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Moradabad News: सरकारी दुकानों को खाली कराने गई टीम का विरोध, हंगामा, घेराव
Thu, 17 Apr 2025 01:05 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Thu, 17 Apr 2025 01:05 AM IST
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शाहबाद। जिला समाज कल्याण विभाग की दुकानें खाली कराने गई टीम को लोगों का विरोध झेलना पड़ा। टीम के साथ आए सहायक प्रबंधक पर अधिकारियों के सामने ही लोगों ने घूसखोरी के आरोप लगाए और घेराव कर हंगामा शुरू कर दिया। इसी घेराव से बचाने के लिए अधिकारियों ने सहायक प्रबंधक को ब्लॉक में भेज दिया। लेकिन, भीड़ ब्लॉक के अंदर घुसने की कोशिश करने लगी। गनीमत रही कि पुलिस ने भीड़ को रोक दिया। हालांकि, सहायक प्रबंधक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया।
शाहबाद में ब्लॉक से सटकर बनीं 37 दुकानों को बेचने की शिकायत के बाद टीम जांच के लिए पहुंची थी। यह दुकानें समाज कल्याण (विकास) विभाग की ओर से वर्ष 1982 में इंदिरा गांधी रोजगार योजना के अंतर्गत बनवाई गई थीं। लेकिन, यह योजना वर्ष 1987 में बंद हो गई थी। इन 37 दुकानों में से कुछ दुकानों को बेचने का मामला प्रकाश में आया था।
वहीं यह दुकानें जिन्हें आवंटित हुई थीं उन आवंटियों ने दुकानों को किराये पर दे दिया था। साथ ही बिना अनुमति के इन 37 दुकानों में से कुछ दुकानों के ऊपर रहने के लिए आवंटियों (दुकानदारों) ने मकान और जर्जर दुकानों को तोड़कर दोबारा बनवा लिया था।
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डीएम जोगिंदर सिंह के निर्देश पर 19 मार्च को इन दुकानों की जांच करने के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रज्ञा बाजपेई और तहसीलदार राकेश कुमार चंद्र पहुंचे थे। दुकानों की जांच के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट डीएम को भेजी गई थी।
डीएम के निर्देश पर बुधवार शाम को जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रज्ञा बाजपेई, सहायक प्रबंधक संजीव कुमार, एसडीएम हिमांशु उपाध्याय, तहसीलदार राकेश कुमार चंद्र, नायब तहसीलदार हरीश जोशी, अंकुश अंतल और कोतवाली प्रभारी पंकज पंत समेत सभी पुलिस बल के साथ दुकानों को चिह्नित करने और बेदखली करने के लिए पहुंचे।
कुछ दुकानों पर लाल निशान लगा दिए गए। कुछ दुकानदारों से दुकानें खाली करने को कहा। लेकिन महेशचंद्र, अतुल कुमार, ख्यालीराम, अनूप सिंह, अर्जुन सिंह, जबर सिंह समेत कई आवंटी भड़क गए। पहले दो आवंटियों के बीच में नोकझोंक हुई। उसके बाद कई आवंटियों ने टीम के साथ में आए सहायक प्रबंधक संजीव कुमार पर दुकानों का निर्माण कराने और दोबारा दुकानों का आवंटित करने के एवज में घुसखोरी के आरोप लगा दिए।
सभी अधिकारियों के सामने कई आवंटियों ने घूसखोरी का आरोप लगाते हुए सहायक प्रबंधक को घेर लिया और काफी देर तक हंगामा हुआ। मामले को गर्माता देखकर अधिकारियों ने इशारों में ही सहायक प्रबंधक को ब्लॉक के अंदर भेज दिया। लेकिन, भड़की भीड़ के लोग ब्लॉक परिसर में घुसने की कोशिश करने लगे। जिन्हें पुलिस ने रोका लिया। इसके बाद अधिकारियों ने अग्रिम कार्रवाई को लेकर आपस में ब्लॉक सभागार में बैठक की। अधिकारियों ने कहा कि दुकानों की बेदखली करने की कार्रवाई की जाएगी।
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37 दुकानों में 26 दुकानें बिलकुल गलत हैं। इनमें कुछ आवंटियों ने दुकानें बेच दी हैं। कुछ आवंटियों ने बिना अनुमति के दुकानों के निर्माण कर लिए और मकान बनवा लिए हैं, जोकि गलत है। इन्हें बेदखल किया जाएगा और जर्जर दुकानें खाली कराकर गिरवाया जाएगा। बाकी 11 दुकानों की भी जांच करवाई जाएगी। - प्रज्ञा बाजपेई, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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जो लोग मुझ पर घूसखोरी का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें मैं जानता भी नहीं हूं। किसी पर घूसखोरी का आरोप लगा देना बहुत आसान है। मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं। हम केवल कार्रवाई के लिए आए हैं। -संजीव कुमार, सहायक प्रबंधक, जिला समाज कल्याण विभाग
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आवंटी बोले- जाएंगे कोर्ट
