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Moradabad News: अधिकारों की लड़ाई में फंस गया शिक्षक-कर्मचारियों का वेतन
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मुरादाबाद। केजीके कॉलेज में पिछले एक सप्ताह से प्रबंधक और प्राचार्य के बीच चल रहे अधिकारों के टकराव का खामियाजा शिक्षकों व कर्मचारियों को उठाना पड़ सकता है। बताया जाता है कि 30 अप्रैल बीतने के बावजूद उच्च शिक्षा अधिकारी को वेतन बिल नहीं भेजे जा सके। प्राचार्य का कहना है कि इसकी सूचना प्रबंधक को भेज दी है।
केजीके कॉलेज में 62 शिक्षक और 16 कर्मचारी कार्यरत हैं। प्राचार्य और प्रबंधक के संयुक्त हस्ताक्षर से इन सभी के वेतन बिल तैयार कर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के यहां भेजे जाते हैं। इसके बाद वहां से सभी का वेतन जारी किया जाता है, लेकिन अप्रैल माह के वेतन के लिए 30 तारीख तक वेतन बिल तैयार नहीं हो सके हैं। इसके पीछे 26 अप्रैल को प्रबंधक विवेक खन्ना द्वारा प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में कटौती करना है। प्रबंधक विवेक खन्ना ने प्रशासनिक फैसले लेने के अधिकार प्रो. विनोद पांडेय को दिए हैं, जबकि वित्तीय फैसले लेने के अधिकार प्रो. विनोद पांडेय और प्रो. उपदेश चौहान को संयुक्त रूप से दिए हैं। बताया जाता है कि प्रबंधक द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार संबंधित शिक्षक वेतन बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन प्राचार्य द्वारा अपने अधिकार न छोड़ने की वजह से वह हस्ताक्षर नहीं कर सके। इसकी वजह से बृहस्पतिवार को वेतन बिल तैयार नहीं किए जा सके।
वर्जन...
प्रो. विनोद पांडेय कार्यालय में वेतन बिल मांगने के लिए आए थे। कार्यालय में पूछा गया कि यदि आपको चार्ज मिल गया हो तो वेतन बिल पर हस्ताक्षर कर दीजिए। चूंकि मैंने चार्ज नहीं दिया, इसलिए वेतन बिल पर हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं। इसके संबंध में हमने प्रबंधक को सूचना दी है।
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प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य केजीके कॉलेज
अभी तक हमारे पास इस महीने के वेतन बिल नहीं आए हैं। यह वेतन बिल प्रो. विनोद पांडेय और प्रो. उपदेश चौहान के संयुक्त हस्ताक्षर से तैयार होंगे। क्योंकि मैंने इन दोनों शिक्षकों को संयुक्त रूप से वित्तीय फैसले लेने के लिए नियुक्त किया है।
विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज
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केजीके कॉलेज में 62 शिक्षक और 16 कर्मचारी कार्यरत हैं। प्राचार्य और प्रबंधक के संयुक्त हस्ताक्षर से इन सभी के वेतन बिल तैयार कर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के यहां भेजे जाते हैं। इसके बाद वहां से सभी का वेतन जारी किया जाता है, लेकिन अप्रैल माह के वेतन के लिए 30 तारीख तक वेतन बिल तैयार नहीं हो सके हैं। इसके पीछे 26 अप्रैल को प्रबंधक विवेक खन्ना द्वारा प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में कटौती करना है। प्रबंधक विवेक खन्ना ने प्रशासनिक फैसले लेने के अधिकार प्रो. विनोद पांडेय को दिए हैं, जबकि वित्तीय फैसले लेने के अधिकार प्रो. विनोद पांडेय और प्रो. उपदेश चौहान को संयुक्त रूप से दिए हैं। बताया जाता है कि प्रबंधक द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार संबंधित शिक्षक वेतन बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन प्राचार्य द्वारा अपने अधिकार न छोड़ने की वजह से वह हस्ताक्षर नहीं कर सके। इसकी वजह से बृहस्पतिवार को वेतन बिल तैयार नहीं किए जा सके।
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वर्जन...
प्रो. विनोद पांडेय कार्यालय में वेतन बिल मांगने के लिए आए थे। कार्यालय में पूछा गया कि यदि आपको चार्ज मिल गया हो तो वेतन बिल पर हस्ताक्षर कर दीजिए। चूंकि मैंने चार्ज नहीं दिया, इसलिए वेतन बिल पर हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं। इसके संबंध में हमने प्रबंधक को सूचना दी है।
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प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य केजीके कॉलेज
अभी तक हमारे पास इस महीने के वेतन बिल नहीं आए हैं। यह वेतन बिल प्रो. विनोद पांडेय और प्रो. उपदेश चौहान के संयुक्त हस्ताक्षर से तैयार होंगे। क्योंकि मैंने इन दोनों शिक्षकों को संयुक्त रूप से वित्तीय फैसले लेने के लिए नियुक्त किया है।
विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज