{"_id":"6939d03a5cabdb4e550b6660","slug":"race-for-justice-35-crores-are-being-spent-every-year-with-time-moradabad-news-c-15-1-mbd1061-788582-2025-12-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: न्याय की दौड़... समय के साथ हर साल खर्च हो रहे 35 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: न्याय की दौड़... समय के साथ हर साल खर्च हो रहे 35 करोड़
विज्ञापन
मुरादाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना की मांग करीब 71 साल से की जा रही है। अब फिर इसे लेकर 17 दिसंबर को बंद का आह्वान किया गया है। यह बेंच न होने से मुरादाबाद के करीब के करीब 4500 लोगों समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औसतन 99 हजार लोगों को प्रतिवर्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना पड़ता है, जिसमें उन्हें सिर्फ यातायात, खानपान और रहन-सहन में ही 35 से 40 करोड़ रुपये गंवाने पड़ते हैं, इसके साथ साथ प्रति व्यक्ति को एक दिन और कम से कम दो रातों का समय भी देना होता है। जिससे उसके अन्य कार्य प्रभावित होते हैं।
दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने बताया कि स्थानीय खासकर जमानत अर्जी आदि की स्थिति को देखें तो औसतन 15 लोग प्रतिदिन हाईकोर्ट जाते हैं। यदि 25 दिन कार्य दिवस मानें तो महीने में 375 और सालभर में 4500 लोग हाईकोर्ट इलाहाबाद पहुंचते हैं, यदि प्रति व्यक्ति व्यय चार हजार रुपये माने तो प्रति दिन 60 हजार और एक साल का खर्च 1.80 लाख रुपये होता है। यही, स्थिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी 22 जिलों की भी है। इसी दर से सालभर में पश्चिमी यूपी से करीब 99 हजार लोग जाते हैं, जिनका खर्च 39.60 करोड़ रुपये बनता है। कुल मिलाकर अनुमानित व्यय 35 से 40 करोड़ रुपये के बीच माना जा सकता है। बात सिर्फ धन की ही नहीं, कोई व्यक्ति हाईकोर्ट इलाहाबाद जाता है तो उसका कम से कम एक दिन व दो रात का समय लगता है, ट्रेनों आदि में कभी आरक्षण न मिलने और संबंधित दिवस के दिन कार्य न होने पर दूसरे दिन रुकना पड़े तो खर्च व परेशानी दोनों ही बढ़ जाती हैं। यदि पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की बेंच होगी तो ये खर्च व समय बच जाएगा। पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों से हाईकोर्ट पहुंचने की दूरी करीब 400 से 750 किमी तक है। मुरादाबाद से प्रयागराज की दूरी करीब 550, मेरठ से 685, बरेली से 455 किमी है।
--
फोटो-1001
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित कराने के लिए हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति लंबे समय से संघर्ष कर रही है, अब 17 दिसंबर को भी बंद का आह्वान किया है, जिसमें मुरादाबाद जिले के अधिवक्ता ही नहीं, अन्य सभी वर्गों के लोग भी शामिल होंगे। हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी क्षेत्र में बनने का फायदा सभी को होगा।
विज्ञापन
-आनंद मोहन गुप्ता, अध्यक्ष दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद।
-- -
फोटो-1002
- सबसे पहले वर्ष 1954 में जब यूपी के मुख्यमंत्री डॉ.संपूणानंद थे, तब पहली बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग उठी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व केंद्रीय मंत्री किरण रिजजू से मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में तो मैं भी शामिल रहा। अभी तक किसी ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। संघर्ष अभी जारी है।
- आदेश श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद
--
फोटो-1003
- अधिवक्ता व सामान्य लोगों को आने जाने में तो दिक्कत होती ही है, करीब 72 प्रतिशत रिट्स में सरकारी अधिकारी कर्मचारी भी काउंटर एफिडेविट देने जाते हैं, दो से तीन दिन उन्हें कार्यालय छोड़ना पड़ता है, टीए-डीए भी लगता है। खासकर पुलिस अधिकारियों को तो अक्सर हाईकोर्ट जाना पड़ जाता है, जिससे सुरक्षात्मक कार्य भी प्रभावित होते हैं।
