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रैंक प्रभावित होने के डर के बजाय भविष्य का आधार मजबूत करें विद्यार्थी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 12:39 AM IST
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Students should strengthen the basis of future instead of fear of getting affected.
मुरादाबाद। सीबीएसई की टर्म-वन में बहुविकल्पीय आधार पर छह माह में बोर्ड परीक्षा और ओएमआर शीट पर उत्तर देने से मेधावी विद्यार्थियों को अपनी रैंक प्रभावित होने का डर सता रहा है। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा शुरू होने के एक सप्ताह पहले से उनके पास आने वाले केसों की संख्या दोगुनी हो गई है। विद्यार्थियों को रैंक के डर के बजाय इस परीक्षा को भविष्य का मजबूत आधार मानना चाहिए। क्योंकि ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन बहुविकल्पीय प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।
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सीबीएसई की 30 नवंबर से हाईस्कूल और एक दिसंबर से इंटरमीडिएट की परीक्षाओं की शुरुआत हो गई है। यह परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में आयोजित की जा रही है। मुरादाबाद जनपद में 30 केंद्रों पर हो रही परीक्षा में हाईस्कूल में 4626 विद्यार्थी और इंटरमीडिएट में 3523 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। कोरोना महामारी से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टर्म-1 और टर्म-2 में परीक्षाएं होंगी। ओएमआर पैटर्न पर हो रही परीक्षा का समय 90 मिनट दिया गया है।
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मंडलीय मनोवैज्ञानिक अधिकारी डॉ. कुमार मंगलम सारस्वत ने बताया कि प्रतिदिन परीक्षा से संबंधित औसतन 20 विद्यार्थियों की कॉल आ रही हैं। पहले यह संख्या पांच से दस के बीच में रहती थीं। टॉपर्स को अपनी रैंक खराब होने का डर है। पारंपरिक परीक्षा में लेखन, कौशल, हैंड राइटिंग, विजन का मूल्यांकन किया जाता था। वहीं, ओएमआर शीट में गोला लगाने से उसका महत्व समाप्त हो गया है। परीक्षा में उत्तर की स्टैप मार्किंग न होने से उत्तर गलत होने पर शून्य अंक मिलने का डर विद्यार्थियों को सता रहा है। विद्यार्थी विज्ञान की परीक्षा में डायग्राम नहीं बना पाए हैं, लेकिन उन्हें घबराना नहीं हैं। क्योंकि डायग्राम आदि बनाने के लिए टर्म-2 में सब्जेक्टिव परीक्षा होगी। बाद में उसी के हिसाब से तैयारी विद्यार्थियों को कर लेनी चाहिए। छह माह में परीक्षा होने से प्रदर्शन प्रभावित होने का भय भी है।
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यह हो रही हैं समस्याएं...
- भूख न लगना, घबराहट, चिड़चिड़ापन
- साइको फिजियोलॉजिकल डिसऑर्डर की समस्या
- एकाग्रता की हो रही परेशानी
यह करें विद्यार्थी...
- तनाव को खुद पर हावी न होने दें।
- स्टडी की तकनीक बदलें।
- नई परीक्षा प्रक्रिया के अनुरूप तैयारी करें।
- किसी भी प्रकार के नकारात्मक भावों से दूर रहें।
- समय प्रबंधन व तनाव प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें।
- ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षा ओएमआर शीट पर होती है, इसलिए इस परीक्षा को भविष्य की तैयारी समझकर चलें।
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