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Moradabad News: कवच तकनीक से लेस होगा रेल मंडल, रुकेंगी दुर्घटनाएं
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मुरादाबाद।
बालासोर जैसे बड़े हादसे के बाद रेलवे संरक्षा व सुरक्षा के मुद्दों पर काम कर रहा है। इसके लिए दिल्ली-हावड़ा रूट पर कवच प्रणाली लगाने की तैयारी चल रही है। इसमें मुरादाबाद रेल मंडल का कुछ हिस्सा भी शामिल हो सकता है। इस तकनीक से ट्रेनें सिग्नल ओवरशूट होने की स्थिति में खुद रुक जाएंगी।
इससे टक्कर की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी और सुरक्षित संचालन में सहायता होगी। एक ही लाइन पर यदि दो ट्रेनें होंगी तो ड्राइवर के पास अपडेट आ जाएगी। यदि ड्राइवर ब्रेक नहीं लगाते हैं तो भी ट्रेन ऑटो ब्रेक के जरिये खुद रुक जाएगी। गाजियाबाद से काकोरी के बीच इस साल के अंत तक इसके लिए सर्वे शुरू हो जाएगा। पिंक बुक में सुरक्षित संचालन के लिए बजट भी जारी किया गया है। ज्ञात हो कि वर्ष 2023 में मुरादाबाद मंडल के हापुड़ स्टेशन के पास भी बालासोर जैसा हादसा होने से बचा था। राजधानी एक्सप्रेस को उसी लाइन पर आगे बढ़ा दिया गया था जिस पर पहले से एक ट्रेन थी। ट्रेनों की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण ड्राइवर समय से ब्रेक लगा सके और हादसा बच गया। इस मामले में पिलखुआ के स्टेशन मास्टर को निलंबित किया गया था। अब भी मंडल में ट्रेनें बिना कवच प्रणाली के दौड़ रही हैं।
कैसे काम करता है कवच
कवच प्रणाली में हाई फ्रीक्वेंसी के रेडियो कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है। ये सिस्टम तीन स्थितियों में काम करता है। जैसे कि हेड-ऑन टकराव, रियर-एंड टकराव, और सिग्नल खतरा। ब्रेक विफल होने की स्थिति में ‘कवच’ ब्रेक के स्वचालित प्रयोग द्वारा ट्रेन की गति को नियंत्रित करता है। ऑन बोर्ड डिस्प्ले ऑफ सिग्नल एस्पेक्ट लोको पायलटों को कम दिखने पर भी यह संकेत देता है। एक बार सिस्टम सक्रिय हो जाने के बाद व निर्धारित सीमा के अंदर ट्रेनें रुक जाती हैं। रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिये ड्राइवर को सूचना मिल जाती है कि समान पटरी पर दूसरी ट्रेन आ रही है। ऐसे में भी यदि ड्राइवर ट्रेन रोकने में असफल रहते हैं तो कवच सिस्टम ट्रेन का ब्रेक एक्टिव कर देता है।
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- कवच या ट्रैफिक कॉलिजन एवॉइडेंस सिस्टम पर रेलवे में कार्य किया जा रहा है। हमारे रेल मंडल में फिलहाल काम शुरू नहीं हुआ है। धीर-धीरे सभी स्थानों पर इसे लगाया जाना है। इसके शुरू होने से रेल दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। - राजकुमार सिंह, डीआरएम
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बालासोर जैसे बड़े हादसे के बाद रेलवे संरक्षा व सुरक्षा के मुद्दों पर काम कर रहा है। इसके लिए दिल्ली-हावड़ा रूट पर कवच प्रणाली लगाने की तैयारी चल रही है। इसमें मुरादाबाद रेल मंडल का कुछ हिस्सा भी शामिल हो सकता है। इस तकनीक से ट्रेनें सिग्नल ओवरशूट होने की स्थिति में खुद रुक जाएंगी।
इससे टक्कर की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी और सुरक्षित संचालन में सहायता होगी। एक ही लाइन पर यदि दो ट्रेनें होंगी तो ड्राइवर के पास अपडेट आ जाएगी। यदि ड्राइवर ब्रेक नहीं लगाते हैं तो भी ट्रेन ऑटो ब्रेक के जरिये खुद रुक जाएगी। गाजियाबाद से काकोरी के बीच इस साल के अंत तक इसके लिए सर्वे शुरू हो जाएगा। पिंक बुक में सुरक्षित संचालन के लिए बजट भी जारी किया गया है। ज्ञात हो कि वर्ष 2023 में मुरादाबाद मंडल के हापुड़ स्टेशन के पास भी बालासोर जैसा हादसा होने से बचा था। राजधानी एक्सप्रेस को उसी लाइन पर आगे बढ़ा दिया गया था जिस पर पहले से एक ट्रेन थी। ट्रेनों की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण ड्राइवर समय से ब्रेक लगा सके और हादसा बच गया। इस मामले में पिलखुआ के स्टेशन मास्टर को निलंबित किया गया था। अब भी मंडल में ट्रेनें बिना कवच प्रणाली के दौड़ रही हैं।
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कैसे काम करता है कवच
कवच प्रणाली में हाई फ्रीक्वेंसी के रेडियो कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है। ये सिस्टम तीन स्थितियों में काम करता है। जैसे कि हेड-ऑन टकराव, रियर-एंड टकराव, और सिग्नल खतरा। ब्रेक विफल होने की स्थिति में ‘कवच’ ब्रेक के स्वचालित प्रयोग द्वारा ट्रेन की गति को नियंत्रित करता है। ऑन बोर्ड डिस्प्ले ऑफ सिग्नल एस्पेक्ट लोको पायलटों को कम दिखने पर भी यह संकेत देता है। एक बार सिस्टम सक्रिय हो जाने के बाद व निर्धारित सीमा के अंदर ट्रेनें रुक जाती हैं। रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिये ड्राइवर को सूचना मिल जाती है कि समान पटरी पर दूसरी ट्रेन आ रही है। ऐसे में भी यदि ड्राइवर ट्रेन रोकने में असफल रहते हैं तो कवच सिस्टम ट्रेन का ब्रेक एक्टिव कर देता है।
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- कवच या ट्रैफिक कॉलिजन एवॉइडेंस सिस्टम पर रेलवे में कार्य किया जा रहा है। हमारे रेल मंडल में फिलहाल काम शुरू नहीं हुआ है। धीर-धीरे सभी स्थानों पर इसे लगाया जाना है। इसके शुरू होने से रेल दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। - राजकुमार सिंह, डीआरएम