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रामपुर: दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत, सेशन कोर्ट ने किया बरी, फिलहाल जेल में ही रहेंगे

Fri, 29 May 2026 03:23 PM IST
Vimal Sharma अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: Vimal Sharma Updated Fri, 29 May 2026 03:23 PM IST
सार

रामपुर की एक अदालत ने दो पासपोर्ट मामले में सपा नेता आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम को बरी कर दिया गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें जमानत भी दे दी। उधर, दो पैन कार्ड में सजा होने के कारण वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। दोनों पिता-पुत्र इन दिनों रामपुर की जेल में बंद हैं। 

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Rampur: Major Relief for Abdullah Azam in Passport Case; Sessions Court Acquits Him
दो पासपोर्ट केस में अब्दुल्ला आजम बरी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

चर्चित दो पासपोर्ट मामले में सपा नेता अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में उनकी जमानत भी मंजूर कर ली है। फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। 

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यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज कराया गया था। शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए थे। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था।

मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चली थी। कोर्ट ने पांच दिसंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें सात साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

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निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ बचाव पक्ष की ओर से एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की गई थी। वहीं अभियोजन पक्ष ने भी सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दायर की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शुक्रवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के न्यायाधीश विजय कुमार ने फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी और अब्दुल्ला आजम को इस मामले में बरी कर दिया। अदालत ने उनकी जमानत भी मंजूर कर ली।

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अब्दुल्ला के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि निचली अदालत ने सात साल की सजा का आदेश पारित किया था। इसके खिलाफ विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अब कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है।

उन्होंने कहा कि हर मामला अपने अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होता है। न्यायालय पर पूरा भरोसा है और आगे भी न्याय मिलने की उम्मीद है। इस दाैरान अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। उधर, दो पैन कार्ड में सात साल की सजा के चलते जेल में होने के कारण वह बाहर नहीं आ सकते। 
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