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दिल्ली पब्लिक स्कूल का नाम बदलने की तैयारी
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मुरादाबाद। फ्रेंचाइजी छिनने के बाद डीपीएस का नाम बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों से अनापत्ति प्रमाणपत्र भरवाना शुरू कर दिया है। स्कूल प्रशासन के इस कदम का अभिभावकों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि ट्रस्टी डीपीएस के नाम पर जो भारी भरकम फीस ले रहे हैं, पहले उसमें कटौती करें। इस संबंध में वह आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं।
एक अप्रैल 2022 से दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी ने डीपीएस मुरादाबाद की फ्रेंचाइजी को निरस्त कर दिया था। डीपीएस का नाम और लोगो के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट में डीपीएस स्कूल और ट्रस्टियों पर नाम व लोगों का इस्तेमाल करने की वजह से दो करोड़ रुपये का हर्जाना भी मांगा है। अप्रैल की शुरुआत में विद्यालय में करीब 16 सौ विद्यार्थी अध्ययनरत थे।
वाइस प्रिंसिपल संगीता सिन्हा ने 29 अगस्त को नोटिस जारी किया है कि दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी से डीपीएस फ्रेंचाइजी के पुन: अधिग्रहण से संबंधित मामला न्यायिक विचाराधीन है। इसे निपटाने में समय लगेगा। इस संबंध में न्यायालय के निर्णय का सम्मान किया जाएगा और स्कूल अधिकारियों द्वारा गंभीरता से पालन किया जाएगा। न्यायालय के निर्णय के आधार पर भविष्य में स्कूल का नाम बदल सकता है। स्कूल सत्र 2022-23 के लिए कक्षा नौ-11वीं के छात्रों को पंजीकृत करने की प्रक्रिया में है। विद्यार्थियों को सीबीएसई बोर्ड के साथ पंजीकृत किया जा रहा है। दस सितंबर तक अनापत्ति प्रमाणपत्र पर सहमति देने को कहा गया है, ताकि स्कूल का नाम बदले तो अभिभावकों को कोई आपत्ति न रहे।
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नोटिस मिलने के बाद कुछ अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से मुलाकात करने का निर्णय लिया है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय द्वारा लिखित रूप से ऐसी सहमति मांगना गलत है। पहले ही स्कूल प्रशासन बिना डीपीएस के नाम और लोगो के डीपीएस सोसाइटी द्वारा निर्धारित फीस ले रहा है। यहां तक कि इस सत्र में यातायात शुल्क भी बढ़ा दिया गया है।
अभिभावक संघ के पदाधिकारी ले रहे जानकारी
मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ आल स्कूल्स के अध्यक्ष अनुज गुप्ता का कहना है कि डीपीएस नाम छिन जाने के बाद अब स्कूल के पास कोई नाम नहीं है। ऐसी स्थिति में नवीं और 11वीं के पंजीकरण के समय स्कूल किस नाम से सीबीएसई में आवेदन करेगा, इसकी जानकारी ली जा रही है। अभिभावकों को इन पहलुओं को जानना बहुत आवश्यक है।
बिना स्कूल के नाम के नहीं हो सकता परीक्षा के लिए पंजीकरण
मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ पब्लिक स्कूल्स के महासचिव नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि सीबीएसई में विद्यार्थियों के पंजीकरण किए जा रहे हैं। दसवीं और 12वीं के पंजीकरण की आखिरी तारीख 31 अगस्त है और नवीं और 11वीं के पंजीकरण की आखिरी तारीख 30 सितंबर है। सीबीएसई के पंजीकरण के समय स्कूल का नाम भरा जाता है, क्योंकि वह विद्यार्थी किसी अन्य स्कूल से पंजीकरण नहीं कर सकता है। इसलिए स्कूल का नाम बहुत आवश्यक है। 12वीं के समय यह नियम है कि 11वीं के पंजीकरण वाले विद्यालय से ही वह बोर्ड परीक्षा में बैठता है।
