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Moradabad News: तकनीक ने बदली पुलिसिंग, सीसीटीवी कैमरे बने पुलिस के नए हथियार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:28 AM IST
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Technology has transformed policing, with CCTV cameras becoming the police's new weapon.
मुरादाबाद। तकनीक ने पुलिसिंग की दिशा और दशा ही बदल दी। घटनाओं के खुलासे के लिए मुखबिरी तंत्र पर निर्भर रहने वाली पुलिस ने अब सीसीटीवी कैमरों को अपना नया हथियार बना लिया है। इस हथियार के सहारे पुलिस घटनाओं का खुलासा कर रही है। यह डिजिटल मुखबिर पिछले नाै महीनों में 300 से अधिक घटनाओं के खुलासे में सूत्रधार बने। साथ ही अपराधियों को कोर्ट से सजा दिलाने में भी डिजिटल साक्ष्य के रूप में अहम भूमिका निभा रहे हैं।जिले में कहीं भी लूट, हत्या, चोरी, डकैती या अन्य घटनाएं होने पर पुलिस खुलासे करने के लिए अपने मुखबिर ही याद आती थी। उनके जरिए ही कड़ी से कड़ी जोड़कर अपराधियों को पकड़ती रहती है। बताया जा रहा है कि इन मुखबिर के लिए पहले फंड तक जारी किया जाता था लेकिन अब जमाना बदल गए हैं। बदलते तकनीक के दौर में हाईटेक पुलिसिंग भी बदल गई। पुलिस ने अपने डिजिटल मुखबिर बना लिए हैं। अब घटनाएं होने पर पुलिस उस क्षेत्र के अपने डिजिटल मुखबिर यानी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालती है और घटना के समय या उससे पहले और बाद में उस क्षेत्र के सक्रिय मोबाइल नंबरों को ट्रेस किया जाता है। इन नंबरों से संदिग्ध नंबरों को फिल्टर किया जाता है। मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी कैमरे ही पुलिस के लिए हर घटना के खुलासे में मददगार साबित हो रहे हैं।
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पुलिस के मुताबिक इस साल जनवरी से सितंबर तक 410 मामलों में स्मार्ट सिटी कार्यालय स्थित आईसीसीसी से मदद मांगी गई है। यहां से मिली जानकारी और सीसीटीवी फुटेज के जरिये 327 मामलाें के खुलासे में सफलता मिली। जबकि 83 मामलों में जांच चल रही है।
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केस-एक

सीसीटीवी कैमरों की मदद से पकड़े गए चेन लुटेरे

सिविल लाइंस क्षेत्र के नवीननगर में पांच जुलाई की सुबह 6:30 बजे अनीता कौशिक नाम की महिला से स्कूटी सवार बदमाश चेन लूटकर ले गए थे। यह घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी। कैमरों की फुटेज की मदद से पुलिस ने 60 वर्षीय बदमाश श्रवण और 62 वर्षीय करमचंद्र को गिरफ्तार किया था अगर यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद नहीं होती तो कोई विश्वास भी नहीं कर पाता कि 60 साल की उम्र पार कर चुके बदमाश चेन लूट की घटना को अंजाम दे सकते हैं।
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केस-दो

फुटेज से हुई आरोपी की पहचान, मुठभेड़ में दबोचा

नागफनी क्षेत्र में राह चलती महिला के साथ पांच अगस्त को आरोपी ने छेड़खानी कर दी थी। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। इस फुटेज की मदद से पुलिस ने आरोपी की पहचान की और उसे खोज निकाला था। आरोपी आदिल को पुलिस ने एनकाउंटर में गिरफ्तार किया था। उसके पैर में गोली लगी थी।

