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जेल में शबनम से मिलने पहुंचा बेटा
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रामपुर। सात परिजनों की हत्या में फांसी की सजा पाने वाली अमरोहा के बावनखेड़ी गांव की शबनम रविवार को जेल में बेटे से सामना होने पर फूट पड़ी। बेटे को गले लगाकर आंसू बहाए तो अच्छा खाने-अच्छा पढ़ने की नसीहत भी दी। अभिभावक की भूमिका निभा रहे उस्मान से कहा, बेटे को मेरी परछाई से दूर रखो, इसके साथ मेरा नाम न जुड़े तो ही अच्छा है। मां-बेटे के बीच यह मुलाकात लगभग एक घंटे तक चली।
बुलंदशहर निवासी उस्मान सैफी के साथ शबनम का 12 वर्षीय बेटा दोपहर लगभग 12:10 बजे जिला कारागार में दाखिल हुआ। उस्मान की पत्नी भी साथ थीं। दोपहर करीब 1:15 बजे तीनों जेल से बाहर आए। उस्मान ने बताया कि देखते ही शबनम ने बेटे को गले लगा लिया और कुछ देर फूट-फूटकर रोती रही। अपने बेटे को मन लगाकर पढ़ाई करने और अच्छा इंसान बनने की नसीहत भी दी।
जेल से बाहर आया तो शबनम के बेटे की आंखों में भी आंसू थे। वह अपनी मां के साथ हुई मुलाकात के बारे में कुछ बोलने से बच रहा था। मीडिया के पूछने पर कहा कि उसने राष्ट्रपति से अपनी मां की सजा माफ करने की गुहार लगाई है। बोला, प्रेसिडेंट अंकल से कहा है कि मेरी मम्मा की सजा माफ कर दी जाए। मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति एक बच्चे की गुहार जरूर सुनेंगे, मां की सजा माफ कर देंगे।
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उस्मान का दावा, शबनम ने कहा मैंने गुनाह नहीं किया
रामपुर। शबनम के बेटे की परवरिश कर रहे उस्मान ने कहा कि आज मैंने पहली बार शबनम से पूछा कि तुम्हें जिस गुनाह की सजा मिलने वाली है क्या वह गुनाह तुमने किया था। शबनम ने उनसे कहा कि मैंने गुनाह नहीं किया है, मुझे फंसाया गया है। उस्मान ने कहा कि वह पहले भी सीबीआई जांच की मांग करती रही है, लेकिन उसकी बात सुनी नहीं गई। उस्मान ने कहा कि क्या सच है, क्या नहीं यह मैं तो नहीं बता सकता। अब शबनम को मीडिया से बात करने की इजाजत दी जाए। इस मामले की सही से जांच कराई जाए।
मेरे बेटे की पहचान उजागर न की जाए
रामपुर। शबनम के बेटे की परवरिश करने वाली उस्मान की पत्नी ने कहा कि इस मामले में फोकस शबनम पर रहना चाहिए। शबनम का बेटा अब उनके बेटे की तरह है, उसे इन चर्चाओं से दूर रखना चाहिए। कहीं भी उसकी पहचान उजागर न की जाए। वह स्कूल जाता है, अगर उसकी पहचान उजागर होगी तो उसके साथी या अन्य लोग उसे दूसरी निगाह से देखेंगे। ऐसी चीजों का बाल मन पर खराब असर पड़ेगा।
उस्मान ने कहा कि उनका खुद का कोई बच्चा नहीं है। शबनम का बेटा ही उनका बेटा है। उसकी अच्छी परवरिश उनकी प्राथमिकता है। शबनम के पिता की संपत्ति के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे या मेरे बेटे को कुछ नहीं चाहिए।
जेल में छुप-छुपकर रोती है शबनम
रामपुर। जेल प्रशासन कुछ दिन पहले तक दावा कर रहा था कि शबनम को मथुरा जेल में खुद की फांसी की तैयारी के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन उसे अब सब कुछ पता चल चुका है। जेल के सूत्रों के अनुसार शबनम अब पहले की तरह अन्य महिला बंदियों और जेल कर्मचारियों से बातचीत नहीं करती। खामोश रहती है। छुप-छुपकर रोती भी है। खाने-पीने में भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेती।