- प्रभात गोयल, पूर्व अध्यक्ष दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद
-
फोटो-1004
- एक लंबे समय से मुरादाबाद सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की ये बड़ी समस्या है, सस्ता और सुलभ न्याय मिले, ये परिकल्पना तो है लेकिन हाईकोर्ट की अधिक दूरी से परेशानी बढ़ जाती है। इलाहाबाद के अधिवक्ता ही नहीं, वहां के सामान्य लोग भी नहीं चाहते कि हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी यूपी में बने, क्योंकि यहां से जाने वालों से उन्हें कई तरह के फायदे मिलते हैं।
-अनुभव मेहरोत्रा, अधिवक्ता
विज्ञापन
दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने बताया कि स्थानीय खासकर जमानत अर्जी आदि की स्थिति को देखें तो औसतन 15 लोग प्रतिदिन हाईकोर्ट जाते हैं। यदि 25 दिन कार्य दिवस मानें तो महीने में 375 और सालभर में 4500 लोग हाईकोर्ट इलाहाबाद पहुंचते हैं, यदि प्रति व्यक्ति व्यय चार हजार रुपये माने तो प्रति दिन 60 हजार और एक साल का खर्च 1.80 लाख रुपये होता है। यही, स्थिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी 22 जिलों की भी है। इसी दर से सालभर में पश्चिमी यूपी से करीब 99 हजार लोग जाते हैं, जिनका खर्च 39.60 करोड़ रुपये बनता है। कुल मिलाकर अनुमानित व्यय 35 से 40 करोड़ रुपये के बीच माना जा सकता है। बात सिर्फ धन की ही नहीं, कोई व्यक्ति हाईकोर्ट इलाहाबाद जाता है तो उसका कम से कम एक दिन व दो रात का समय लगता है, ट्रेनों आदि में कभी आरक्षण न मिलने और संबंधित दिवस के दिन कार्य न होने पर दूसरे दिन रुकना पड़े तो खर्च व परेशानी दोनों ही बढ़ जाती हैं। यदि पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की बेंच होगी तो ये खर्च व समय बच जाएगा। पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों से हाईकोर्ट पहुंचने की दूरी करीब 400 से 750 किमी तक है। मुरादाबाद से प्रयागराज की दूरी करीब 550, मेरठ से 685, बरेली से 455 किमी है।
विज्ञापन
फोटो-1001
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित कराने के लिए हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति लंबे समय से संघर्ष कर रही है, अब 17 दिसंबर को भी बंद का आह्वान किया है, जिसमें मुरादाबाद जिले के अधिवक्ता ही नहीं, अन्य सभी वर्गों के लोग भी शामिल होंगे। हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी क्षेत्र में बनने का फायदा सभी को होगा।
विज्ञापन
-आनंद मोहन गुप्ता, अध्यक्ष दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद।
फोटो-1002
- सबसे पहले वर्ष 1954 में जब यूपी के मुख्यमंत्री डॉ.संपूणानंद थे, तब पहली बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग उठी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व केंद्रीय मंत्री किरण रिजजू से मिलने वाले प्रतिनिधि मंडल में तो मैं भी शामिल रहा। अभी तक किसी ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। संघर्ष अभी जारी है।
- आदेश श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद
फोटो-1003
- अधिवक्ता व सामान्य लोगों को आने जाने में तो दिक्कत होती ही है, करीब 72 प्रतिशत रिट्स में सरकारी अधिकारी कर्मचारी भी काउंटर एफिडेविट देने जाते हैं, दो से तीन दिन उन्हें कार्यालय छोड़ना पड़ता है, टीए-डीए भी लगता है। खासकर पुलिस अधिकारियों को तो अक्सर हाईकोर्ट जाना पड़ जाता है, जिससे सुरक्षात्मक कार्य भी प्रभावित होते हैं।
- प्रभात गोयल, पूर्व अध्यक्ष दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी मुरादाबाद
-
फोटो-1004
- एक लंबे समय से मुरादाबाद सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की ये बड़ी समस्या है, सस्ता और सुलभ न्याय मिले, ये परिकल्पना तो है लेकिन हाईकोर्ट की अधिक दूरी से परेशानी बढ़ जाती है। इलाहाबाद के अधिवक्ता ही नहीं, वहां के सामान्य लोग भी नहीं चाहते कि हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी यूपी में बने, क्योंकि यहां से जाने वालों से उन्हें कई तरह के फायदे मिलते हैं।
-अनुभव मेहरोत्रा, अधिवक्ता