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सूफी की वाणी ने दिया ज्ञान तो दरगाह के लिए किया भूदान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 11:33 PM IST
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The voice of Sufi gave the knowledge, then did Bhoodan for the Dargah
सूफी की वाणी ने दिया ज्ञान तो दरगाह के लिए किया भूदान
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व्यापारी की एक बीघा जमीन से क्षेत्र में लहलहाई हिंदू-मुस्लिम एकता की फसल
मिलक (रामपुर)। अक्सर सियासी तरकरीरें जहां इंसानियत को पीछे करके धार्मिक या जातीय आधार पर लोगों के बीच दूरियां बढ़ाती हैं, वहीं संतों और सूफियों की वाणी कभी-कभी ऐसा असर छोड़ती है कि मतभेद और मनभेद दूर हो जाते हैं। ऐसा ही उदाहरण देखने को मिलता है मिलक क्षेत्र में, जहां सूफियाना वाणी ने एक व्यापारी को भूमि के दान के लिए प्रेरित कर दिया। हिंदू व्यापारी द्वारा दान में दी गई लगभग एक बीघा भूमि पर दरगाह का निर्माण हुआ। हर वर्ष दरगाह पर आयोजित होने वाला उर्स न सिर्फ हिंदू-मुस्लिम मुरीदों को एक सूत्र में पिरोता है, बल्कि सामाजिक समरसता की मिसाल भी बनता है।
मिलक क्षेत्र के ग्राम नयागांव में रहने वाले प्रदीप कुमार शर्मा पेशे से व्यापारी हैं। करीब 14 साल पहले दरगाह के लिए जमीन के दान की उनकी पहल ने तमाम लोगों का ध्यान खींच लिया था। प्रदीप बताते हैं कि इस फैसले से चौंके करीबी लोगों ने उनकी ओर सवालिया निगाहों से देखा। जब उन्होंने आपबीती बताई तो सवाल उठाने वाले भी उनके इस कदम को सराहने लगे। उनके द्वारा दान में दी गई जमीन पर वर्षों से सालाना उर्स हो रहा है। इस दौरान उनकी कहानी दोहराई जाती है तो उर्स में जुटने वाले लोग धार्मिक भावना से ऊपर उठकर एक-दूसरे के लिए समर्पण की सोच तक बढ़ते हैं।
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प्रदीप के मुताबिक 14 साल पहले वह परिस्थितिवश खुद व परिवार को लेकर चिंता से गुजर रहे थे। अचानक फकीराना मिजाज के एक शख्स उनके घर पहुंच गए। प्रदीप ने उन्हें सम्मान दिया तो पूरे परिवार को आशीर्वाद देते हुए चले गए। जाते-जाते इंसानियत को प्राथमिकता की नसीहत भी दे गए। मालूम करने पर पता चला कि वह शख्स सूफी बाबा मटरू शाह मस्तान थे। घूम-घूम कर लोगों को अच्छी शिक्षा और दुआएं देकर आगे बढ़ जाते थे। प्रदीप ने बताया कि बाबा के आशीर्वाद के बाद उनकी व परिवार की स्थितियों में सुधार हुआ। उन्हें पुत्र प्राप्ति भी हुई। इसके बाद वह बाबा तक पहुंचे और उनकी पसंद की कोई चीज भेंट करने की इच्छा व्यक्त की। जवाब में बाबा ने मुस्कुराते हुए कुछ भी लेने से इनकार कर दिया। कहा, जब भी कुछ दो वो समाज के लिए और नेक काम के लिए दो।
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प्रदीप का कहना है कि बाबा की यह बात मन में बैठ गई। कुछ समय बाद बाबा मटरू शाह मस्तान के इंतकाल की खबर मिली। बाबा से प्रभावित क्षेत्र के लोग उनकी मजार के लिए प्रयास करने लगे लेकिन तत्काल जमीन उपलब्ध नहीं थी। यहीं से उनके मन में अपनी एक बीघा जमीन दान देने का ख्याल आया। उनके इस एलान ने मुस्लिम समाज को चौंकाया। देखते-देखते उनके द्वारा दान की गई जमीन पर बाबा की दरगाह तैयार हो गई। एक दशक से ज्यादा वक्त से वहां सालाना उर्स का आयोजन हो रहा है। धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर लोग उसमें शामिल होते हैं। उर्स के दौरान आसपास मेले जैसे माहौल में तमाम लोग रोजगार भी पाते हैं।

- हमेशा से रामपुर जिला गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक रहा है। प्रदीप कुमार शर्मा जैसे दानवीरों ने इस तहजीब को और मजबूती दी है। समूचा मुस्लिम समुदाय लंबे समय उनके इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा करता है। सालाना उर्स में दस्तारबंदी करके प्रदीप कुमार शर्मा को सम्मानित किया जाता है।
-शब्बन मियां आजर, सदर, इंतजामिया कमेटी दरगाह, ग्राम नवदिया (मिलक)
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