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समाजवादी आवास का डीपीआर शासन से निरस्त
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Mon, 11 Jan 2016 07:00 PM IST
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रामगंगा नदी से एकदम सटा होने की वजह से खतरनाक मानते हुए शासन ने शैल इंफ्राटेक की ओर से दाखिल समाजवादी आवास के डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को खारिज कर दिया है। एमडीए ने बाढ़ खंड की एनओसी नहीं होने की वजह से इस प्रोजेक्ट में आपत्ति लगाई थी। यह समाजवादी आवास रामगंगा विहार फेस टू में सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट के सामने श्मशान से सटाकर बनाए जा रहे हैं।
डीपीआर मंजूर होने से पहल ही यहां निर्माण शुरू हो गया था। वीसी एमडीए का कहना है कि डीपीआर निरस्त होने के बाद काम रुकवा दिया गया है। टाउन प्लानर नितिन मित्तल के मुताबिक बिल्डर ने आकाश ग्रीन्स के अपने चार सौ फ्लैट्स को शामिल करते हुए समाजवादी आवास योजना के तहत गरीबों के लिए कुल 1200 फ्लैट्स बनाने की डीपीआर शासन में दी थी।
लेकिन डीपीआर में बाढ़ खंड और तहसीलदार की एनओसी नहीं थी। लिहाजा शासन ने उसे खारिज कर दिया है। टाउन प्लानर ने बताया कि यह डीपीआर शैल इंफ्राटेक की ओर से दाखिल किया गया था। शासन ने माना है कि नदी से एकदम सटा होने की वजह से नदी का जलस्तर बढ़ने पर गरीबों के लिए बनाए गए ये फ्लैट कभी भी खतरे में पड़ सकते हैं।
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पहले सैद्धांतिक रूप से शासन ने इस प्रोजेक्ट को सहमति दे दी थी। लेकिन डीपीआर में बाढ़ खंड की एनओसी नहीं होने की वजह से डीपीआर को निरस्त कर दिया है। नदी से सटाकर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने को खतरनाक माना गया है। डीपीआर निरस्त होते ही हमने निर्माण रुकवा दिया है। बिल्डर शैल इंफ्राटेक से बाढ़ खंड की एनओसी मांगी गई है।
जंग बहादुर यादव, वीसी, एमडीए।
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डीपीआर मंजूर होने से पहल ही यहां निर्माण शुरू हो गया था। वीसी एमडीए का कहना है कि डीपीआर निरस्त होने के बाद काम रुकवा दिया गया है। टाउन प्लानर नितिन मित्तल के मुताबिक बिल्डर ने आकाश ग्रीन्स के अपने चार सौ फ्लैट्स को शामिल करते हुए समाजवादी आवास योजना के तहत गरीबों के लिए कुल 1200 फ्लैट्स बनाने की डीपीआर शासन में दी थी।
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लेकिन डीपीआर में बाढ़ खंड और तहसीलदार की एनओसी नहीं थी। लिहाजा शासन ने उसे खारिज कर दिया है। टाउन प्लानर ने बताया कि यह डीपीआर शैल इंफ्राटेक की ओर से दाखिल किया गया था। शासन ने माना है कि नदी से एकदम सटा होने की वजह से नदी का जलस्तर बढ़ने पर गरीबों के लिए बनाए गए ये फ्लैट कभी भी खतरे में पड़ सकते हैं।
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पहले सैद्धांतिक रूप से शासन ने इस प्रोजेक्ट को सहमति दे दी थी। लेकिन डीपीआर में बाढ़ खंड की एनओसी नहीं होने की वजह से डीपीआर को निरस्त कर दिया है। नदी से सटाकर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने को खतरनाक माना गया है। डीपीआर निरस्त होते ही हमने निर्माण रुकवा दिया है। बिल्डर शैल इंफ्राटेक से बाढ़ खंड की एनओसी मांगी गई है।
जंग बहादुर यादव, वीसी, एमडीए।