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मां की हत्या में बेटे को दस साल की कैद
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मुरादाबाद। कुंदरकी थानाक्षेत्र के हरियाना गांव में रात में खाना बनाकर न देने पर मां की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नौ एमपी सिंह अदालत ने मुलजिम बेटे को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को दस साल की कैद और बीस हजार रुपये के अर्थदंड लगाने का फैसला सुनाया।
एडीजीसी अनिल कुमार चौहान ने बताया कि कुंदरकी थाने में एक दिसंबर 2018 को हरियाना गांव निवासी बदलू सिंह ने महीपाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जिसमें बताया गया कि महीपाल ने रात में काफी देर में शराब के नशे में घर पहुंचा। उसने मां बूढ़ी मां बुधिया देवी से खाना बनाने को कहा। मां ने खाना नहीं बनाया तो आरोपी बेटा आपा खो बैठा और उसने मां के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोपी ने मां को धक्का दिया। जिससे महिला का सिर हैंडपंप से टकरा गया। महिला लहूलुहान हो गई। इसके बाद आरोपी ने घायल अवस्था में मां को पड़ोसी के घर के सामने छोड़ दिया था। सुबह आस पड़ोस के लोगों ने बुधिया को घायल अवस्था में देखा तो 108 एंबुलेंस से कुंदरकी अस्पताल भिजवाया। जहां डाक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कुंदरकी पुलिस ने केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद बेटे महीपाल के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई एडीजे नौ एमपी सिंह की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी अनिल कुमार चौहान ने पक्ष रख और मुलजिम को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों की गवाही के बाद मुलजिम महीपाल को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि बीस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतने होगी।
बेटे ने पड़ोसी को फंसाने के लिए रची थी साजिश
पुलिस ने चार्जशीट में जिक्र किया था कि महीपाल देर रात शराब के नशे में घर पहुंचा था। उसने मां से खाना बनाने को कहा था, लेकिन मां ने खाना बनाने से इंकार कर दिया था। इसी से नाराज होकर महिपाल ने मां को पीटना शुरू कर दिया और उसे धक्का मारकर हैंडपंप पर गिरा दिया था। जिसमें महिला घायल हो गई थी। इसके बाद आरोपी ने पड़ोसी को फंसाने के लिए मां को घायल अवस्था में पड़ोसी के मां के सामने छोड़ दिया था।
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आठ माह में ही मिल गई सजा
मुरादाबाद। बुधिया अपने मझले बेटे महीपाल के साथ रहती थी। उसके दो बेटे बाहर रहते थे। इस मामले में बदलू सिंह ने केस दर्ज कराया था। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। केस की सुनवाई एडीजे नौ में चली। मात्र आठ माह में ही केस में फैसला गया।
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एडीजीसी अनिल कुमार चौहान ने बताया कि कुंदरकी थाने में एक दिसंबर 2018 को हरियाना गांव निवासी बदलू सिंह ने महीपाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जिसमें बताया गया कि महीपाल ने रात में काफी देर में शराब के नशे में घर पहुंचा। उसने मां बूढ़ी मां बुधिया देवी से खाना बनाने को कहा। मां ने खाना नहीं बनाया तो आरोपी बेटा आपा खो बैठा और उसने मां के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोपी ने मां को धक्का दिया। जिससे महिला का सिर हैंडपंप से टकरा गया। महिला लहूलुहान हो गई। इसके बाद आरोपी ने घायल अवस्था में मां को पड़ोसी के घर के सामने छोड़ दिया था। सुबह आस पड़ोस के लोगों ने बुधिया को घायल अवस्था में देखा तो 108 एंबुलेंस से कुंदरकी अस्पताल भिजवाया। जहां डाक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कुंदरकी पुलिस ने केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद बेटे महीपाल के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई एडीजे नौ एमपी सिंह की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी अनिल कुमार चौहान ने पक्ष रख और मुलजिम को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों की गवाही के बाद मुलजिम महीपाल को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए दस साल की कैद की सजा सुनाई है। जबकि बीस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतने होगी।
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बेटे ने पड़ोसी को फंसाने के लिए रची थी साजिश
पुलिस ने चार्जशीट में जिक्र किया था कि महीपाल देर रात शराब के नशे में घर पहुंचा था। उसने मां से खाना बनाने को कहा था, लेकिन मां ने खाना बनाने से इंकार कर दिया था। इसी से नाराज होकर महिपाल ने मां को पीटना शुरू कर दिया और उसे धक्का मारकर हैंडपंप पर गिरा दिया था। जिसमें महिला घायल हो गई थी। इसके बाद आरोपी ने पड़ोसी को फंसाने के लिए मां को घायल अवस्था में पड़ोसी के मां के सामने छोड़ दिया था।
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आठ माह में ही मिल गई सजा
मुरादाबाद। बुधिया अपने मझले बेटे महीपाल के साथ रहती थी। उसके दो बेटे बाहर रहते थे। इस मामले में बदलू सिंह ने केस दर्ज कराया था। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। केस की सुनवाई एडीजे नौ में चली। मात्र आठ माह में ही केस में फैसला गया।