरा हाेने तक अपनी किताबों को फाड़ लेते हैं। उनकी कार्य पुस्तिका भी पूरी भर जाती है। इसके कारण लगभग 50 फीसदी बच्चों को किसी भी तरह की किताब नहीं मिल पाती है।
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उर्दू की नहीं आईं किताबें
महानगर अध्यक्ष राकेश कौशिका का कहना है कि कक्षा छह के विद्यार्थियों का भी पूरा पाठ्यक्रम नहीं आया है। इसके अलावा नगर के विद्यालयों में करीब 60 फीसदी विद्यार्थी उर्दू की किताबें पढ़ते हैं। लेकिन अभी तक उर्दू की किताबें नहीं आई हैं। विद्यार्थी बार-बार उर्दू की किताबों के बारे में पूछते हैं, लेकिन हम उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
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