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Moradabad News: प्रशासन को नहीं मिल रहे संभल दंगे के मुकदमों के कागज
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मुरादाबाद।
47 साल बाद संभल दंगे की जांच के लिए जानकारी जुटाना प्रशासन के लिए जटिल साबित हो रहा है। प्रशासन को जिला न्यायालय में 1978 के दंगे के मुकदमों से संबंधित दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट है कि कोर्ट ने इन्हें वीड आउट यानी समाप्त नहीं किया है। संभल प्रशासन ने भी गृह विभाग के उपसचिव के पत्र के बाद मुरादाबाद प्रशासन से मदद मांगी है।
जिला न्यायालय से सहयोग लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी पिछले कई दिन से मुकदमों के दस्तावेजों की खोजबीन में जुटे हैं। अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। वहीं संभल जिला प्रशासन को एक सप्ताह में गृह विभाग को जानकारियों की रिपोर्ट भी देनी है। चर्चा है कि यदि कोर्ट ने मुकदमों के कागज वीड आउट नहीं किए तो दो स्थितियों में ही इन्हें खत्म किया जा सकता है। या तो सरकार की ओर से मुकदमे वापस लिए गए हों या फिर सभी आरोपी, पीड़ित व गवाहों की माैत हो चुकी हो।
इन दोनों में से किस कारण को ज्यादा महत्व दिया जाए, इस पर भी प्रशासन असमंजस की स्थिति में है। बिना कागजों के उन लोगों को ढूंढना भी असंभव है जो मुकदमों में गवाह रहे। साथ ही उन अधिकारियों व पुलिसकर्मियों का पता भी नहीं लगाया जा सकता, जिन्होंने मुकदमे दर्ज कराए थे। आरोपियों का पता लगाना भी बेहद मुश्किल है। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि कहानी कोई नया मोड़ ले सकती है। हालांकि, स्पष्ट रूप से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
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- शासन से मांगेंगे सहयोग, जल्द स्पष्ट होगी स्थिति
जिला न्यायालय में दंगे के मुकदमों के कागज न मिलने के बाद अब प्रशासन इस मामले में शासन की मदद लेगा। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि शासन के रिकॉर्ड में दस्तावेज सुरक्षित होंगे। यदि शासन की ओर से सहायता मिली तो चार से पांच दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद ही संभल प्रशासन गृह विभाग को जवाब भेजने की स्थिति में होगा। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि गृह विभाग ने भले ही 1978 के संभल दंगे की जानकारी अब मांगी हो लेकिन मुरादाबाद प्रशासन नवंबर में संभल की जामा मस्जिद में सर्वे को लेकर हुए बवाल के बाद से ही पुराने दंगे की जानकारी जुटाने में जुट गया था।
- रिकॉर्ड के मुताबिक नाै लोगों की हुई थी हत्या
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक 1978 के संभल दंगे में नौ लोगों की हत्या हुई थी। दंगे में 82 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। मुरादाबाद न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई हुई थी। दावा किया जाता है कि इसमें किसी का दोष सिद्ध नहीं हुआ था। वहीं पीड़ित परिवार दंगे में अपनों को खोने का दर्द आज भी महसूस करते हैं। स्थानीय लोग दंगे में मारे गए लोगों की संख्या पुलिस रिकाॅर्ड से कई गुना बताते हैं। दंगे में जान गंवाने वाले बनवारी लाल गोयल के बेटे विनीत कुमार गोयल ने दिसंबर में संभल के डीएम व एसपी से मुलाकात की थी। एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने भी पत्र लिखकर दंगों की फिर से जांच की मांग उठाई थी।
- संभल प्रशासन की अपील से पहले ही 1978 के संभल दंगे की जानकारी जुटाई जा रही है। जिला न्यायालय में मुकदमों के कागज नहीं मिल पाए हैं। अब इस मामले में हम शासन से सहयोग की अपील करेंगे। वहां मुकदमों का रिकॉर्ड सुरक्षित हो सकता है।
- आन्जनेय कुमार सिंह, कमिश्नर, मुरादाबाद
