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कोरोना को मात देने वाले गंभीर मरीज पटाखों से रहे दूर
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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण काल में आज दीपोत्सव मनाया जाएगा। धनतेरस की खरीदारी के बाद अब आतिशबाजी की बारी है। आतिशबाजी की धूम में दूसरों की सेहत भी ख्याल रखना होगा।
खासकर कोरोना को मात देने वाले गंभीर मरीजों का, जिनके फेफड़े कोरोना की लड़ाई में कमजोर हो चुके हैं। पटाखों का जहरीला धुआं इनकी सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसे मरीजों को धुएं के साथ-साथ आने वाली ठंड से भी बचना होगा। डाक्टरों के मुताबिक कोविड के करीब 25 फीसदी मरीजों को निमोनिया की शिकायत हुई थी।
ऐसे मरीजों के फेफड़ों में सूजन बनी रहती है। वहीं बहुत कम लोगों को पता होगा कि पटाखे फोड़ने के साथ सिर्फ आवाज नहीं बल्कि कई सारे केमिकल भी निकलते हैं। जैसे कि कॉपर, जिंक, लैड व मैग्नीशियम, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इसके अलावा पटाखों के फोड़ने से जलने और चोट लगने का भी खतरा रहता है। आतिशबाजी से उठने वाला धुआं भी आंखों और सांस की बीमारियों को भी बढ़ावा देता है। ऐसे में अपनी खुशी में दूसरी की सेहत को न भूल जाए।
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खासकर कोरोना को मात देने वाले गंभीर मरीजों का, जिनके फेफड़े कोरोना की लड़ाई में कमजोर हो चुके हैं। पटाखों का जहरीला धुआं इनकी सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसे मरीजों को धुएं के साथ-साथ आने वाली ठंड से भी बचना होगा। डाक्टरों के मुताबिक कोविड के करीब 25 फीसदी मरीजों को निमोनिया की शिकायत हुई थी।
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ऐसे मरीजों के फेफड़ों में सूजन बनी रहती है। वहीं बहुत कम लोगों को पता होगा कि पटाखे फोड़ने के साथ सिर्फ आवाज नहीं बल्कि कई सारे केमिकल भी निकलते हैं। जैसे कि कॉपर, जिंक, लैड व मैग्नीशियम, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इसके अलावा पटाखों के फोड़ने से जलने और चोट लगने का भी खतरा रहता है। आतिशबाजी से उठने वाला धुआं भी आंखों और सांस की बीमारियों को भी बढ़ावा देता है। ऐसे में अपनी खुशी में दूसरी की सेहत को न भूल जाए।
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