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आपदा को हिम्मत-हुनर से दी मात, डेढ़ साल में 356 लोगों को मिली उद्योग की सौगात

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 30 Aug 2021 02:17 AM IST
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The disaster was defeated with courage and skill, in one and a half year 356 people got the gift of industry
मुरादाबाद। तहसील बिलारी के ग्राम नरौदा निवासी मिंजार हुसैन दो साल पहले तक खराद मशीनों पर खुद मेहनत मजदूरी कर जीविका चलाते थे। अधिक श्रम के बाद भी उन्हें अपनी कारीगरी से संतोषजनक आमदनी नहीं हो पाती थी।
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उन्होंने अपने जैसे कुछ मेहनती श्रमिकों को साथ लेकर अलग काम शुरू किया तो पूंजी आड़े आ गई। उन्होंने जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास कार्यालय से मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराके मेटल हैंडीक्राफ्ट का कार्य शुरू कर दिया। लेकिन पिछले साल जैसे ही उनका कार्य गति पकड़ता कोरोना और लॉकडाउन के ब्रेक नए काम पर भी लग गए। लॉकडाउन खुला तो फिर हिम्मत जुटा नए सिरे से काम शुरू किया।
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कोरोना काल में कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। अब उनकी गिनती जिले के बेहतर लघु उद्यमियों में की जाती है।
ऐसा नहीं कि सिर्फ मिंजार हुसैन ने ही करोना काल में कई उतार चढ़ाव देखे हैं। उनके जैसे पिछले दो साल में 356 लघु उद्यमी युवक और युवतियां हैं,
जिन्होंने आपदा से लड़ते हुए उद्योग को आगे बढ़ाने का काम किया। मिंजार का दावा है कि विपरीत परिस्थिति के बावजूद पिछले वित्तीय वर्ष में उनका टर्नओवर तीन करोड़ रहा। वह अपने उद्योग से करीब 30 अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर रहे हैं।
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डेढ़ साल में 356 नए उद्यम हुए शुरू
मुरादाबाद। कोरोना के चलते पिछले डेढ़ साल में जिले में स्थापित 22 हजार उद्योगों पर भी संकट के बादल मंडराए। कारोबार घटने के कारण उद्यमियों को कर्मचारियों व कारीगरों की भी छंटनी करनी पड़ी। कई उद्योग तो बंदी के कगार पर पहुंच गए। इन सबके बावजूद जिले के 1859 युवाओं ने नया उद्योग स्थापित करने के लिए हिम्मत दिखाई। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना तथा एक जनपद एक उत्पाद, मार्जिन मनी योजना के तहत आवेदन किया। इनमें से मात्र 356 लोगों को ही ऋण प्राप्त होने से उनके लघु उद्यम की शुरुआत हो चुकी है।
- पिछले साल कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान जिले के सभी उद्योग भी बंद रहे थे। इसका उद्यमियों पर खासा प्रभाव भी पड़ा। ऋण की किश्तें देने में भी लोगों को दिक्कतें आईं, लेकिन इस बार करोना के प्रकोप के दौरान उद्योग बंद नहीं हुए। उद्योग स्थापित करने के वाले आवेदकों को बैंक से ऋण में देरी के कारण नए उद्यमों की शुरुआत में वक्त लग जाता है। इसमें तेजी की कोशिश है।

- मनीष कुमार पाठक, असिस्टेंट कमिश्नर, जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र
- ऋण देने की प्रक्रिया में देरी के कई कारण होते हैं। कई बार ऋण पत्रावली में आवेदक अभिलेख पूरे लगा देते हैं, लेकिन भौतिक सत्यापन करने पर स्थिति भिन्न मिलती है। कई बार अभिलेख भी अधूरे होते हैं। अगर बिना वजह कहीं ऋण वितरण की गति धीमी है तो उसे तेज किया जाएगा।
- अतुल बंसल, अग्रणी जिला प्रबंधक
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