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केस-तीन

कैमरे की मदद से पकड़ा गया कारोबारी की मां का हत्यारोपी

मुरादाबाद। सिविल लाइंस की परंपरा कॉलोनी में केमिकल कारोबारी दयाकिशन रस्तोगी की मां प्रमोद रस्तोगी की आठ मई को हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड को उनके नौकर सचिन सक्सेना ने अंजाम दिया था। घटना के बाद वह भाग गया था। आरोपी मोबाइल इस्तेमाल नहीं कर रहा था। जिस कारण पुलिस उसे पकड़ नहीं पा रही थी। करीब एक सप्ताह तक पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो इंपीरियल तिराहे के पास लगे कैमरे में सचिन दिख गया। इसके बाद पुलिस सकी तलाश करते हुए लाइनपार तक पहुंची तो वह किराये के कमरे में रहता मिला।

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आईसीसीसी से जुड़े हैं 1800 कैमरे

मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी कार्यालय स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से शहर के 1800 कैमरे जुड़े हैं। इनमें 263 कैमरे स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लगे हैं जबकि 1500 कैमरे सेफ सिटी मिशन के तहत लगाए गए हैं। यह कैमरे भीड़भाड़ वाले इलाकों, बाजारों, चौराहे पर लगाए गए हैं। आईसीसीसी में तैनात कर्मचारी चौबीस घंटे इन कैमरों के जरिए निगरानी करते हैं। संदिग्ध गतिविधियां होने पर पुलिस को अलर्ट भेजा जाता है।





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- सीसीटीवी कैमरों से घटनाओं के खुलासे में बहुत मदद मिल रही है। इस लिए लोगों के साथ संवाद कर उन्हें बताया जा रहा है कि वह अपने अपने घर प्रतिष्ठानों और कार्यालयों में कैमरे लगवाएं। घटना होने पर सबसे पहले कैमरों की फुटेज ही खंगाली जाती है। जिससे कोई न कोई लाइन पुलिस को मिल जाती और अपराधी तक पहुंच जाती है। - कुमार रणविजय सिंह, एसपी सिटी

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थानों के कंट्रोल रूम में बैठकर रखी जा रही गली-मोहल्ले पर नजर

मुरादाबाद। एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि जिले में ऑपरेशन दृष्टि के तहत पुलिस ने करीब 21 हजार कैमरों को सीधा थानों के अपने अपने कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। इस कंट्रोल रूम में पुलिसकर्मियों की शिफ्ट के हिसाब से ड्यूटी लगाई जाती है। कंट्रोल रूम से की पुलिसकर्मी अपने-अपने क्षेत्र में नजर रख रहे हैं। यहां बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगी हैं। संदिग्ध वाहनों, अपराधियों और यातायात पर नजर रखी जाती है। कोई घटना होने पर इन कैमरों की मदद ली जाती है। इसके अलावा लोगों ने जो कैमरे अपने घरों के बाहर लगा रखे हैं। इनके पासवर्ड भी लेकर पुलिस ने अपने कंट्रोल रूम से जोड़ रखा है।

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केस की सुनवाई में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण

- अधिवक्ता अभिषेक शर्मा का कहना है कि कोर्ट में केस की सुनवाई में गवाह, साक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम में डिजिटल साक्ष्य को मुख्य बिंदू माना है। इसके लिए पुलिस भी डिजिटल साक्ष्य के तौर पर घटनास्थल की वीडियो बनाती है और उसे केस में शामिल किया जाता है। सुनवाई के दौरान गवाह, वादी मुकर भी जाएं तो डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण हो जाता है।


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लिखापढ़ी में रह गए पुलिस के मुखबिर

मुरादाबाद। पुलिस के मुखबिर लिखापढ़ी में सिमट कर रह गए हैं। पुलिस किसी आरोपी की गिरफ्तारी दिखाने में ही मुखबिर शब्द का इस्तेमाल करती है जिसमें बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज अपनी टीम के साथ गश्त कर रहे थे। इसी दौरान मिले मुखबिर ने बताया कि उस चौराहे के पास कुछ संदिग्ध लोग मौजूद हैं। वह किसी घटना को अंजाम दे सकते हैं। मुखबिर के बताए स्थान पर गए तो वहां दो व्यक्ति मिले। जिसकी तलाशी लेने में चाकू, तमंचा और नशीले पदार्थ मिला है।
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