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सुनो मेयर! दायरे में रहो..सारा बजट रोक दूंगा
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sat, 15 Oct 2016 02:07 AM IST
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mayor moradabad
- फोटो : अमर उजाला
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अमृत योजना के टेंडर को लेकर मेयर और लखनऊ में बैठे एक आला अफसर के दरम्यान फोन पर हॉट टॉक की बात सामने आई है। बातचीत के दौरान एलएंडटी कंपनी को टेंडर देेने पर अड़े अफसर ने इसमें अड़ंगा लगाने पर मेयर को चेताया कि यदि मनचाहा प्रस्ताव नहीं भेजा तो नगर निगम का पूरा बजट रोक देंगे।
मेयर ने मुद्दा केंद्र तक ले जाने की धमकी दी तो अफसर ने सरकार की मंशा समझाई। बहरहाल हुआ वही जो अफसर ने चाहा था। दबाव में आए मेयर ने प्रस्ताव शासन को भेज दिया है कि नगर निगम अमृत योजना का काम करने में सक्षम नहीं है।
अमृत योजना के तहत केंद्र सरकार ने नगर निगम को करीब 90 करोड़ रुपये का बजट दिया है। इस रकम से पूरे शहर में सीवर कनेक्शन किए जाने हैं। इसके अलावा शहर में कई पार्क बनाने और पुराने पार्कों के जीर्णोद्धार का काम भी इस योजना से प्रस्तावित है।
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केंद्र सरकार ने योजना में छूट दी है कि स्थानीय निकायों को छूट है कि वह खुद इस काम को करा सकती हैं। यदि वह सक्षम न हों तो प्रदेश सरकार किसी एजेंसी से इस योजना का काम करा सकती है। प्रदेश के सभी नगर निगमों ने यह प्रस्ताव पास करके भेज दिया है कि वह अमृत योजना का काम कराने में सक्षम नहीं हैं।
लिहाजा प्रदेश सरकार ही अपनी किसी एजेंसी से इसे करा ले। लेकिन मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल ने ऐसा प्रस्ताव भेजने से मना कर दिया था। बात शासन में उठी तो मेयर पर दबाव बनाने के लिए लखनऊ में बैठे एक आला अफसर ने फोन किया।
सूत्रों का कहना है कि अफसर ने मेयर को समझाया कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रस्ताव भेज दें। मेयर अड़े रहे तो अफसर ने मेयर को वार्निंग दे डाली कि यदि मनचाहा प्रस्ताव नहीं भेजा तो निगम का पूरा बजट रोक देंगे।
हालांकि बाद में मेयर ने केंद्र सरकार तक मामला ले जाने की धमकी दी तो आला अफसर के तेवर कुछ ढीले हुए। अलबत्ता बाद में मेयर ने शासन की मंशा के मुताबिक ही प्रस्ताव भेज दिया है। जिसमें कहा है कि अमृत योजना का काम कराने में निगम सक्षम नहीं है।
उधर लखनऊ में बैठे इस आला अफसर का कहना है कि मुरादाबाद के मेयर कोरा झूठ बोल रहे हैं। उनसे इस मुद्दे पर कोई बातचीत हुई नहीं है। इसलिए वह अगर किसी संस्था को ठेका देने के मामले में मेरा नाम लेंगे तो मैं भी मानहानि का दावा करूंगा। जिस काम से मेरा कोई लेना-देना ही नहीं है तो मैं क्यों दबाव बनाऊंगा?
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मेयर ने मुद्दा केंद्र तक ले जाने की धमकी दी तो अफसर ने सरकार की मंशा समझाई। बहरहाल हुआ वही जो अफसर ने चाहा था। दबाव में आए मेयर ने प्रस्ताव शासन को भेज दिया है कि नगर निगम अमृत योजना का काम करने में सक्षम नहीं है।
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अमृत योजना के तहत केंद्र सरकार ने नगर निगम को करीब 90 करोड़ रुपये का बजट दिया है। इस रकम से पूरे शहर में सीवर कनेक्शन किए जाने हैं। इसके अलावा शहर में कई पार्क बनाने और पुराने पार्कों के जीर्णोद्धार का काम भी इस योजना से प्रस्तावित है।
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केंद्र सरकार ने योजना में छूट दी है कि स्थानीय निकायों को छूट है कि वह खुद इस काम को करा सकती हैं। यदि वह सक्षम न हों तो प्रदेश सरकार किसी एजेंसी से इस योजना का काम करा सकती है। प्रदेश के सभी नगर निगमों ने यह प्रस्ताव पास करके भेज दिया है कि वह अमृत योजना का काम कराने में सक्षम नहीं हैं।
लिहाजा प्रदेश सरकार ही अपनी किसी एजेंसी से इसे करा ले। लेकिन मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल ने ऐसा प्रस्ताव भेजने से मना कर दिया था। बात शासन में उठी तो मेयर पर दबाव बनाने के लिए लखनऊ में बैठे एक आला अफसर ने फोन किया।
सूत्रों का कहना है कि अफसर ने मेयर को समझाया कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रस्ताव भेज दें। मेयर अड़े रहे तो अफसर ने मेयर को वार्निंग दे डाली कि यदि मनचाहा प्रस्ताव नहीं भेजा तो निगम का पूरा बजट रोक देंगे।
हालांकि बाद में मेयर ने केंद्र सरकार तक मामला ले जाने की धमकी दी तो आला अफसर के तेवर कुछ ढीले हुए। अलबत्ता बाद में मेयर ने शासन की मंशा के मुताबिक ही प्रस्ताव भेज दिया है। जिसमें कहा है कि अमृत योजना का काम कराने में निगम सक्षम नहीं है।
उधर लखनऊ में बैठे इस आला अफसर का कहना है कि मुरादाबाद के मेयर कोरा झूठ बोल रहे हैं। उनसे इस मुद्दे पर कोई बातचीत हुई नहीं है। इसलिए वह अगर किसी संस्था को ठेका देने के मामले में मेरा नाम लेंगे तो मैं भी मानहानि का दावा करूंगा। जिस काम से मेरा कोई लेना-देना ही नहीं है तो मैं क्यों दबाव बनाऊंगा?