नेशनल जियोग्राफी चैनल पर दिखेंगे संभल के शिवेंद्र गौड़ के कैमरे में कैद बाघ
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जंगल का नाम सुनते ही आंखों के सामने घने जंगल और जानवरों की तस्वीरें दौड़ने लगती हैं। अगर कोई जंगली जानवर सामने आ जाए तो लोग सहम जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके लिए जंगल ही उनका घर होता है और जंगली जानवरों को देखकर उन्हें सुकून मिलता है।
इसका ही एक उदाहरण हैं शिवेंद्र गौड़। संभल जिले के गवां कस्बा के निवासी शिवेंद्र गौड़ यूं तो पिछले दस वर्षों से जंगल में रहकर विभिन्न प्रोजेक्टों पर काम रहे हैं। उनके पिता विशेष कुमार गौड़ हरिबाबा इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। शिवेंद्र गौड़ पिछले दो साल से नेशनल जियोग्राफी चैनल के साथ काउंटिंग टाइगर्स प्रोजेक्ट पर काम रहे थे।
वह इस टीम में उत्तर प्रदेश से एकमात्र सदस्य हैं। शिवेंद्र गौड़ इस प्रोजेक्ट में कैमरा मैन हैं। उन्होंने शूटिंग की है। मध्यप्रदेश के बांधवगण नेशनल रिजर्व पार्क, उत्तराखंड के जिम कार्बेट पार्क, आसाम के कांजीरंगा नेशनल पार्क में बाघों की गिनती उनके कैमरों ने की है। उन्हें फिल्माया भी है।
शिवेंद्र गौड़ ने कहा कि जंगली जानवरों को करीब से देखा और उनके जीवन को समझा, लेकिन यह सफर आसान नहीं रहा। फिल्म के डायरेक्टर लंदन की उपमा भटनागर और प्रोड्यूसर मनोज भटनागर के साथ-साथ टीम में शामिल, मुंबई के सुजीत चौरसिया और यादवेंद्र सिंह के साथ उन्होंने इस फिल्म में वीडियोग्राफी की है।
भारत में दुनिया के 70 फीसदी बाघ
शिवेंद्र गौड़ ने कहा कि दुनिया के 70 प्रतिशत बाघ भारत में हैं। वर्ष 2010 में भारत में बाघों की संख्या 1411 थी, जो अब 2019 में बढ़कर 2967 हो गई है। इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'काउंटिंग टाइगर्स' को बनाने के लिए हमारी टीम ने दो साल तक भारत के अलग-अलग टाइगर रिजर्व में फिल्मांकन किया। नई टेक्नोलॉजी पर आधारित वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए एप से बाघों की संख्या की गणना और उन्हें संरक्षित करने के प्रयास इसमें दिखाए गए हैं।