भगवान श्रीराम की पादुका लेकर लौटे भरत
सार
श्रीरामलीला समिति सिविल लाइंस की ओर से युवा केन्द्र में श्रीरामलीला के भव्य मंचन के चौथे दिवस पर रघुवंश सांस्कृतिक परिवार के पात्रों द्वारा भरत कैकेई संवाद, पंचवटी में सूर्पनखा का आना और खरदूषण वध, मारीच का सोने का मृग बनना, सीता हरण, जटायु उद्धार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस पर भरत के क्रोध ने सीमा लांघ दी और अपनी मां का त्याग कर दिया। परंतु राम माता कैकेई और पिता दशरथ के आदेश के पालनार्थ लौटने से मना किया और भरत को वापस अयोध्या जाकर अयोध्या का राजपाट संभालने का आदेश दिया।
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