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अभिभावक और बच्चे परेशान, शिक्षा विभाग अनजान
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मुरादाबाद के पीएमएस स्कूल की छुटटी होने के बाद अभिभावक का इंतजार करते बच्चे।
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मुरादाबाद। निजी स्कूल बसों की हड़ताल से दूसरे दिन भी बच्चों और अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ी। सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने और दोपहर में स्कूल से लाने के लिए अभिभावक जूझते नजर आए। अभिभावकों के निजी वाहनों से स्कूल पहुंचने से अधिकतर स्कूलों के बाहर जाम जैसे हालत रहे। बसों की हड़ताल से स्कूलों में छात्र उपस्थिति भी सामान्य दिनों की तुलना में कम रही। स्कूल प्रबंधकों को शिक्षा विभाग की चेतावनी का कोई असर नहीं दिखा। शिक्षा विभाग के अफसर भी अभिभावकों और बच्चों की इस परेशानी से अनजान रहे।
उप्र मोटर यान अधिनियम संशोधन के विरोध में स्कूल प्रबंधन और बस संचालकों ने 28 और 29 अगस्त को स्कूल बसों का संचालन बंद रखा। 90 फीसदी स्कूल बसों की आवाजाही बंद रहने से बच्चों और अभिभावकों को परेशानी से जूझना पड़ा। गुरुवार को कई बच्चे स्कूल ही नहीं गए। कई अभिभावकों ने ई-रिक्शा और आटो बुक करवाकर बच्चों को स्कूल भेजा तो अधिकतर खुद ही छोड़ने गए। दोपहर में बच्चों की छुट्टी से पहले ही स्कूलों के बाहर अभिभावकों की भीड़ जुट गई। दोपहर गर्मी में अभिभावक सड़क पर बच्चों की छुट्टी के इंतजार में पसीना पोंछते नजर आए। अधिकतर अभिभावक अपना कामकाज छोड़कर स्कूल आए थे। छोटे बच्चों को लेने पहुंचे अभिभावक स्कूल परिसर में ही घंटों से बैठे रहे।
स्कूलों की छुट्टी होते ही अधिकतर स्कूलों के बाहर जाम लगा गया। अभिभावक भीड़ में अपने बच्चों को ढूंढते नजर आए। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग एवं स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई। कहा कि स्कूलों ने तिमाही एडवांस शुल्क जमा कराया है। इसके बाद भी वाहनों की हड़ताल कर बच्चों और अभिभावकों को परेशान किया है। प्रशासन और शिक्षा विभाग कार्यवाही करने के बजाए तमाशबीन बना रहा।
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जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेदी की चेतावनी भी स्कूल प्रबंधकों ने दरकिनार कर दी। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बसों की आवाजाही बंद करने पर स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कहीं थी। दो दिन बसों का संचालन बंद रहा। बच्चों और अभिभावक परेशान रहे, लेकिन शिक्षा विभाग बेखबर रहा। शिक्षा विभाग के मुताबिक किसी भी अभिभावक ने शिकायत नहीं की है, लिहाजा स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सकते।
- स्कूल प्रबंधन बच्चों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। सरकार पर दबाव बनाने के लिए बसों की हड़ताल कर बच्चों और उनके अभिभावकों को परेशान किया गया। - प्रियंका वार्ष्णेय, गृहणि
- स्कूलों का रवैया बेहद खराब है। स्कूल मनमानी फीस वसूलते हैं। इसके बाद भी बच्चों के प्रति गंभीर नहीं हैं। भविष्य में हड़ताल न हो, इसके लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। - महीरा, गृहणि
- अधिकतर स्कूलों ने बच्चों की तीन महीने का एडवांस परिवहन शुल्क जमा कराया है। बसों का संचालन बंद करना स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों का शोषण है। - मिंटू, दुकानदार
- कामकाजी लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। दोपहर में कोई घर तो कोई दफ्तर छोड़कर बच्चों को लेने पहुंचा है। स्कूल प्रबंधकों पर अभिभावकों की इस परेशानी का कोई असर नहीं पड़ा है। - आशीष, व्यापारी
