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ट्रेन की चपेट में आकर छात्रा की मौत
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अगवानपुर। लोधीपुर-विशनपुर रेलवे फाटक के पास स्कूल से लौटते वक्त राधा (08) की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। जबकि उसकी चचेरी बहन चांदनी और सहेली गुड़िया हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचीं। छात्राएं ट्रेन गुजरने के दौरान रेलवे लाइन के पास ही खड़ी थीं। एक ट्रेन गुजरते ही छात्रा ने ट्रैक पार करने के लिए दौड़ लगा दी, इस बीच दूसरी ट्रेन आ गई और हादसा हो गया। पुलिस ने परिजनों की सहमति के बाद शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया।
सिविल लाइंस थाने के गांव विशनपुर निवासी राजवीर मजदूर हैं। परिवार में पत्नी राकेश व बेटी राधा के अलावा तीन बच्चे शिवानी, मीनाक्षी, और सबसे छोटा बेटा अमित है। तीसरे नंबर की बेटी राधा लोधीपुर स्थित चिरंजीलाल इंटर कॉलेज में कक्षा दो की छात्रा थी। स्कूल रेलवे फाटक पार कर दूसरी ओर है। सोमवार को वह छुट्टी के बाद अपनी चचेरी बहन चांदनी और सहेली गुड़िया के साथ स्कूल से घर लौट रही थी। करीब डेढ़ बजे रेलवे फाटक बंद था। इंटर में पढ़ने वाली चांदनी ने राधा और गुड़िया का हाथ पकड़ रखा था, बच्चे बूम पार कर रेलवे लाइन से पीछे ही रुक गए। इस बीच मुरादाबाद से दिल्ली की और जाने वाली एक ट्रेन वहां से गुजरी। इसके बाद राधा ने सोचा कि अब रास्ता साफ हो गया है। वह चांदनी से हाथ छुड़ाकर भागी और दिल्ली की तरफ आ रही तेज रफ्तार ट्रेन ने उसकी जिंदगी लील ली। बच्ची का बैग उस ट्रेन की एंगल में फंस गया और ट्रेन ने बच्ची को दूर फेंक दिया। सिर पत्थर से टकराने के कारण उसकी मौके पर मौत हो गई। बच्चों के चीखने की आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे मृतका के चाचा खेम सिंह दौड़े। उन्होंने बच्ची को उठा लिया और परिवार के लोगों को बुलाया। परिजनों ने पुलिस से कोई भी कार्रवाई करने से इंकार कर दिया। पुलिस समझौता लिखवाकर लौट गई।
ट्रैक पार करते समय क्या करें, क्या न करें
-बंद फाटक को पार न करें
-अगर फाटक नहीं है तो लाइन से दूर होकर ट्रेन के निकलने का इंतजार करें
-कानों में ईयरफोन लगाकर ट्रैक न पार करें
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सिविल लाइंस थाने के गांव विशनपुर निवासी राजवीर मजदूर हैं। परिवार में पत्नी राकेश व बेटी राधा के अलावा तीन बच्चे शिवानी, मीनाक्षी, और सबसे छोटा बेटा अमित है। तीसरे नंबर की बेटी राधा लोधीपुर स्थित चिरंजीलाल इंटर कॉलेज में कक्षा दो की छात्रा थी। स्कूल रेलवे फाटक पार कर दूसरी ओर है। सोमवार को वह छुट्टी के बाद अपनी चचेरी बहन चांदनी और सहेली गुड़िया के साथ स्कूल से घर लौट रही थी। करीब डेढ़ बजे रेलवे फाटक बंद था। इंटर में पढ़ने वाली चांदनी ने राधा और गुड़िया का हाथ पकड़ रखा था, बच्चे बूम पार कर रेलवे लाइन से पीछे ही रुक गए। इस बीच मुरादाबाद से दिल्ली की और जाने वाली एक ट्रेन वहां से गुजरी। इसके बाद राधा ने सोचा कि अब रास्ता साफ हो गया है। वह चांदनी से हाथ छुड़ाकर भागी और दिल्ली की तरफ आ रही तेज रफ्तार ट्रेन ने उसकी जिंदगी लील ली। बच्ची का बैग उस ट्रेन की एंगल में फंस गया और ट्रेन ने बच्ची को दूर फेंक दिया। सिर पत्थर से टकराने के कारण उसकी मौके पर मौत हो गई। बच्चों के चीखने की आवाज सुनकर खेत में काम कर रहे मृतका के चाचा खेम सिंह दौड़े। उन्होंने बच्ची को उठा लिया और परिवार के लोगों को बुलाया। परिजनों ने पुलिस से कोई भी कार्रवाई करने से इंकार कर दिया। पुलिस समझौता लिखवाकर लौट गई।
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ट्रैक पार करते समय क्या करें, क्या न करें
-बंद फाटक को पार न करें
-अगर फाटक नहीं है तो लाइन से दूर होकर ट्रेन के निकलने का इंतजार करें
-कानों में ईयरफोन लगाकर ट्रैक न पार करें