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Moradabad News: बनारसी जुबान पर चढ़ा मुरादाबादी दाल का स्वाद...मन भाए चूरमा लड्डू
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मुरादाबाद। बनारसी युवाओं की जुबान पर इन दिनों मुरादाबादी दाल का स्वाद चढ़ा हुआ है। वह जी भरकर चूरमा के लड्डू खा रहे हैं और मुरादाबाद की धरोहरों का भ्रमण कर रहे हैं। यहां की परंपरा और संस्कृति के रूबरू हो रहे हैं। यह सबकुछ हो रहा है मेरा युवा भारत मुरादाबाद की ओर से युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश पर आयोजित अंतर जनपद युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में। युवाओं ने कहा कि वह प्रेरणा और सुनहरी यादें लेकर वापस लौटेंगे।
अंतर जनपद युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत बनारस से 35 प्रतिभागी मुरादाबाद के पांच दिवसीय प्रवास पर हैं। भ्रमण के तीसरे दिन युवाओं ने रामनगर स्थित गर्जिया देवी मंदिर और हनुमान धाम का दौरा किया। उन्होंने वहां पूजा अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया। युवाओं ने जिम कॉर्बेट पार्क का भी सीमित भ्रमण किया। वापस आते हुए युवाओं ने स्थानीय पीतल बाजार को भी देखा। उप निदेशक अंकित कुमार ने बताया कि सभी युवा संविधान पार्क, हनुमान वाटिका, लालबाग स्थित कालीमाता मंदिर, श्री महाकालेश्वर धाम का भ्रमण कर चुके हैं। इन्हें यहां के प्राचीन इतिहास के बारे में भी बताया गया है। युवाओं ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के नजदीक यह उभरता हुआ बेहद खूबसूरत शहर है। इस दौरान कार्यक्रम अधिकारी रंजीत कुमार सैनी, डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता, सौरभ सिंह, चंद्र सिंह, विकास भरत शर्मा आदि मौजूद रहे।
वर्जन...
मैं बीएड द्वितीय वर्ष का छात्र हूं। संविधान पार्क बहुत अलग लगा। यह बनारस में नहीं है। यहां पर संविधान से संबंधित चीजों को विधिवत तरीके से दर्शाया गया है। इसके अलावा पीतल की नक्काशी दिल को छू गई है। मुझे स्थानीय भोजन और चूरमा के लड्डू बहुत पसंद आए। कृषि विभाग में नौकरी करने की तैयारी कर रहा हूं। - नवनीत, राजा तालाब, अराजी लाइन ब्लॉक
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बीए तीसरे वर्ष की छात्रा हूं। भविष्य में मुझे अधिवक्ता बनना है। मुरादाबाद में पहली बार आई हूं। यहां का खाना, सभी स्थल जैसे संविधान पार्क, हनुमान वाटिका, लालबाग स्थित कालीमाता मंदिर और श्री महाकालेश्वर धाम मंदिर मुझे बहुत पसंद आया। खासकर काली माता मंदिर के शांत वातावरण में बहुत सुकून मिला। हमारे यहां मुरादाबादी दाल नहीं मिलती। इसका स्वाद जीवनभर याद रहेगा। - रुचि राजभर, चिरयीगांव
- मैं कक्षा 11 की छात्रा हूं। मॉडलिंग में कॅरिअर बनाना है। यहां मुझे सबकुछ इतना अच्छा लग रहा है कि वापस जाने का मन नहीं है। दाल मुरादाबादी के अलावा काशीफल की मीठी सब्जी बहुत पसंद आई। यहां की भाषा अलग है, पर भाव बहुत अच्छे हैं। संविधान वाटिका और काली माता मंदिर घूमने गए थे। स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट भी बढि़या था। - सानिया विश्वकर्मा, सेवापुरी ब्लॉक
- मैंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स किया है और सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा हूं। मुझे यहां का स्वागत बहुत पसंद आया। गुलाब का फूल, शॉल और स्मृति चिह्न से किया गया स्वागत कभी न भूलने वाला है। लर्निंग थ्रू ट्रैवलिंग विषय पर जब हम संविधान वाटिका भ्रमण करने गए तो संविधान समिति के गठन से लेकर संविधान बनने तक की यात्रा दर्शायी गई है। यह मेरी तैयारी में मददगार होगा।
कौसलेश यादव, हासिमपुर गांव