- सरकार स्कूल संचालकों का मानसिक उत्पीड़न कर रही है। नियमावली संशोधन के मानकों को पूरा करने से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। मानकों में ढील देकर अभिभावकों और स्कूल संचालकों को राहत दी जाए। - शीरीन संतराम, अध्यक्ष स्कूल एसोसिएशन
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उप्र मोटर यान अधिनियम संशोधन के विरोध में स्कूल प्रबंधन और बस संचालकों ने 28 और 29 अगस्त को स्कूल बसों का संचालन बंद रखा। 90 फीसदी स्कूल बसों की आवाजाही बंद रहने से बच्चों और अभिभावकों को परेशानी से जूझना पड़ा। गुरुवार को कई बच्चे स्कूल ही नहीं गए। कई अभिभावकों ने ई-रिक्शा और आटो बुक करवाकर बच्चों को स्कूल भेजा तो अधिकतर खुद ही छोड़ने गए। दोपहर में बच्चों की छुट्टी से पहले ही स्कूलों के बाहर अभिभावकों की भीड़ जुट गई। दोपहर गर्मी में अभिभावक सड़क पर बच्चों की छुट्टी के इंतजार में पसीना पोंछते नजर आए। अधिकतर अभिभावक अपना कामकाज छोड़कर स्कूल आए थे। छोटे बच्चों को लेने पहुंचे अभिभावक स्कूल परिसर में ही घंटों से बैठे रहे।
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स्कूलों की छुट्टी होते ही अधिकतर स्कूलों के बाहर जाम लगा गया। अभिभावक भीड़ में अपने बच्चों को ढूंढते नजर आए। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग एवं स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई। कहा कि स्कूलों ने तिमाही एडवांस शुल्क जमा कराया है। इसके बाद भी वाहनों की हड़ताल कर बच्चों और अभिभावकों को परेशान किया है। प्रशासन और शिक्षा विभाग कार्यवाही करने के बजाए तमाशबीन बना रहा।
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जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेदी की चेतावनी भी स्कूल प्रबंधकों ने दरकिनार कर दी। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बसों की आवाजाही बंद करने पर स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कहीं थी। दो दिन बसों का संचालन बंद रहा। बच्चों और अभिभावक परेशान रहे, लेकिन शिक्षा विभाग बेखबर रहा। शिक्षा विभाग के मुताबिक किसी भी अभिभावक ने शिकायत नहीं की है, लिहाजा स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सकते।
- स्कूल प्रबंधन बच्चों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। सरकार पर दबाव बनाने के लिए बसों की हड़ताल कर बच्चों और उनके अभिभावकों को परेशान किया गया। - प्रियंका वार्ष्णेय, गृहणि
- स्कूलों का रवैया बेहद खराब है। स्कूल मनमानी फीस वसूलते हैं। इसके बाद भी बच्चों के प्रति गंभीर नहीं हैं। भविष्य में हड़ताल न हो, इसके लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। - महीरा, गृहणि
- अधिकतर स्कूलों ने बच्चों की तीन महीने का एडवांस परिवहन शुल्क जमा कराया है। बसों का संचालन बंद करना स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों का शोषण है। - मिंटू, दुकानदार
- कामकाजी लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। दोपहर में कोई घर तो कोई दफ्तर छोड़कर बच्चों को लेने पहुंचा है। स्कूल प्रबंधकों पर अभिभावकों की इस परेशानी का कोई असर नहीं पड़ा है। - आशीष, व्यापारी
- सरकार स्कूल संचालकों का मानसिक उत्पीड़न कर रही है। नियमावली संशोधन के मानकों को पूरा करने से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। मानकों में ढील देकर अभिभावकों और स्कूल संचालकों को राहत दी जाए। - शीरीन संतराम, अध्यक्ष स्कूल एसोसिएशन