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Moradabad News: थर्मामीटर लगा नापा जा रहा कुर्बानी के बकरों का बुखार
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मुरादाबाद। कुर्बानी के लिए बकरों की बिक्री जहां तेज हो गई है वहीं दूर दराज से शहर में बिकने आए बकरों में सर्दी, जुकाम और डायरिया के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि पशु चिकित्साधिकारी सदर पर प्रतिदिन 50 से अधिक बकरे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
कुर्बानी का बकरा स्वस्थ होना चाहिए। लिहाजा कुर्बानी का बकरा खरीदने वाले लोग बकरों में बीमारी से संबंधित थोड़ा बहुत लक्षण देख कर ही चिंतित हो जा रहे हैं। पशु चिकित्साधिकारी सदर डॉ. जितेंद्रवीर सिंह ने बताया कि बदले मौसम के कारण कई बार बकरों में सर्दी, जुकाम और डायरिया के लक्षण देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि कुर्बानी के लिए बकरा खरीद कर लाने वाले करीब 30 लोग मंगलावर बकरों का उपचार कराने पहुंचे। किसी का थर्मामीटर से बुखार चेक किया गया तो किसी को इंजेक्शन आदि लगाया गया।
उन्होंने बताया कि कई खरीदार भी बकरा खरीदने से पहले उसका थर्मामीटर से बुखार चेक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर बकरे का तापमान 103 डिग्री से अधिक है तो उसे बुखार होगा। खांसी आना, नाक आदि बहना और नथुआ आदि का फूलना जुकाम के लक्षण हैं। लूज मोशन डायरिया का लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि इसमें घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक दो दिन के उपचार से वह स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने बकरों में इस तरह के किसी भी लक्षण के होने पर उसे पास के पशु चिकित्सक को दिखाने की सलाह दी है।
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कुर्बानी का बकरा स्वस्थ होना चाहिए। लिहाजा कुर्बानी का बकरा खरीदने वाले लोग बकरों में बीमारी से संबंधित थोड़ा बहुत लक्षण देख कर ही चिंतित हो जा रहे हैं। पशु चिकित्साधिकारी सदर डॉ. जितेंद्रवीर सिंह ने बताया कि बदले मौसम के कारण कई बार बकरों में सर्दी, जुकाम और डायरिया के लक्षण देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि कुर्बानी के लिए बकरा खरीद कर लाने वाले करीब 30 लोग मंगलावर बकरों का उपचार कराने पहुंचे। किसी का थर्मामीटर से बुखार चेक किया गया तो किसी को इंजेक्शन आदि लगाया गया।
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उन्होंने बताया कि कई खरीदार भी बकरा खरीदने से पहले उसका थर्मामीटर से बुखार चेक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर बकरे का तापमान 103 डिग्री से अधिक है तो उसे बुखार होगा। खांसी आना, नाक आदि बहना और नथुआ आदि का फूलना जुकाम के लक्षण हैं। लूज मोशन डायरिया का लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि इसमें घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक दो दिन के उपचार से वह स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने बकरों में इस तरह के किसी भी लक्षण के होने पर उसे पास के पशु चिकित्सक को दिखाने की सलाह दी है।
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