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विजिलेंस टीम बनकर ठगों ने ठगा ठगों को
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sun, 16 Oct 2016 02:25 AM IST
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फर्जीवाड़ा
- फोटो : demo pic
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फिल्म बंटी और बब्ली की तर्ज पर ठगों ने बड़े शातिराना ठंग से ठगों को ही ठग लिया। ठगों ने नौकरी का झांसा देकर बेरोजगार से 75 लाख वसूले थे। रकम बैग में भरकर ये ‘गैंग’ लखनऊ की ट्रेन पकड़ने स्टेशन पर पहुंचा था। लेकिन ऐन वक्त पर इनके खेल की भनक ठगों के दूसरे गैंग को लगी गई।
दूसरे ठग विजिलेंस अफसर बनकर स्टेशन पहुंचे और पूछताछ के बहाने ठगों को मय रकम के इनोवा में डालकर साथ ले गए। ठगों का पहला गैंग फर्जी विजिलेंस को असली समझता रहा। एहसास तब हुआ जब 75 लाख लेने के बाद गायब हुई ‘विजिलेंस’ घंटों बाद भी नहीं लौटी।
पोल न खुले इसलिए प्रापर्टी डीलर बनकर ठगों ने लूट की रिपोर्ट लिखा दी लेकिन तफ्तीश में पूरा चिट्ठा सामने आ गया है। काशीपुर के तीन ठगों ने लखनऊ में बैठे एक आला अफसर के जरिए नौकरी लगवाने का झांसा देकर कई युवाओं से दस - दस लाख रुपये की वसूली की थी। मुरादाबाद जिले के तीन युवक भी इन ठगों के जाल में फंस चुके थे।
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हालांकि मुरादाबाद के इन युवकों का दावा है कि ठगों ने उनकी पहचान के कई लोगों की नौकरी लखनऊ में बैठे इसी अफसर के जरिए लगवा दी थी इसलिए उन्हें इन लोगों पर भरोसा हो गया था। बहरहाल बेरोजगार युवाओं से रकम जुटाने के बाद सप्ताहभर पहले काशीपुर के इस गैंग ने कहा कि वह रकम की डिलीवरी अफसर को देने लखनऊ जा रहा है।
तीनों ठग बैग में 75 लाख रुपये लेकर मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे जहां से इन्हें लखनऊ की ट्रेन पकड़नी थी। तीनों प्लेटफार्म पर खड़े थे तभी पीछे से ठगों का दूसरा गैंग विजिलेंस टीम बनकर पहुंच गया। दूसरे ठगों ने पहले ठगों से कहा कि वह विजिलेंस से हैं और उन्हें पता लगा है कि वह (पहला गैंग) घूस लेकर सरकारी नौकरी लगवाता है।
पूछताछ के बहाने इस फर्जी विजिलेंस ने तीनों ठगों को मय रकम के इनोवा में डाला और रकम लेने के बाद तीनों को बिजनौर के बार्डर पर छोड़ दिया। हकीकत बता नहीं सकते थे लिहाजा ठगों के गैंग ने खुद को प्रापर्टी डीलर बताते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी कि वह प्रापर्टी खरीदने लखनऊ जा रहे थे, फर्जी विजिलेंस ने लूट लिया।
हिसाब - किताब देना मुश्किल था लिहाजा लूटी गई रकम भी कम करके बताई। लेकिन इनकी हकीकत ज्यादा वक्त छुप नहीं सकी। नौकरी की आस में रकम देने वालों ने तकादा शुरू किया तो बात पुलिस तक भी पहुंच गई।
तफ्तीश में पूरा मामला खुलकर आने के बाद अब गैंग खामोश है। जीआरपी ने इस मामले में छह दिन पहले चार संदिग्धों को उठाया था, लेकिन दूसरे गैंग का मास्टरमाइंड अभी पकड़ से दूर है। जीआरपी उसकी तलाश कर रही है।
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दूसरे ठग विजिलेंस अफसर बनकर स्टेशन पहुंचे और पूछताछ के बहाने ठगों को मय रकम के इनोवा में डालकर साथ ले गए। ठगों का पहला गैंग फर्जी विजिलेंस को असली समझता रहा। एहसास तब हुआ जब 75 लाख लेने के बाद गायब हुई ‘विजिलेंस’ घंटों बाद भी नहीं लौटी।
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पोल न खुले इसलिए प्रापर्टी डीलर बनकर ठगों ने लूट की रिपोर्ट लिखा दी लेकिन तफ्तीश में पूरा चिट्ठा सामने आ गया है। काशीपुर के तीन ठगों ने लखनऊ में बैठे एक आला अफसर के जरिए नौकरी लगवाने का झांसा देकर कई युवाओं से दस - दस लाख रुपये की वसूली की थी। मुरादाबाद जिले के तीन युवक भी इन ठगों के जाल में फंस चुके थे।
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हालांकि मुरादाबाद के इन युवकों का दावा है कि ठगों ने उनकी पहचान के कई लोगों की नौकरी लखनऊ में बैठे इसी अफसर के जरिए लगवा दी थी इसलिए उन्हें इन लोगों पर भरोसा हो गया था। बहरहाल बेरोजगार युवाओं से रकम जुटाने के बाद सप्ताहभर पहले काशीपुर के इस गैंग ने कहा कि वह रकम की डिलीवरी अफसर को देने लखनऊ जा रहा है।
तीनों ठग बैग में 75 लाख रुपये लेकर मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे जहां से इन्हें लखनऊ की ट्रेन पकड़नी थी। तीनों प्लेटफार्म पर खड़े थे तभी पीछे से ठगों का दूसरा गैंग विजिलेंस टीम बनकर पहुंच गया। दूसरे ठगों ने पहले ठगों से कहा कि वह विजिलेंस से हैं और उन्हें पता लगा है कि वह (पहला गैंग) घूस लेकर सरकारी नौकरी लगवाता है।
पूछताछ के बहाने इस फर्जी विजिलेंस ने तीनों ठगों को मय रकम के इनोवा में डाला और रकम लेने के बाद तीनों को बिजनौर के बार्डर पर छोड़ दिया। हकीकत बता नहीं सकते थे लिहाजा ठगों के गैंग ने खुद को प्रापर्टी डीलर बताते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी कि वह प्रापर्टी खरीदने लखनऊ जा रहे थे, फर्जी विजिलेंस ने लूट लिया।
हिसाब - किताब देना मुश्किल था लिहाजा लूटी गई रकम भी कम करके बताई। लेकिन इनकी हकीकत ज्यादा वक्त छुप नहीं सकी। नौकरी की आस में रकम देने वालों ने तकादा शुरू किया तो बात पुलिस तक भी पहुंच गई।
तफ्तीश में पूरा मामला खुलकर आने के बाद अब गैंग खामोश है। जीआरपी ने इस मामले में छह दिन पहले चार संदिग्धों को उठाया था, लेकिन दूसरे गैंग का मास्टरमाइंड अभी पकड़ से दूर है। जीआरपी उसकी तलाश कर रही है।