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Moradabad News: टैक्स बचाने के लिए काॅपियों का कच्चा बिल थमा रहे दुकानदार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 07 Apr 2025 02:17 AM IST
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Shopkeepers are giving raw bills of copies to save tax
मुरादाबाद। अभिभावक इन दिनों बच्चों का नया कोर्स खरीदने के लिए दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। ढाई हजार से आठ हजार तक के पाठ्यक्रम को खरीदने से अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है, लेकिन दुकानदार टैक्स से बचने के लिए काॅपियों और स्टेशनरी के सामान का पक्का बिल नहीं दे रहे हैं। कई दुकानों पर तो सिर्फ हाथ से पर्ची पर हिसाब लिख रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच करवाई जाएगी।
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नए शैक्षिक सत्र में स्कूलों ने नर्सरी से कक्षा आठ में ही 13 से 21 किताबें पाठ्यक्रम में लगाई हैं। एक किताब की कीमत 650 रुपये तक है। पूरा पाठ्यक्रम आठ हजार रुपये तक आ रहा है। किताबों पर टैक्स न होने की वजह से दुकानदार इसका तो पक्का बिल दे रहे हैं, लेकिन कॉपियों पर जीएसटी होने के कारण उनके बिल को हाथ से इसी बिल के नीचे जोड़ दे रहे हैं। इसके अलावा स्टेशनरी के बिल को भी किताबों के पक्के बिल के नीचे लिख रहे हैं।
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अभिभावक जुबैर ने बताया कि जब दुकानदार से पक्का बिल मांगा तो किताबों का ही 6841 बिल थमा दिया। उसी पर हाथ से 17 कॉपियों के 900 रुपये और स्टेशनरी के 310 रुपये लिख दिए। अभिभावक अल्पेश गंगवार ने बताया कि वह अपने बच्चे की कक्षा आठ की किताब लेने के लिए दुकान पर गए तो दुकानदार ने स्कूल द्वारा दी गई किताबों की सूची मांगी। जब सूची दी तो दुकानदार ने संबंधित किताबों के सामने ही उनकी कीमत लिख दी।
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सभी किताबों का टोटल 7371 रुपये करने के बाद 13 कॉपियों के1260 रुपये और स्टेशनरी के 120 भी उसी पर जोड़ दिए, अलग से दुकान का कोई बिल नहीं दिया। अभिभावक फैजान अंसारी ने बताया कि बेटे की कक्षा चार के पाठ्यक्रम का बिल 5182 रुपये आया, जबकि एक किताब अब भी बाकी है। बेटे को स्कूली बैग और दिलवाना है। सरी दुकानों पर किताबें नहीं मिलती हैं। महंगाई बर्दाश्त नहीं हो रही है।


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अभिभावकों ने बताया है कि कई दुकानदार कॉपी और स्टेशनरी का बिल नहीं दे रहे हैं। इससे वो सीधे 18 फीसदी की कर चोरी कर रहे हैं। जीएसटी विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - अंकित अग्रवाल, सचिव, मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ आल स्कूल्स

किताबों पर टैक्स नहीं है। कॉपियों पर टैक्स लगता है। इस मामले में जांच करवाई जाएगी। - आरएस द्विवेदी, अपर आयुक्त ग्रेड 1, राज्य कर विभाग
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