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Moradabad News: सिर्फ परीक्षा का है परिणाम, जिंदगी का नहीं, इसलिए तनाव न लें विद्यार्थी व अभिभावक
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मुरादाबाद। जिले के करीब 78 हजार विद्यार्थियों को यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम का बेसब्री से इंतजार है। शनिवार को आने वाले परिणाम को लेकर मनोविशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम है, जिंदगी का नहीं। इसलिए विद्यार्थी और उनके माता-पिता तनाव न लें।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरुण कुमार दुबे ने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा का परिणाम शनिवार को दोपहर दो बजे घोषित किया जाएगा। मुरादाबाद में हाईस्कूल में करीब 42 हजार और इंटरमीडिएट में 36 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा परिषद की वेबसाइट और एनआईसी की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
मनोविश्लेषक डॉ. मीनू मेहरोत्रा ने कहा कि जैसा परीक्षा में लिखा है, उस तरह के परिणाम के लिए मानसिक रूप से तैयार होंगे। लेकिन किसी स्थिति में ऐसा होता है आठ से दस फीसदी परिणाम कम या ज्यादा हो सकता है। यदि किसी का कम होता है तो उस पर तनाव लेने के बजाय ईमानदार विश्लेषण करने की आवश्यकता है। परीक्षाएं केवल व्यक्ति का विश्लेषण करने के लिए होती हैं। परिणाम चाहे सुखद या दुखद हो, उसे अंतिम न मानें। यदि किसी भी बच्चे को असफलता मिलती है तो परिजनों को ध्यान रखना है कि उलाहना और तानाकशी नहीं करनी है। परिणाम आने के बाद केवल सुधार के तरीके हो सकते हैं। कई बार बच्चों के माता-पिता अवसाद में आ जाते हैं और बच्चों के साथ गलत व्यवहार करते हैं। परिणाम को हृदय से स्वीकार कर उसे कुछ दिनों के बाद विश्लेषण करके कमियों को दूर कर आगे के वर्षों के में कैसे सुधार करें, इस पर मंथन किया जाता है।
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जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरुण कुमार दुबे ने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा का परिणाम शनिवार को दोपहर दो बजे घोषित किया जाएगा। मुरादाबाद में हाईस्कूल में करीब 42 हजार और इंटरमीडिएट में 36 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा परिषद की वेबसाइट और एनआईसी की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
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मनोविश्लेषक डॉ. मीनू मेहरोत्रा ने कहा कि जैसा परीक्षा में लिखा है, उस तरह के परिणाम के लिए मानसिक रूप से तैयार होंगे। लेकिन किसी स्थिति में ऐसा होता है आठ से दस फीसदी परिणाम कम या ज्यादा हो सकता है। यदि किसी का कम होता है तो उस पर तनाव लेने के बजाय ईमानदार विश्लेषण करने की आवश्यकता है। परीक्षाएं केवल व्यक्ति का विश्लेषण करने के लिए होती हैं। परिणाम चाहे सुखद या दुखद हो, उसे अंतिम न मानें। यदि किसी भी बच्चे को असफलता मिलती है तो परिजनों को ध्यान रखना है कि उलाहना और तानाकशी नहीं करनी है। परिणाम आने के बाद केवल सुधार के तरीके हो सकते हैं। कई बार बच्चों के माता-पिता अवसाद में आ जाते हैं और बच्चों के साथ गलत व्यवहार करते हैं। परिणाम को हृदय से स्वीकार कर उसे कुछ दिनों के बाद विश्लेषण करके कमियों को दूर कर आगे के वर्षों के में कैसे सुधार करें, इस पर मंथन किया जाता है।
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