सेना ने दिखाया दम.. कुछ हद तक भर गए उड़ी के जख्म
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सोशल मीडिया पर बधाइयों और प्रधानमंत्री मोदी व आर्मी को सेल्यूट करने का सिलसिला शुरू हो गया। एलओसी के उस पार भारतीय सेना के पराक्रम से उत्साहित युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जश्न मनाया तो बुजुर्ग टेलीविजनों से चिपके सर्जिकल स्ट्राइक का पूरा ब्यौरा जानने को उत्सुक दिखे।
राजनीतिक दलों ने भी दलगत भावना से ऊपर उठकर सेना की इस कार्रवाई पर खुशी व्यक्त की। दोपहर एनाउंस होने के बाद से देर रात तक शहर में जगह - जगह मिठाइयां बांटने और पटाखे छुड़ाकर खुशियां मनाने का सिलसिला जारी था। सोशल मीडिया पर ‘56 इंच का सीना’ स्टेटस की बाढ़ लगी है। सेना की कार्रवाई की तुलना अमेरिकी शील कमांडो द्वारा एबटाबाद में लादेन को मार गिराने वाले ऑपरेशन से की जा रही है।
भारत की सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक कर देश का मान बढ़ाया है। इसके साथ ही उन्हें सबक भी सिखा दिया कि अब भारत के साथ जैसा करोगो वैसा भरना पड़ेगा। लेकिन अभी ये वक्त सावधानी का है। बौखलाहट में पाकिस्तान कोई भी कदम उठा सकता है। भारत के इस बदले ने मुझे एक नया उत्साह दिया है।
- नारायण कृष्ण, 1962, 65 और 1971 के युद्ध में शामिल रहे पूर्व सैनिक
पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक जरूरी थी। अगर हम शांत होकर बैठ जाएंगे तो पाकिस्तान की हरकतें बढ़ती जाएंगे। आतंकी बॉर्डर के नजदीक आकर अपने कैंप लगा रहे हैं। इस कार्रवाई से कम से कम वह बॉर्डर पर आने की जरूरत तो नहीं करेंगे। सर्जिकल स्ट्राइक के लिए भारतीय सेना को बधाई। पाकिस्तान को हर मोर्चे पर भारत ने जबाव दिया है।
-डा. राजीव श्रीवास्तव, पूर्व चिकित्सक आर्मी अस्पताल, पठान कोर्ट