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रिटायर हो गए सोलह लाख बछड़ों के ‘पापा’
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Fri, 15 Apr 2016 03:33 AM IST
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गोवंशीय
- फोटो : gettyimages
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पराग के ग्यारह सांड़ रिटायर हो गए हैं। इन सांड़ों के सीमेन से अब तक सोलह लाख बछड़े पैदा किए जा चुके हैं। पराग के सीमेन बैंक में पिछले दस साल से अपनी सेवाएं देने वाले यह सांड़ अब गोसदन को भेजे जाएंगे।
इनके रिटायर हो जाने के कारण नस्ल सुधार कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहा है लिहाजा अब शासन से नए सांड़ की खरीद के लिए बजट की मांग की जा रही है। मुरादाबाद के दलपतपुर में स्थित पराग डेयरी में सीमेन बैंक भी चलता है। यहां 31 सांड़ हैं।
इनमें 11 सांड़ अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। अब इनका सीमेन (वीर्य) नहीं लिया जा सकता है। जबकि जो बाकी सांड़ हैं वह भी तीन से पांच साल के बीच में अपनी मियाद पूरी कर लेंगे। इस सीमेन बैंक से प्रदेश भर की सभी 20 डेयरियों को सीमेन की सप्लाई की जाती है।
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पशुपालन विभाग भी नस्ल सुधार के लिए पराग से ही सीमेन लेता है। पराग के महाप्रबंधक डा. मोहन स्वरूप ने बताया कि प्राइवेट डेयरियां भी नस्ल सुधार के लिए यहां से सीमेन ले रही हैं। अब जो ग्यारह सांड़ रिटायर हो गए हैं उनके स्थान पर दूसरों की खरीद होगी।
इसके लिए शासन स्तर से बजट की मांग की जा रही है। जर्सी और फ्रीजियन प्रजाति के सांड़ इस बार सीमेन बैंक मेें लाए जा रहे हैं। कुछ दूसरी प्रजातियों की भी मांग की जा रही है। ताकि दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
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इनके रिटायर हो जाने के कारण नस्ल सुधार कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहा है लिहाजा अब शासन से नए सांड़ की खरीद के लिए बजट की मांग की जा रही है। मुरादाबाद के दलपतपुर में स्थित पराग डेयरी में सीमेन बैंक भी चलता है। यहां 31 सांड़ हैं।
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इनमें 11 सांड़ अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। अब इनका सीमेन (वीर्य) नहीं लिया जा सकता है। जबकि जो बाकी सांड़ हैं वह भी तीन से पांच साल के बीच में अपनी मियाद पूरी कर लेंगे। इस सीमेन बैंक से प्रदेश भर की सभी 20 डेयरियों को सीमेन की सप्लाई की जाती है।
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पशुपालन विभाग भी नस्ल सुधार के लिए पराग से ही सीमेन लेता है। पराग के महाप्रबंधक डा. मोहन स्वरूप ने बताया कि प्राइवेट डेयरियां भी नस्ल सुधार के लिए यहां से सीमेन ले रही हैं। अब जो ग्यारह सांड़ रिटायर हो गए हैं उनके स्थान पर दूसरों की खरीद होगी।
इसके लिए शासन स्तर से बजट की मांग की जा रही है। जर्सी और फ्रीजियन प्रजाति के सांड़ इस बार सीमेन बैंक मेें लाए जा रहे हैं। कुछ दूसरी प्रजातियों की भी मांग की जा रही है। ताकि दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जा सके।