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Sambhal Violance: सीओ और कोतवाल के खिलाफ कोर्ट पहुंचा घायल का पिता, जान से मारने की नीयत से गोली मारने का आरोप

Wed, 05 Feb 2025 03:40 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 05 Feb 2025 03:40 PM IST
सार

संभल बवाल के घायल का पिता सीओ अनुज चौधरी और कोतवाल समेत अन्य के खिलाफ कोर्ट पहुंच गया है। सीओ और पुलिसकर्मियों पर बेटे को जान से मारने की नीयत से गोली मारने का आरोप लगाया है।

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Sambhal Violance father of injured youth reached court against CO and police officer
संभल बवाल - फोटो : संवाद

विस्तार

संभल बवाल में घायल हुए मोहल्ला नखासा निवासी आलम का पिता यामीन मंगलवार को सीओ अनुज चौधरी समेत 15-20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय पहुंच गया है। यामीन ने आरोप लगाया कि संभल सीओ और संभल कोतवाली प्रभारी समेत 15-20 पुलिसकर्मियों ने संभल बवाल के दौरान उसके बेटे को जान से मारने की नीयत से कई गोली मारी थीं। जिसमें बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था। 
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यामीन के अधिवक्ता कमर हुसैन ने बताया कि मोहल्ला नखासा अंजुमन मदरसे के सामने के रहने वाले आलम के पिता यामीन ने कोतवाली संभल प्रभारी अनुज कुमार तोमर व सीओ अनुज चौधरी और 15-20 अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ जान से मारने की नीयत से आलम को घायल कर दिया था। 
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इस संबंध में प्रार्थना पत्र न्यायालय में दिया गया है। जिसमें बताया गया कि यामीन एक मजदूर है और उसका पुत्र आलम ठेले पर बिस्कुट बेचने का कार्य करता है। उन्होंने बताया कि 24 नवंबर की सुबह आठ बजे उसका बेटा आलम घर से तीन पहियों का ठेला लेकर शहर में बिस्कुट बेचने के लिए गया था। 
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सुबह करीब पौने नौ बजे जामा मस्जिद मोहल्ला कोट के पास पहुंचा तो सीओ अनुज चौधरी व संभल कोतवाली के इंस्पेक्टर अनुज कुमार तोमर समेत 15-20 पुलिस कर्मियों ने भीड़ पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। 
 

बवाल होते देखकर उसका बेटा आलम अपने ठेले को छोड़कर जान बचाने के लिए भागा। आलम को पुलिस की दो गोली पीठ में और एक हाथ में लगी। आलम को काफी गंभीर चोटें आयीं।  न्यायालय ने इस संबंध में कोतवाली संभल से 17 फरवरी तक आख्या मांगी है।

 

बोला, छिपकर कराया बेटे का उपचार
पीड़ित ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि बवाल के बाद घायलों का किसी भी डॉक्टर ने उसका उपचार नहीं किया। वह तीन दिन तक पुलिस के डर से घर में ही रहा। मुरादाबाद और अलीगढ़ के अस्पतालों ने भी पुलिस प्रशासन के दबाव में उपचार करने से मना कर दिया। बाद में मेरठ के एक अस्पताल में पता छिपाकर उसकी गोली निकालवाई गईं। तब जाकर आलम की जान बची। 

बवाल के आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई 11 व 12 को
संभल बवाल के 11 जमानत अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। दो आरोपियों के अधिवक्ता ने जमानत प्रार्थना पत्र वापस ले लिए। जबकि नौ जमानत प्रार्थना पत्रों पर रिकॉर्ड न आने की वजह से सुनवाई टल गई। जमानत के इन प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 11 व 12 फरवरी की तारीख नियत की है।  
 

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि थाना नखासा की एफआईआर में वांछित तहजीव, अजहर अली, सुबरान उर्फ मुन्ना, मोहम्मद सुल्तान, अनम, रिहान, सलमान, बाबू, फरहान आदि के जमानत प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/रेप केसेस एंड पॉक्सो एक्ट निर्भय नारायण राय के न्यायालय में सुनवाई होनी थी, लेकिन थाना नखासा की पुलिस द्वारा रिकॉर्ड न्यायालय में न भेजे जाने के कारण न्यायालय ने 11 और 12 फरवरी जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए नियत कर दी है। 

साथ ही एक अन्य एफआईआर में आरोपी सुल्तान व अनस द्वारा धारा बढ़ाने व घटाने के कारण अपने जमानत प्रार्थना पत्र पर बल न देने को कहा। साथ ही दोनों ने अपने जमानत के प्रार्थना पत्र वापस ले लिए हैं। 
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