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मिलों से नहीं हो रहा भुगतान, घर के जरूरी खर्चे भी नहीं चला पा रहे किसान
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मुरादाबाद। गन्ना बेल्ट जिलोंके अधिकांश गन्ना किसान परिवारों की आर्थिक जरूरतें गन्ने की फसल बेचकर ही पूरी होती हैं। मिल को गन्ना बेचकर वे घर के खर्चों का बजट बनाते हैं। बच्चों की फीस, धान की बुआई के लिए खाद, बीज का इंतजाम, विवाह आदि घर के अधिकांश बड़े खर्चे फसल के भुगतान से पूरे होते हैं। लेकिन मिलों से समय से भुगतान न होने से उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। पेराई सत्र खत्म होने के बाद भी जिले की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के 256 करोड़ रुपये बाकी हैं। किसान परेशान हैं और अधिकारी मिलों को चेतावनी देने के दावे कर रहे हैं।
14 दिन में भुगतान के नियम का नहीं हो रहा पालन
नियमानुसार मिलों को किसानों से खरीदे गए गन्ने का 14 दिन में भुगतान करने का प्रावधान हैं। किन्तु जिले की कोई भी मिल इस नियम का पालन नहीं कर रही है। गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बेलवाड़ा चीनी मिल का पिछले साल पेराई सत्र 29 अक्तूबर 2020 को शुरू होकर इस साल नौ अप्रैल तक चला। लेकिन मिल ने किसानों को केवल 28 फरवरी तक की खरीद का ही भुगतान किसानों को भेजा है।
एक मार्च से चार अप्रैल तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान बाकी है। इसी तरह बिलारी मिल 30 अक्तूबर 2020 को चलकर 11 अप्रैल को बंद हुई, लेकिन मिल ने केवल 17 फरवरी तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किया है। करीब पौने दो महीने का भुगतान मिल पर बकाया है।
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अगवानपुर मिल का सत्र आठ नवंबर से एक मई तक चला, लेकिन मिल ने सिर्फ नौ फरवरी तक का ही गन्ना भुगतान किसानों को दिया है। मिल पर करीब पौने तीन महीने का भुगतान बकाया है। रानीनांगल मिल की स्थिति हालांकि कुछ बेहतर है। यह मिल 31 अक्तूबर को शुरू होकर 12 मई तक चली और 30 अप्रैल तक का भुगतान कर दिया है।
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14 दिन में भुगतान के नियम का नहीं हो रहा पालन
नियमानुसार मिलों को किसानों से खरीदे गए गन्ने का 14 दिन में भुगतान करने का प्रावधान हैं। किन्तु जिले की कोई भी मिल इस नियम का पालन नहीं कर रही है। गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बेलवाड़ा चीनी मिल का पिछले साल पेराई सत्र 29 अक्तूबर 2020 को शुरू होकर इस साल नौ अप्रैल तक चला। लेकिन मिल ने किसानों को केवल 28 फरवरी तक की खरीद का ही भुगतान किसानों को भेजा है।
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एक मार्च से चार अप्रैल तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान बाकी है। इसी तरह बिलारी मिल 30 अक्तूबर 2020 को चलकर 11 अप्रैल को बंद हुई, लेकिन मिल ने केवल 17 फरवरी तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किया है। करीब पौने दो महीने का भुगतान मिल पर बकाया है।
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अगवानपुर मिल का सत्र आठ नवंबर से एक मई तक चला, लेकिन मिल ने सिर्फ नौ फरवरी तक का ही गन्ना भुगतान किसानों को दिया है। मिल पर करीब पौने तीन महीने का भुगतान बकाया है। रानीनांगल मिल की स्थिति हालांकि कुछ बेहतर है। यह मिल 31 अक्तूबर को शुरू होकर 12 मई तक चली और 30 अप्रैल तक का भुगतान कर दिया है।