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बहुचर्चित शैली हत्याकांड में एफआर, कातिलों की तलाश बंद

Tue, 11 Oct 2016 01:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Tue, 11 Oct 2016 01:32 AM IST
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shailly murder case closed
शैली हत्याकांड - फोटो : फाइल ‌चित्र
जिगर कालोनी का डा. शैली हत्याकांड! यानी शहर की सबसे सनसनीखेज वारदात। हर कोई जानना चाहता है कि एक हंसमुख डाक्टर के पूरे परिवार को रातोंरात किसने खत्म कर डाला। क्यों मारा..? लेकिन अब इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद छोड़ दीजिए।
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क्योंकि खुलासे में नाकाम पुलिस ने जिगर कालोनी कांड में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। इसका मतलब ये है कि कातिल खुद किसी दिन आकर कहें कि ये कत्ल हमने किए हैं तो ठीक, नहीं तो पुलिस अब उनकी कोई तलाश नहीं करेगी।
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मौका ए वारदात पर पहुंचने में पुलिस की 20 घंटे की देरी ने पहले ही इस केस की जान निकाल दी थी। पुलिस की इस देरी से कातिलों को न सिर्फ भाग निकलने का पूरा मौका मिला था बल्कि हत्यारे सुबूतों को ठिकाने लगाने में भी कामयाब रहे थे।
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जनवरी 2014 में जिला अस्पताल के सीएमएस पद से रिटायर्ड हुई थीं डा. शैली मेहरोत्रा। हंसमुख और बेहद मृदुभाषी डा. शैली का शहर के चिकित्सा जगत में अलग सम्मान था। उनके पति डा. ओम मेहरोत्रा रेडियोलाजिस्ट थे और करीब 12 साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके थे।

डा. शैली की ननद डा. रश्मि भी पति से झगड़े के बाद यहीं उनके पास रहती थीं। बेटा और बहू डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे लिहाजा डा. शैली मेहरोत्रा ने अपनी पांच वर्षीय पोती दिव्यांशी उर्फ गिन्नी को भी अपने पास ही रख रखा था। जिसे वह रोज स्कूल छोड़ने जाती थीं और खुद ही स्कूल से लाती थीं।

किसी ने सोचा भी नहीं था कि इस हंसते खेलते परिवार के रक्तरंजित शव एक दिन इस तरह घर में पड़े मिलेंगे। इस हत्याकांड से पूरा शहर कांप उठा था। घटना के विरोध में डाक्टरों, व्यापारियों और समाज के हर तबके ने धरना प्रदर्शन किए, कैंडल मार्च निकाले। पुलिस ने भी हर मुमकिन कोशिश की।

लेकिन 20 घंटे की शुरुआती देरी पुलिस से बाजी छीन चुकी थी। पुलिस ने कभी नौकरों से पूछताछ की तो कभी परिवार वालों से सवाल जवाब किए। डा. रश्मि के पति पर शक की सुई कई बार ठिठकी। लेकिन सुबूत कोई नहीं था। पुलिस कमजोर पड़ी तो डीजीपी ने एसटीएफ को कमान सौंप दी।


महीनाभर एसटीएफ यहां डेरा डाले रही। डीजीपी जावीद अहमद ने केस की मानीटरिंग खुद अपने हाथों में ले ली। लेकिन नतीजा सिफर रहा। शनिवार को इस केस की फाइल बिना खुलासे के बंद कर दी गई।
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