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Moradabad News: आढ़तों पर ही मिल रहा है एमएसपी के बराबर दाम, सरकारी क्रय केंद्र खाली

Fri, 11 Apr 2025 01:12 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Updated Fri, 11 Apr 2025 01:12 AM IST
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Prices equal to MSP are being received at the wholesale markets only, government procurement centres are empty
बिलारी। तहसील के दोनों विकास खंडों बिलारी और कुंदरकी में वर्तमान सीजन में सरकारी गेहूं खरीद के 29 केंद्र खोल दिए गए हैं लेकिन केंद्रों पर गेहूं की आवक नाम मात्र की हो रही है।
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सरकारी क्रय केंद्रों और निजी आढ़तों के रेट में काफी कम अंतर होने की वजह से ही किसान सरकारी केंद्रों पर कम मात्रा में गेहूं ला रहे हैं।
बिलारी और कुंदरकी में खाद्य विभाग की विपणन शाखा, भारतीय खाद्य निगम,उत्तर प्रदेश सहकारी संघ, नाफेड, उपभोक्ता सहकारी संघ और यूपी कॉआपरेटिव यूनियन आदि संस्थाओं के गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं।
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खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मुरादाबाद जनपद के सभी गेहूं क्रय केंद्रों पर लगभग दो लाख अस्सी हजार कुंतल गेहूं खरीद का लक्ष्य है उस हिसाब से प्रत्येक क्रय केंद्र पर लगभग दस हजार कुंतल गेहूं की खरीद करनी होगी। बिलारी के एरिया मार्केटिंग ऑफिसर भगवत सरन ने बताया कि बिलारी की सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में खाद्य विभाग के दो सरकारी गेहूं क्रय केंद्र संचालित हैं। अब तक एक क्रय केंद्र पर 700 क्विंटल और दूसरे क्रय केंद्र पर 200 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। एएमओ ने यह भी बताया कि गेहूं का अवैध भंडारण रोकने के लिए जिलाधिकारी ने तहसील स्तर पर टीमें बना दी हैं।
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पूरी कोशिश की जा रही है कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने आने वाले किसानों को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। गेहूं किसान को पहले जनसेवा केंद्र पर अपना पंजीकरण कराना होगा बाद में पंजीकरण कार्ड और आधार कार्ड गेहूं क्रय केंद्र पर जाकर दिखाना होगा। उधर एक निजी आढ़ती ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर 2425 रुपये और निजी आढ़तों पर 2400 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। सरकारी और आढ़तों के रेट में मामूली अंतर होने की वजह से जरूरतमंद किसान निजी आढ़तों पर भी काफी गेहूं बेच रहे हैं।

भाकियू टिकैत के बिलारी ब्लॉक अध्यक्ष माजिद हुसैन अंसारी का कहना है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह उत्तर प्रदेश सरकार को भी सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले किसानों को बोनस देना चाहिए।
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