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Moradabad News: सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित होगा सूफी अंबा प्रसाद का छापाखाना
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मुरादाबाद। महान स्वतंत्रता सेनानी सूफी अंबा प्रसाद का छापाखाना अब सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही सूफी अंबा प्रसाद की भव्य प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। यह आश्वासन मंगलवार को नगर निगम के उपसभापति व अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के जिलाध्यक्ष डॉ. गौरव श्रीवास्तव को मिला है।
उन्होंने नगर आयुक्त से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। इस दौरान नगर आयुक्त ने उन्हें इसका आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि हाॅकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा भी जल्द ही स्थापित की जाएगी। इसके लिए स्थान को तलाशा जा रहा है।
जीआईसी चौक पर सूफी अंबा प्रसाद और मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा को लेकर विवाद चल रहा है। नगर निगम के उपसभापति नगर आयुक्त से इस मुद्दे पर वार्ता करने पहुंचे थे। नगर आयुक्त ने उन्हें जानकारी दी कि सूफी अंबा प्रसाद के छापाखाना को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा, इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसे निगम की बोर्ड बैठक में पारित करने के बाद शासन को भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसका कार्य शुरू कराया जाएगा।
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दूसरी ओर जिला हॉकी संघ के सचिव इकबाल खान ने मंडलायुक्त और नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जीआईसी चौक पर मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा स्थापित कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि 2003 में तत्कालीन मेयर वीना अग्रवाल ने सूफी अंबा प्रसाद मार्ग का उद्घाटन किया था। उन्होंने ही इस चौराहे को जीआईसी चौक घोषित किया था क्योंकि जीआईसी के तत्कालीन प्रधानाचार्य सुरेंद्र सक्सेना ने चौराहे के चौड़ीकरण के लिए जमीन दी थी।
जीआईसी चौक पर मेयर वीना अग्रवाल ने ही हॉकी की प्रतिमा लगवाई थी। इकबाल खान ने कहा कि जीआईसी के कंक्रीट मैदान से हॉकी के नामचीन खिलाड़ी निकल चुके हैं। महापौर विनोद अग्रवाल ने पूर्व में मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा स्थापित कराने की बात खुद कही थी। हालांकि, अब उन्होंने ही प्रतिमा को लगने से ही रोक दिया। इससे खेल प्रेमी व खिलाड़ी बहुत निराश हैं। उन्होंने कहा कि वहां हाॅकी के साथ ही मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा भी स्थापित की जाए।
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हमारे स्कूल के नाम पर ही चौराहा : प्रधानाचार्य जीआईसी
जीआईसी स्कूल के प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल ने अगर चौराहे के लिए जमीन दी है तो चौराहे का नाम भी स्कूल के नाम पर रहना चाहिए। इस चौक का नाम परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानाचार्य सुरेंद्र सक्सेना ने खुद चौराहे के चौड़ीकरण के लिए तत्कालीन महापौर से भेंट की थी। इसके बदले में उन्होंने चौराहे का नाम स्कूल के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव दिया था। इसी के बाद जब चौराहे का सौंदर्यीकरण हुआ और उसे चौड़ा किया गया तो उसका नाम जीआईसी चौक रखा गया था।
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उन्होंने नगर आयुक्त से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। इस दौरान नगर आयुक्त ने उन्हें इसका आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि हाॅकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा भी जल्द ही स्थापित की जाएगी। इसके लिए स्थान को तलाशा जा रहा है।
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जीआईसी चौक पर सूफी अंबा प्रसाद और मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा को लेकर विवाद चल रहा है। नगर निगम के उपसभापति नगर आयुक्त से इस मुद्दे पर वार्ता करने पहुंचे थे। नगर आयुक्त ने उन्हें जानकारी दी कि सूफी अंबा प्रसाद के छापाखाना को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा, इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसे निगम की बोर्ड बैठक में पारित करने के बाद शासन को भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसका कार्य शुरू कराया जाएगा।
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दूसरी ओर जिला हॉकी संघ के सचिव इकबाल खान ने मंडलायुक्त और नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जीआईसी चौक पर मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा स्थापित कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि 2003 में तत्कालीन मेयर वीना अग्रवाल ने सूफी अंबा प्रसाद मार्ग का उद्घाटन किया था। उन्होंने ही इस चौराहे को जीआईसी चौक घोषित किया था क्योंकि जीआईसी के तत्कालीन प्रधानाचार्य सुरेंद्र सक्सेना ने चौराहे के चौड़ीकरण के लिए जमीन दी थी।
जीआईसी चौक पर मेयर वीना अग्रवाल ने ही हॉकी की प्रतिमा लगवाई थी। इकबाल खान ने कहा कि जीआईसी के कंक्रीट मैदान से हॉकी के नामचीन खिलाड़ी निकल चुके हैं। महापौर विनोद अग्रवाल ने पूर्व में मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा स्थापित कराने की बात खुद कही थी। हालांकि, अब उन्होंने ही प्रतिमा को लगने से ही रोक दिया। इससे खेल प्रेमी व खिलाड़ी बहुत निराश हैं। उन्होंने कहा कि वहां हाॅकी के साथ ही मेजर ध्यानचंद की प्रतिमा भी स्थापित की जाए।
हमारे स्कूल के नाम पर ही चौराहा : प्रधानाचार्य जीआईसी
जीआईसी स्कूल के प्रधानाचार्य वीरेंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल ने अगर चौराहे के लिए जमीन दी है तो चौराहे का नाम भी स्कूल के नाम पर रहना चाहिए। इस चौक का नाम परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानाचार्य सुरेंद्र सक्सेना ने खुद चौराहे के चौड़ीकरण के लिए तत्कालीन महापौर से भेंट की थी। इसके बदले में उन्होंने चौराहे का नाम स्कूल के नाम पर रखे जाने का प्रस्ताव दिया था। इसी के बाद जब चौराहे का सौंदर्यीकरण हुआ और उसे चौड़ा किया गया तो उसका नाम जीआईसी चौक रखा गया था।