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अनुसूचित जाति के लोगों ने अपने घरों पर लगाए मकान बिकाऊ के पोस्टर
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वीरपुर बरियर उर्फ खड़क गांव में मकानों पर लगे पोस्टर।
मुरादाबाद। मूंढापांडे थानाक्षेत्र के वीरपुर बरियर उर्फ खड़क गांव में अनुसूचित जाति के लोगों ने अपने घरों पर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा रखे हैं। उन्होंने एक विशेष समुदाय पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि वे मदद के लिए थाने गए तो पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें डांटकर भगा दिया, इतना ही नहीं पुलिस ने आरोपी पक्ष की तहरीर पर उनके खिलाफ ही एनसीआर भी दर्ज की है। इसलिए डर और दहशत के कारण वे गांव छोड़ने को मजबूर हैं।
घरों पर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगाने का यह मामला अल्पसंख्यक बहुल गांव वीरपुर बरियर उर्फ खड़क गांव का है। इस गांव की आबादी करीब पांच हजार है। इसमें ग्यारह मकान वाल्मीकी समाज से ताल्लुक रखने वाले लोगों के हैं। 24 अगस्त को मूंढापांडे थाने में अंगन के बेटे रोहित और अमर के खिलाफ एनसीआर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया था कि रोहित और उसका भाई अमर गांव निवासी इकबाल की बगिया से अमरूद तोड़ने गए थे। इकबाल के बेटे ताहिर ने विरोध किया तो उसे बेल्टों से पीटा गया है। पुलिस की एकतरफा कार्रवाई से दुखी होकर अंगन और उसके समाज के लोगों ने अपने घरों पर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा दिए हैं।
इन लोगों का कहना है कि रोहित पतंग उठाने बगिया में गया था। वहां रोहित को इकबाल के बेटे ने घेर लिया और पीटने की कोशिश की। वह किसी तरह भागकर अपने घर में आकर छिप गया था। आरोप है कि इकबाल के पक्ष में अन्य लोग भी आ गए और उन्होंने घर में घुसकर पूरे परिवार को पीटा था। इस मामले की शिकायत मूंढापांडे थाने में की गई थी, मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। आरोप है कि घटना के बाद से ही उन्हें धमकियां मिल रही हैं। संजीव, सुदीश, मुनीष, भजन लाल, सचिन, किशोर और ज्ञानी का कहना है कि वे दहशत के कारण गांव से पलायन करने को मजबूर हैं। कोई भी उनके मकान को खरीद सकता हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत एसएसपी कार्यालय और सीएम पोर्टल पर की है।
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हमारे लोगों के साथ आए दिन मारपीट की जाती है। थाने में भी कोई सुनवाई नहीं होती है। मजबूर होकर हम अपने मकान बेचने को मजबूर हुए हैं। हमने इस मामले की शिकायत एसएसपी कार्यालय में भी की है।
श्याम लाल
हमें दबाकर रखा जाता है। तीन साल पहले भी हमारे समाज के लोगों के साथ मारपीट की गई थी। उस वक्त भी थाने में शिकायत की गई थी, मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
ज्ञान सिंह
रोहित और अमर ने ताहिर के साथ मारपीट की थी। उस मामले में ही एनसीआर दर्ज की है। अब इस मामले में कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं। गांव में किसी तरह का कोई दबाव नहीं है।
नवाब सिंह, थाना प्रभारी मूंढापांडे
बगिया से अमरूद तोड़ने को लेकर विवाद हुआ था। रोहित और उसके भाई ने ही ताहिर के साथ मारपीट की थी। कुछ लोग इस मामले को बेवजह तूल दे रहे हैं।
इरफान, ग्राम प्रधान
दूसरे पक्ष के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने को घरों पर पोस्टर लगाए गए हैं। अमरूद तोड़ने का विरोध करने पर बगिया मालिक के बेटे के साथ मारपीट की गई थी।
डा. गणेश कुमार गुप्ता, सीओ हाईवे
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घरों पर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगाने का यह मामला अल्पसंख्यक बहुल गांव वीरपुर बरियर उर्फ खड़क गांव का है। इस गांव की आबादी करीब पांच हजार है। इसमें ग्यारह मकान वाल्मीकी समाज से ताल्लुक रखने वाले लोगों के हैं। 24 अगस्त को मूंढापांडे थाने में अंगन के बेटे रोहित और अमर के खिलाफ एनसीआर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया था कि रोहित और उसका भाई अमर गांव निवासी इकबाल की बगिया से अमरूद तोड़ने गए थे। इकबाल के बेटे ताहिर ने विरोध किया तो उसे बेल्टों से पीटा गया है। पुलिस की एकतरफा कार्रवाई से दुखी होकर अंगन और उसके समाज के लोगों ने अपने घरों पर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा दिए हैं।
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इन लोगों का कहना है कि रोहित पतंग उठाने बगिया में गया था। वहां रोहित को इकबाल के बेटे ने घेर लिया और पीटने की कोशिश की। वह किसी तरह भागकर अपने घर में आकर छिप गया था। आरोप है कि इकबाल के पक्ष में अन्य लोग भी आ गए और उन्होंने घर में घुसकर पूरे परिवार को पीटा था। इस मामले की शिकायत मूंढापांडे थाने में की गई थी, मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। आरोप है कि घटना के बाद से ही उन्हें धमकियां मिल रही हैं। संजीव, सुदीश, मुनीष, भजन लाल, सचिन, किशोर और ज्ञानी का कहना है कि वे दहशत के कारण गांव से पलायन करने को मजबूर हैं। कोई भी उनके मकान को खरीद सकता हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत एसएसपी कार्यालय और सीएम पोर्टल पर की है।
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हमारे लोगों के साथ आए दिन मारपीट की जाती है। थाने में भी कोई सुनवाई नहीं होती है। मजबूर होकर हम अपने मकान बेचने को मजबूर हुए हैं। हमने इस मामले की शिकायत एसएसपी कार्यालय में भी की है।
श्याम लाल
हमें दबाकर रखा जाता है। तीन साल पहले भी हमारे समाज के लोगों के साथ मारपीट की गई थी। उस वक्त भी थाने में शिकायत की गई थी, मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
ज्ञान सिंह
रोहित और अमर ने ताहिर के साथ मारपीट की थी। उस मामले में ही एनसीआर दर्ज की है। अब इस मामले में कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं। गांव में किसी तरह का कोई दबाव नहीं है।
नवाब सिंह, थाना प्रभारी मूंढापांडे
बगिया से अमरूद तोड़ने को लेकर विवाद हुआ था। रोहित और उसके भाई ने ही ताहिर के साथ मारपीट की थी। कुछ लोग इस मामले को बेवजह तूल दे रहे हैं।
इरफान, ग्राम प्रधान
दूसरे पक्ष के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने को घरों पर पोस्टर लगाए गए हैं। अमरूद तोड़ने का विरोध करने पर बगिया मालिक के बेटे के साथ मारपीट की गई थी।
डा. गणेश कुमार गुप्ता, सीओ हाईवे