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मोदी जी! आपके सफाई कर्मी बना दिए ड्राइवर और कुक
अखिलेश शर्मा/ अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Wed, 15 Jun 2016 06:38 PM IST
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Swachh bharat mission
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था पर केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं गांव-गांव तैनात किए गए सफाई कर्मचारी गांवों में सफाई करने के बजाए अफसरों के घरों पर ड्यूटी कर रहे हैं। कोई सीडीओ की गाड़ी चला रहा है, तो कोई बीडीओ के घर खाना बना रहा है।
डीएम के आवास पर भी कई कर्मचारी अटैच हैं। इस तरह गांवों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा पंचायती राज विभाग के माध्यम से ग्रामीण स्वच्छता मिशन चलाया जा रहा है।
गांव-गांव शौचालय बनाए जा रहे हैं। गांवों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए सफाई कर्मचारियों की भर्ती की गई है। लेकिन जिले की 588 ग्राम पंचायतों से जुड़े 1256 गांवों में 1256 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इन सफाई कर्मचारियों में अधिकांश गांवों में सफाई व्यवस्था करने के बजाए, किसी न किसी अधिकारी के यहां अटैच कर दिए गए हैं।
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जैसे एक सफाई कर्मचारी को मुख्य विकास अधिकारी की गाड़ी चलाने पर लगा दिया गया है, तो एक सफाई कर्मचारी एक खंड विकास अधिकारी के घर में खाना बनाता है। कोई कंप्यूटर आपरेटर का काम कर रहा है, तो कोई कमिश्नर के बंगले पर आगंतुक को चाय-पानी कराता है।
जिलाधिकारी के आवास और कार्यालय से भी कर्मचारियों को अटैच किया गया है। कुछ खंड विकास अधिकारी सफाई कर्मी को अपने ड्राइवर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह से गांवों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है।
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डीएम के आवास पर भी कई कर्मचारी अटैच हैं। इस तरह गांवों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा पंचायती राज विभाग के माध्यम से ग्रामीण स्वच्छता मिशन चलाया जा रहा है।
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गांव-गांव शौचालय बनाए जा रहे हैं। गांवों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए सफाई कर्मचारियों की भर्ती की गई है। लेकिन जिले की 588 ग्राम पंचायतों से जुड़े 1256 गांवों में 1256 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इन सफाई कर्मचारियों में अधिकांश गांवों में सफाई व्यवस्था करने के बजाए, किसी न किसी अधिकारी के यहां अटैच कर दिए गए हैं।
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जैसे एक सफाई कर्मचारी को मुख्य विकास अधिकारी की गाड़ी चलाने पर लगा दिया गया है, तो एक सफाई कर्मचारी एक खंड विकास अधिकारी के घर में खाना बनाता है। कोई कंप्यूटर आपरेटर का काम कर रहा है, तो कोई कमिश्नर के बंगले पर आगंतुक को चाय-पानी कराता है।
जिलाधिकारी के आवास और कार्यालय से भी कर्मचारियों को अटैच किया गया है। कुछ खंड विकास अधिकारी सफाई कर्मी को अपने ड्राइवर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इस तरह से गांवों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है।