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मंदिर में संत रामदास की संदिग्ध परिस्थतियों में मौजूद, गुस्साए लोगों ने हरिद्वार हाईवे पर लगाया जाम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 02:30 AM IST
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saint's death under suspicious circumstances
पीलीकोठी चौराहा पर नगर संत बाबा संत रामदास की मौत के बाद विलाप करते परिजन। - फोटो : CITY
मुरादाबाद। गलशहीद थानाक्षेत्र में मंदिर में संत रामदास की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। पीएम रिपोर्ट की वजह साफ नहीं हो पाई। इसकी जानकारी मिलने पर कई संगठनों के लोग पीलीकोठी चौराहे पर इकट्ठा हो गए। उन्होंने शव लेेकर जा रही एंबुलेंस रुकवा कर हरिद्वार हाईवे पर जाम लगा दिया।
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सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी भी आ गए। उन्होंने प्रदर्शन करने वाले लोगों से बातचीत की। परिजन व अन्य लोगों ने संतराम दास के तीन मोबाइल और पर्स गायब होने पर उनकी हत्या किए जाने की आशंका जताई है। तब अधिकारियों ने पूरे मामले की गहनता से जांच कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शव ब्रजघाट लेकर चले गए।
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मूलरूप से कोतवाली के अमरोहा गेट निवासी रामदास वर्षों पहले संत बन गए थे। वह नागफनी थानाक्षेत्र में सैनी बस्ती स्थित मंदिर में महंत थे। इसके अलावा मां रामगंगा प्रदूषण मुक्ति समिति के संस्थापक थे। संत रामदास के बहनोई निर्मल गुप्ता ने बताया कि वह रोज शाम को उनके घर खाना खाने आते थे। शुक्रवार की रात को जब संत खाना खाने नहीं पहुंचे, तब उनके मोबाइल पर संपर्क किया गया तो मोबाइल स्विच ऑफ था। शनिवार की सुबह कुछ लोग उनके घर पहुंचे। तब उन्होंने बताया कि संत रामदास का शव गलशहीद थानाक्षेत्र के असालतपुरा स्थित मंदिर में मिला है। सूचना मिलने पर संत के भाई सुशील कुमार भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया। गलशहीद थाना प्रभारी अजय पाल सिंह के मुताबिक मंदिर के पुजारी ओमी वाल्मीकि ने बताया कि शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे संत रामदास मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने अपनी तबीयत खराब बताई थी। उन्होंने एक चादर मांगी और वहीं फर्श पर सो गए थे। शनिवार की सुबह नवरात्र के पहले दिन लोग मंदिर पहुंचे तो उन्होंने संत राम दास को मृत पाया। शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर ब्रजघाट के लिए चले तो उनसे पहले ही पीलीकोठी चौराहे पर राष्ट्रीय योगी सेना समेत अन्य संगठन के लोग जुट गए थे। उन्होंने एंबुलेंस रुकवा ली। इसके बाद हरिद्वार हाईवे पर जाम लगा दिया गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंच गई और लोगों को समझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन लोग नहीं माने। इसके बाद एसपी सिटी अमित आनंद व अन्य अधिकारी भी आ गए। परिजन और अन्य लोगों ने संत राम दास की हत्या किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि संत राम दास के तीन मोबाइल व पर्स गायब है। उनके मोबाइल पर डीपी भी बदल दी गई है। एसपी सिटी ने गहनता से जांच कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर ब्रजघाट के लिए रवाना हो गए हैं।
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शुक्रवार की रात को संत रामदास मंदिर में पहुंचे थे। उन्होंने वहां अपनी तबीयत खराब बताई। इसके बाद वह चादर ओढ़ कर सो गए थे। सुबह वह मृत पाए गए थे। शव का पीएम करा दिया गया है। पीएम रिपोर्ट में कोई चोट का निशान नहीं हैं। मौत की वजह भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। विसरा सुरक्षित रखा गया है। उनके मोबाइल व पर्स के बारे में जांच की जा रही है। कुछ लोगों ने जाम लगाया था। उन्हें समझाकर जाम खुलवा दिया गया।
अमित कुमार आनंद, पुलिस अधीक्षक नगर
मेरे भाई के पास तीन मोबाइल थे। वह हमेशा अपने पास दस बारह हजार रुपये भी रखते थे। उनका मोबाइल व रुपये गायब हैं। हमें आशंका है कि उनके साथ कोई घटना हुई है। इस मामले की जांच की जा जाए।
सुशील कुमार, संत राम दास के भाई
शुक्रवार रात संत राम दास मंदिर पर पहुंचे थे। वो अपनी तबीयत खराब बता रहे थे। उन्हें ठंड लग रही थी। तब उन्होंने एक चादर मांगी और वहीं सो गए थे। सुबह वह मृत मिले। इसके बाद पुलिस को सूचना दे दी गई थी।
ओमी वाल्मीकि, मंदिर के पुजारी
खनन को लेकर खोला था मोर्चा, जताई थी हत्या की आशंका
मुरादाबाद। संत राम दास ने रामगंगा नदी में चल रहे खनन और शहर में ई कचरा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। वह बीच-बीच में अधिकारियों से भी इसकी शिकायत करते रहे हैं। वीडियो बनाकर भी अफसरों को भी भेजा करते थे। इस कारण संत राम दास से खनन और ई कचरा का धंधा करने वाले रंजिश रखते थे। योगी सेना के मंडल अध्यक्ष आकाश अग्रवाल ने बताया कि एक सप्ताह पहले उनकी बैठक हुई थी। बैठक में संत रामदास ने अपनी हत्या की आशंका जताई थी। तरुण अग्रवाल ने इसकी जानकारी एसपी सिटी और अन्य अधिकारियों को शनिवार को पीलीकोठी चौराहे पर जाम के दौरान दी है।
मोबाइल और रुपये कैसे गायब हो गए
मुरादाबाद। पीएम रिपोर्ट में भले ही मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। शरीर पर चोटों के निशान भी नहीं मिले, लेकिन संत रामदास के मोबाइल और रुपये गायब होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। संत के परिजन और योगी सेना के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने भी हत्या की आशंका जताई है। उन्होंने पूरे मामले में जांच कराने की मांग की है। संत राम दास के भाई सुशील और दिनेश व बहन ऊषा ने भी हत्या की आशंका जताई है।

रामगंगा को प्रदूषण के लिए भूख हड़ताल पर बैठे थे संतराम दास
मुरादाबाद। रामगंगा नदी को प्रदूषण मुक्ति कराने की मांग को लेकर संत रात दास कलक्ट्रेट पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। तब ही उन्होंने मां रामगंगा प्रदूषण मुक्ति समिति बनाई थी। उनके साथ अन्य पदाधिकारी भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि रामगंगा में गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद असर भी दिखाई दिया था। प्रशासन ने अभियान चलाकर रामगंगा नदी में साफ सफाई कराई थी। गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।
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