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Moradabad News: युवाओं में तेजी से बढ़ रहा हेपेटाइटिस का खतरा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jul 2024 06:03 AM IST
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Risk of hepatitis increasing rapidly among youth
मुरादाबाद। कांशीराम नगर निवासी 23 वर्षीय युवक एक कंपनी में नौकरी करता है। एक शिविर में छह जुलाई को रक्तदान करने पहुंचे। जब खून की जांच की गई तो पता चला कि युवक हेपेटाइटिस सी से पीड़ित है, जबकि युवक खुद को पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करता है। दोबारा जांच कराने पर भी हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई। उसने कहा कि मुझे कभी कोई परेशानी महसूस नहीं हुई। अब युवक ने अपना उपचार शुरू करवा दिया है। ऐसे कई मामले में जो बताते हैं कि युवाओं में हेपेटाइटिस का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
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जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट हेमंत चौधरी ने बताया कि जिला अस्पताल में वर्ष 2019 में हेपेटाइटिस का उपचार केंद्र शुरू हुआ था। अस्पताल में उपचार के लिए प्रतिदिन 40 से 45 नए मरीज आते हैं। अब तक इस केंद्र पर 26,010 मरीजों का उपचार हुआ है। इनमें से 24445 मरीजाें का कोर्स पूरा हो चुका है। अभी 1565 मरीजों का उपचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब उपचार केंद्र शुरू हुआ था तो अमरोहा, संभल, बिजनौर आदि जनपदों से भी मरीज आते थे, लेकिन अब इन जनपदों में उपचार की सुविधा शुरू हो गई है। इसलिए अब सिर्फ मुरादाबाद के ही मरीज आ रहे हैं।
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यहां पर ज्यादातर मरीज 30 से 40 आयु वर्ग के हैं। चिकित्सकों का कहना है कि समय रहते उपचार शुरू होने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। लोगों को स्वास्थ्य की रूटीन जांच जैसे शुगर, हीमोग्लोबिन की तरह हेपेटाइटिस की जांच करवानी चाहिए, ताकि व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ जीवन जी सके।
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बिलारी और कुंदरकी के ज्यादा मरीज
विभागीय अधिकारियों की मानें तो मुरादाबाद के मरीजों में सबसे ज्यादा मरीज बिलारी और कुंदरकी के हैं। यहां पर कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां परिवार का हर दूसरा व्यक्ति हेपेटाइटिस से पीड़ित है। बताया जाता है कि यहां पर रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले लोगाें की संख्या ज्यादा है।
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स्टाफ को किया जागरूक
शनिवार को जिला अस्पताल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें चिकित्सकों के अलावा स्टाफ नर्स ने भी प्रतिभाग किया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संगीता गुप्ता ने अपने स्टाफ को बायोमेडिकल वेस्ट के सही निस्तारण, सिरिंज का एक बार ही उपयोग करने आदि के लिए जागरूक किया। इस दौरान अपर निदेशक डॉ. रितु कत्याल, डॉ. राजेंद्र कुमार, नोडल अधिकारी, डॉ. संजीव बेलवाल, उपचार केंद्र से डॉ. एनके मिश्रा, ब्लड बैंक से डाॅ. शिल्पा अग्रवाल आदि मौजूद रहीं।

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हेपेटाइटिस के कारण
असुरक्षित तरीके से दांत निकलवाना, टैटू गुदवाना, गर्भवती महिला से शिशु को होना।

हेपेटाइटिस के लक्षण
कमजोरी महसूस होना
पेट में दर्द होना
नोजिया होना
थकावट महसूस होना
भूख न लगना
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इस बीमारी में लापरवाही बरतने से कैंसर होने की आशंका रहती है। पहले लोगों में हेपेटाइटिस की जांच करवाने को लेकर झिझक होती थी। अब जागरूकता की वजह से लोग जांच करवाते हैं और शुरुआती स्तर पर बीमारी का पता चल जाता है। इसके बाद होने वाले उपचार से मरीज स्वस्थ हो जाते हैं।
डॉ. संगीता गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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