- मैंने एलएलबी की है। एलएलएम की तैयारी कर रहा हूं। हमारे यहां लोहे का कारोबार होता है। चूंकि मुरादाबाद पीतलनगरी है। इसलिए पीतल के कारोबार की विशेष जानकारियां हासिल करना चाहता हूं। कालीमाता मंदिर के अलावा गर्जिया देवी मंदिर मुझे बहुत अच्छा लगा। हमारे यहां खाने में मसालों का ज्यादा इस्तेमाल होता है। जबकि यहां के खाने की बहुत सौंधी खुशबू होती है, खासकर मुरादाबादी दाल का स्वाद अलग ही है।
राहुल विश्वकर्मा, हरहुआ लमही
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अंतर जनपद युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत बनारस से 35 प्रतिभागी मुरादाबाद के पांच दिवसीय प्रवास पर हैं। भ्रमण के तीसरे दिन युवाओं ने रामनगर स्थित गर्जिया देवी मंदिर और हनुमान धाम का दौरा किया। उन्होंने वहां पूजा अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया। युवाओं ने जिम कॉर्बेट पार्क का भी सीमित भ्रमण किया। वापस आते हुए युवाओं ने स्थानीय पीतल बाजार को भी देखा। उप निदेशक अंकित कुमार ने बताया कि सभी युवा संविधान पार्क, हनुमान वाटिका, लालबाग स्थित कालीमाता मंदिर, श्री महाकालेश्वर धाम का भ्रमण कर चुके हैं। इन्हें यहां के प्राचीन इतिहास के बारे में भी बताया गया है। युवाओं ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के नजदीक यह उभरता हुआ बेहद खूबसूरत शहर है। इस दौरान कार्यक्रम अधिकारी रंजीत कुमार सैनी, डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता, सौरभ सिंह, चंद्र सिंह, विकास भरत शर्मा आदि मौजूद रहे।
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मैं बीएड द्वितीय वर्ष का छात्र हूं। संविधान पार्क बहुत अलग लगा। यह बनारस में नहीं है। यहां पर संविधान से संबंधित चीजों को विधिवत तरीके से दर्शाया गया है। इसके अलावा पीतल की नक्काशी दिल को छू गई है। मुझे स्थानीय भोजन और चूरमा के लड्डू बहुत पसंद आए। कृषि विभाग में नौकरी करने की तैयारी कर रहा हूं। - नवनीत, राजा तालाब, अराजी लाइन ब्लॉक
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बीए तीसरे वर्ष की छात्रा हूं। भविष्य में मुझे अधिवक्ता बनना है। मुरादाबाद में पहली बार आई हूं। यहां का खाना, सभी स्थल जैसे संविधान पार्क, हनुमान वाटिका, लालबाग स्थित कालीमाता मंदिर और श्री महाकालेश्वर धाम मंदिर मुझे बहुत पसंद आया। खासकर काली माता मंदिर के शांत वातावरण में बहुत सुकून मिला। हमारे यहां मुरादाबादी दाल नहीं मिलती। इसका स्वाद जीवनभर याद रहेगा। - रुचि राजभर, चिरयीगांव
- मैं कक्षा 11 की छात्रा हूं। मॉडलिंग में कॅरिअर बनाना है। यहां मुझे सबकुछ इतना अच्छा लग रहा है कि वापस जाने का मन नहीं है। दाल मुरादाबादी के अलावा काशीफल की मीठी सब्जी बहुत पसंद आई। यहां की भाषा अलग है, पर भाव बहुत अच्छे हैं। संविधान वाटिका और काली माता मंदिर घूमने गए थे। स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट भी बढि़या था। - सानिया विश्वकर्मा, सेवापुरी ब्लॉक
- मैंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स किया है और सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा हूं। मुझे यहां का स्वागत बहुत पसंद आया। गुलाब का फूल, शॉल और स्मृति चिह्न से किया गया स्वागत कभी न भूलने वाला है। लर्निंग थ्रू ट्रैवलिंग विषय पर जब हम संविधान वाटिका भ्रमण करने गए तो संविधान समिति के गठन से लेकर संविधान बनने तक की यात्रा दर्शायी गई है। यह मेरी तैयारी में मददगार होगा।
कौसलेश यादव, हासिमपुर गांव
- मैंने एलएलबी की है। एलएलएम की तैयारी कर रहा हूं। हमारे यहां लोहे का कारोबार होता है। चूंकि मुरादाबाद पीतलनगरी है। इसलिए पीतल के कारोबार की विशेष जानकारियां हासिल करना चाहता हूं। कालीमाता मंदिर के अलावा गर्जिया देवी मंदिर मुझे बहुत अच्छा लगा। हमारे यहां खाने में मसालों का ज्यादा इस्तेमाल होता है। जबकि यहां के खाने की बहुत सौंधी खुशबू होती है, खासकर मुरादाबादी दाल का स्वाद अलग ही है।
राहुल विश्वकर्मा, हरहुआ लमही