दुकानों के प्रकरण में आरोप लगाने वाले आवंटियों ने बताया कि वह अब दुकानें खाली नही करेंगे, क्योंकि इन दुकानों से उनका रोजगार जुड़ा हुआ है। आवंटियों ने कहा कि जिस समय दुकानों का निर्माण कराया जा रहा था, या दुकानों के ऊपर मकान बन रहे थे। तो उस दौरान जिला समाज कल्याण विभाग से लोग आए थे। आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौरान दुकानों के निर्माण और दुकानों के ऊपर बनवाए गए मकानों के एवज में घूस दी गई थी। अपनी दुकानों को बचाने के लिए वह सभी कोर्ट की शरण लेंगे और कार्रवाई करेंगे।
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शाहबाद में ब्लॉक से सटकर बनीं 37 दुकानों को बेचने की शिकायत के बाद टीम जांच के लिए पहुंची थी। यह दुकानें समाज कल्याण (विकास) विभाग की ओर से वर्ष 1982 में इंदिरा गांधी रोजगार योजना के अंतर्गत बनवाई गई थीं। लेकिन, यह योजना वर्ष 1987 में बंद हो गई थी। इन 37 दुकानों में से कुछ दुकानों को बेचने का मामला प्रकाश में आया था।
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वहीं यह दुकानें जिन्हें आवंटित हुई थीं उन आवंटियों ने दुकानों को किराये पर दे दिया था। साथ ही बिना अनुमति के इन 37 दुकानों में से कुछ दुकानों के ऊपर रहने के लिए आवंटियों (दुकानदारों) ने मकान और जर्जर दुकानों को तोड़कर दोबारा बनवा लिया था।
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डीएम जोगिंदर सिंह के निर्देश पर 19 मार्च को इन दुकानों की जांच करने के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रज्ञा बाजपेई और तहसीलदार राकेश कुमार चंद्र पहुंचे थे। दुकानों की जांच के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट डीएम को भेजी गई थी।
डीएम के निर्देश पर बुधवार शाम को जिला समाज कल्याण अधिकारी प्रज्ञा बाजपेई, सहायक प्रबंधक संजीव कुमार, एसडीएम हिमांशु उपाध्याय, तहसीलदार राकेश कुमार चंद्र, नायब तहसीलदार हरीश जोशी, अंकुश अंतल और कोतवाली प्रभारी पंकज पंत समेत सभी पुलिस बल के साथ दुकानों को चिह्नित करने और बेदखली करने के लिए पहुंचे।
कुछ दुकानों पर लाल निशान लगा दिए गए। कुछ दुकानदारों से दुकानें खाली करने को कहा। लेकिन महेशचंद्र, अतुल कुमार, ख्यालीराम, अनूप सिंह, अर्जुन सिंह, जबर सिंह समेत कई आवंटी भड़क गए। पहले दो आवंटियों के बीच में नोकझोंक हुई। उसके बाद कई आवंटियों ने टीम के साथ में आए सहायक प्रबंधक संजीव कुमार पर दुकानों का निर्माण कराने और दोबारा दुकानों का आवंटित करने के एवज में घुसखोरी के आरोप लगा दिए।
सभी अधिकारियों के सामने कई आवंटियों ने घूसखोरी का आरोप लगाते हुए सहायक प्रबंधक को घेर लिया और काफी देर तक हंगामा हुआ। मामले को गर्माता देखकर अधिकारियों ने इशारों में ही सहायक प्रबंधक को ब्लॉक के अंदर भेज दिया। लेकिन, भड़की भीड़ के लोग ब्लॉक परिसर में घुसने की कोशिश करने लगे। जिन्हें पुलिस ने रोका लिया। इसके बाद अधिकारियों ने अग्रिम कार्रवाई को लेकर आपस में ब्लॉक सभागार में बैठक की। अधिकारियों ने कहा कि दुकानों की बेदखली करने की कार्रवाई की जाएगी।
37 दुकानों में 26 दुकानें बिलकुल गलत हैं। इनमें कुछ आवंटियों ने दुकानें बेच दी हैं। कुछ आवंटियों ने बिना अनुमति के दुकानों के निर्माण कर लिए और मकान बनवा लिए हैं, जोकि गलत है। इन्हें बेदखल किया जाएगा और जर्जर दुकानें खाली कराकर गिरवाया जाएगा। बाकी 11 दुकानों की भी जांच करवाई जाएगी। - प्रज्ञा बाजपेई, जिला समाज कल्याण अधिकारी
जो लोग मुझ पर घूसखोरी का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें मैं जानता भी नहीं हूं। किसी पर घूसखोरी का आरोप लगा देना बहुत आसान है। मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं। हम केवल कार्रवाई के लिए आए हैं। -संजीव कुमार, सहायक प्रबंधक, जिला समाज कल्याण विभाग
आवंटी बोले- जाएंगे कोर्ट
दुकानों के प्रकरण में आरोप लगाने वाले आवंटियों ने बताया कि वह अब दुकानें खाली नही करेंगे, क्योंकि इन दुकानों से उनका रोजगार जुड़ा हुआ है। आवंटियों ने कहा कि जिस समय दुकानों का निर्माण कराया जा रहा था, या दुकानों के ऊपर मकान बन रहे थे। तो उस दौरान जिला समाज कल्याण विभाग से लोग आए थे। आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौरान दुकानों के निर्माण और दुकानों के ऊपर बनवाए गए मकानों के एवज में घूस दी गई थी। अपनी दुकानों को बचाने के लिए वह सभी कोर्ट की शरण लेंगे और कार्रवाई करेंगे।