उस्मान ने बताया शबनम का चेहरा उतरा हुआ था। उन्होंने कहा कि जिसको पता है कि अब उसको फांसी दी जाने वाली है तो वह खुश कैसे रह सकती है। शबनम को फांसी से माफी की कोशिश के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम अपनी ओर से कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति और राज्यपाल को फिर से दया याचिका भेजी गई है। देखते हैं क्या होता है।
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बुलंदशहर निवासी उस्मान सैफी के साथ शबनम का 12 वर्षीय बेटा दोपहर लगभग 12:10 बजे जिला कारागार में दाखिल हुआ। उस्मान की पत्नी भी साथ थीं। दोपहर करीब 1:15 बजे तीनों जेल से बाहर आए। उस्मान ने बताया कि देखते ही शबनम ने बेटे को गले लगा लिया और कुछ देर फूट-फूटकर रोती रही। अपने बेटे को मन लगाकर पढ़ाई करने और अच्छा इंसान बनने की नसीहत भी दी।
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जेल से बाहर आया तो शबनम के बेटे की आंखों में भी आंसू थे। वह अपनी मां के साथ हुई मुलाकात के बारे में कुछ बोलने से बच रहा था। मीडिया के पूछने पर कहा कि उसने राष्ट्रपति से अपनी मां की सजा माफ करने की गुहार लगाई है। बोला, प्रेसिडेंट अंकल से कहा है कि मेरी मम्मा की सजा माफ कर दी जाए। मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति एक बच्चे की गुहार जरूर सुनेंगे, मां की सजा माफ कर देंगे।
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उस्मान का दावा, शबनम ने कहा मैंने गुनाह नहीं किया
रामपुर। शबनम के बेटे की परवरिश कर रहे उस्मान ने कहा कि आज मैंने पहली बार शबनम से पूछा कि तुम्हें जिस गुनाह की सजा मिलने वाली है क्या वह गुनाह तुमने किया था। शबनम ने उनसे कहा कि मैंने गुनाह नहीं किया है, मुझे फंसाया गया है। उस्मान ने कहा कि वह पहले भी सीबीआई जांच की मांग करती रही है, लेकिन उसकी बात सुनी नहीं गई। उस्मान ने कहा कि क्या सच है, क्या नहीं यह मैं तो नहीं बता सकता। अब शबनम को मीडिया से बात करने की इजाजत दी जाए। इस मामले की सही से जांच कराई जाए।
मेरे बेटे की पहचान उजागर न की जाए
रामपुर। शबनम के बेटे की परवरिश करने वाली उस्मान की पत्नी ने कहा कि इस मामले में फोकस शबनम पर रहना चाहिए। शबनम का बेटा अब उनके बेटे की तरह है, उसे इन चर्चाओं से दूर रखना चाहिए। कहीं भी उसकी पहचान उजागर न की जाए। वह स्कूल जाता है, अगर उसकी पहचान उजागर होगी तो उसके साथी या अन्य लोग उसे दूसरी निगाह से देखेंगे। ऐसी चीजों का बाल मन पर खराब असर पड़ेगा।
उस्मान ने कहा कि उनका खुद का कोई बच्चा नहीं है। शबनम का बेटा ही उनका बेटा है। उसकी अच्छी परवरिश उनकी प्राथमिकता है। शबनम के पिता की संपत्ति के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे या मेरे बेटे को कुछ नहीं चाहिए।
जेल में छुप-छुपकर रोती है शबनम
रामपुर। जेल प्रशासन कुछ दिन पहले तक दावा कर रहा था कि शबनम को मथुरा जेल में खुद की फांसी की तैयारी के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन उसे अब सब कुछ पता चल चुका है। जेल के सूत्रों के अनुसार शबनम अब पहले की तरह अन्य महिला बंदियों और जेल कर्मचारियों से बातचीत नहीं करती। खामोश रहती है। छुप-छुपकर रोती भी है। खाने-पीने में भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेती।
उस्मान ने बताया शबनम का चेहरा उतरा हुआ था। उन्होंने कहा कि जिसको पता है कि अब उसको फांसी दी जाने वाली है तो वह खुश कैसे रह सकती है। शबनम को फांसी से माफी की कोशिश के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम अपनी ओर से कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रपति और राज्यपाल को फिर से दया याचिका भेजी गई है। देखते हैं क्या होता है।