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47 साल बाद संभल दंगे की जांच के लिए जानकारी जुटाना प्रशासन के लिए जटिल साबित हो रहा है। प्रशासन को जिला न्यायालय में 1978 के दंगे के मुकदमों से संबंधित दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट है कि कोर्ट ने इन्हें वीड आउट यानी समाप्त नहीं किया है। संभल प्रशासन ने भी गृह विभाग के उपसचिव के पत्र के बाद मुरादाबाद प्रशासन से मदद मांगी है।
जिला न्यायालय से सहयोग लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी पिछले कई दिन से मुकदमों के दस्तावेजों की खोजबीन में जुटे हैं। अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। वहीं संभल जिला प्रशासन को एक सप्ताह में गृह विभाग को जानकारियों की रिपोर्ट भी देनी है। चर्चा है कि यदि कोर्ट ने मुकदमों के कागज वीड आउट नहीं किए तो दो स्थितियों में ही इन्हें खत्म किया जा सकता है। या तो सरकार की ओर से मुकदमे वापस लिए गए हों या फिर सभी आरोपी, पीड़ित व गवाहों की माैत हो चुकी हो।
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इन दोनों में से किस कारण को ज्यादा महत्व दिया जाए, इस पर भी प्रशासन असमंजस की स्थिति में है। बिना कागजों के उन लोगों को ढूंढना भी असंभव है जो मुकदमों में गवाह रहे। साथ ही उन अधिकारियों व पुलिसकर्मियों का पता भी नहीं लगाया जा सकता, जिन्होंने मुकदमे दर्ज कराए थे। आरोपियों का पता लगाना भी बेहद मुश्किल है। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि कहानी कोई नया मोड़ ले सकती है। हालांकि, स्पष्ट रूप से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
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- शासन से मांगेंगे सहयोग, जल्द स्पष्ट होगी स्थिति
जिला न्यायालय में दंगे के मुकदमों के कागज न मिलने के बाद अब प्रशासन इस मामले में शासन की मदद लेगा। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि शासन के रिकॉर्ड में दस्तावेज सुरक्षित होंगे। यदि शासन की ओर से सहायता मिली तो चार से पांच दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद ही संभल प्रशासन गृह विभाग को जवाब भेजने की स्थिति में होगा। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि गृह विभाग ने भले ही 1978 के संभल दंगे की जानकारी अब मांगी हो लेकिन मुरादाबाद प्रशासन नवंबर में संभल की जामा मस्जिद में सर्वे को लेकर हुए बवाल के बाद से ही पुराने दंगे की जानकारी जुटाने में जुट गया था।
- रिकॉर्ड के मुताबिक नाै लोगों की हुई थी हत्या
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक 1978 के संभल दंगे में नौ लोगों की हत्या हुई थी। दंगे में 82 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। मुरादाबाद न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई हुई थी। दावा किया जाता है कि इसमें किसी का दोष सिद्ध नहीं हुआ था। वहीं पीड़ित परिवार दंगे में अपनों को खोने का दर्द आज भी महसूस करते हैं। स्थानीय लोग दंगे में मारे गए लोगों की संख्या पुलिस रिकाॅर्ड से कई गुना बताते हैं। दंगे में जान गंवाने वाले बनवारी लाल गोयल के बेटे विनीत कुमार गोयल ने दिसंबर में संभल के डीएम व एसपी से मुलाकात की थी। एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने भी पत्र लिखकर दंगों की फिर से जांच की मांग उठाई थी।
- संभल प्रशासन की अपील से पहले ही 1978 के संभल दंगे की जानकारी जुटाई जा रही है। जिला न्यायालय में मुकदमों के कागज नहीं मिल पाए हैं। अब इस मामले में हम शासन से सहयोग की अपील करेंगे। वहां मुकदमों का रिकॉर्ड सुरक्षित हो सकता है।
- आन्जनेय कुमार सिंह, कमिश्नर, मुरादाबाद

मेरठ---एसएन फार्म हाउस 100 फुटा रोड मृतको के शवो को कबिस्तान ले जाते लोगस ------नीटू