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Moradabad News: बंद और एक कमरों के स्कूलों से निकला बालिका शिक्षा का संदेश

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 02:39 AM IST
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The message of girls' education emerged from single-room schools.
मुरादाबाद। कुछ वर्ष पहले तक भले ही मूंढापांडे और कुंदरकी ब्लॉक के दो स्कूल बंद और एक कमरे वाले थे, लेकिन वहां कार्यरत शिक्षिकाओं ने हिम्मत नहीं हारी। उनके कठिन परिश्रम के बल पर वहां पर न सिर्फ बच्चों का उत्साह गूंजता है, बल्कि छात्राओं की बढ़ती संख्या बालिका सशक्तीकरण का उदाहरण हैं। एक जगह टीएलएम गेम और नो बैग डे से उत्सव है तो दूसरी जगह विज्ञान प्रदर्शनी और आत्मरक्षा प्रशिक्षण से उड़ान। यह कहानी बताती है कि शिक्षक के जुनून से ही गांव का भविष्य बदलता है।
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घर-घर जाकर किया नामांकन, छात्राओं की संख्या अधिक
ब्लॉक मूंढापांडे के जूनियर हाईस्कूल मुढ़िया मलूकपुर की प्रभारी प्रधानाध्यापिका स्वाति गोयल संघर्ष से सफलता की मिसाल हैं। वर्ष 2015 में जब उन्हें यह विद्यालय मिला तो बंद था। स्कूल में एक भी छात्र नहीं था। भवन में गंदगी और जानवर बंधे थे। उन्होंने हार नहीं मानी और घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक किया। जब विद्यार्थी स्कूल नहीं आते थे तो उन्हें घर से स्कूल लेकर आती थीं। उनकी इसी लगन से अभिभावकों का नजरिया बदला। आज यहां 106 नामांकन हैं, जिनमें 61 बेटियां हैं। गणित-विज्ञान की शिक्षिका स्वाति स्मार्ट क्लास, टीएलएम और वीडियो के जरिये बच्चों को प्रयोग से पढ़ाती हैं। स्कूल के चार बच्चों ने जनपद विज्ञान प्रदर्शनी और खेलकूद प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया है। मीना मंच के जरिये वे बेटियों को आत्मरक्षा सिखाकर मुख्यधारा से जोड़ रही हैं।
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परिसर को किया हरा-भरा, चार्ट से रंगीन दीवारें

कुंदरकी ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल बरखेड़ा की सहायक अध्यापक नीतू सहरावत वर्ष 2023 में अंतर जनपदीय तबादले पर इस विद्यालय में आई थीं। उन्होंने कहा कि पहले यह विद्यालय सिर्फ एक कमरे में चलता था। 70 बच्चों का नामांकन था। बाद में मिशन कायाकल्प के तहत बिल्डिंग का निर्माण हुआ तो उन्होंने परिसर को एक पार्क के रूप में विकसित किया। इसमें पौधे लगाए, जो अब छायादार व फलदार पेड़ बन गए हैं। दीवारों पर बोर्ड लगाए ताकि बच्चे छूकर सीख सकें। अब उनके यहां पर छात्र संख्या 95 है, जिसमें 49 छात्राएं हैं। 100% उपस्थिति पर बच्चों को उपहार दिए जाते हैं। टीएलएम गेम, नो बैग डे और समर कैंप से वे शिक्षा को उत्सव बना रही हैं।
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