वाइस प्रिंसिपल की तरफ से अभिभावकों को नोटिस मिला है। हमारी जिलाधिकारी से मुलाकात करने की योजना है। जिसमें फीस की कटौती करना और जिला प्रशासन को स्कूल पर नियंत्रण करने की मांग करेंगे। डीपीएस के नाम पर दे रहे भारी भरकम फीस अब नहीं चुकाएंगे।
- संगीता रस्तोगी, अभिभावक
मैंने अपने बेटे का दाखिला डीपीएस ब्रांड को देखकर करवाया था, ताकि जब हमारा स्थानांतरण किसी अन्य जनपद में हो तो वहां के डीपीएस में इसी पाठ्यक्रम के साथ बेटा पढ़ सके। प्रवेश शुल्क करीब 40 हजार रुपये दिए थे। फ्रेंचाइजी छिनने पर ट्रस्टियों ने हमें अंधेरे में रखा और अब फीस भी कम नहीं की।
- अजय कुमार सिंह, अभिभावक
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एक अप्रैल 2022 से दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी ने डीपीएस मुरादाबाद की फ्रेंचाइजी को निरस्त कर दिया था। डीपीएस का नाम और लोगो के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट में डीपीएस स्कूल और ट्रस्टियों पर नाम व लोगों का इस्तेमाल करने की वजह से दो करोड़ रुपये का हर्जाना भी मांगा है। अप्रैल की शुरुआत में विद्यालय में करीब 16 सौ विद्यार्थी अध्ययनरत थे।
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वाइस प्रिंसिपल संगीता सिन्हा ने 29 अगस्त को नोटिस जारी किया है कि दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी से डीपीएस फ्रेंचाइजी के पुन: अधिग्रहण से संबंधित मामला न्यायिक विचाराधीन है। इसे निपटाने में समय लगेगा। इस संबंध में न्यायालय के निर्णय का सम्मान किया जाएगा और स्कूल अधिकारियों द्वारा गंभीरता से पालन किया जाएगा। न्यायालय के निर्णय के आधार पर भविष्य में स्कूल का नाम बदल सकता है। स्कूल सत्र 2022-23 के लिए कक्षा नौ-11वीं के छात्रों को पंजीकृत करने की प्रक्रिया में है। विद्यार्थियों को सीबीएसई बोर्ड के साथ पंजीकृत किया जा रहा है। दस सितंबर तक अनापत्ति प्रमाणपत्र पर सहमति देने को कहा गया है, ताकि स्कूल का नाम बदले तो अभिभावकों को कोई आपत्ति न रहे।
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नोटिस मिलने के बाद कुछ अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से मुलाकात करने का निर्णय लिया है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय द्वारा लिखित रूप से ऐसी सहमति मांगना गलत है। पहले ही स्कूल प्रशासन बिना डीपीएस के नाम और लोगो के डीपीएस सोसाइटी द्वारा निर्धारित फीस ले रहा है। यहां तक कि इस सत्र में यातायात शुल्क भी बढ़ा दिया गया है।
अभिभावक संघ के पदाधिकारी ले रहे जानकारी
मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ आल स्कूल्स के अध्यक्ष अनुज गुप्ता का कहना है कि डीपीएस नाम छिन जाने के बाद अब स्कूल के पास कोई नाम नहीं है। ऐसी स्थिति में नवीं और 11वीं के पंजीकरण के समय स्कूल किस नाम से सीबीएसई में आवेदन करेगा, इसकी जानकारी ली जा रही है। अभिभावकों को इन पहलुओं को जानना बहुत आवश्यक है।
बिना स्कूल के नाम के नहीं हो सकता परीक्षा के लिए पंजीकरण
मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ पब्लिक स्कूल्स के महासचिव नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि सीबीएसई में विद्यार्थियों के पंजीकरण किए जा रहे हैं। दसवीं और 12वीं के पंजीकरण की आखिरी तारीख 31 अगस्त है और नवीं और 11वीं के पंजीकरण की आखिरी तारीख 30 सितंबर है। सीबीएसई के पंजीकरण के समय स्कूल का नाम भरा जाता है, क्योंकि वह विद्यार्थी किसी अन्य स्कूल से पंजीकरण नहीं कर सकता है। इसलिए स्कूल का नाम बहुत आवश्यक है। 12वीं के समय यह नियम है कि 11वीं के पंजीकरण वाले विद्यालय से ही वह बोर्ड परीक्षा में बैठता है।
वाइस प्रिंसिपल की तरफ से अभिभावकों को नोटिस मिला है। हमारी जिलाधिकारी से मुलाकात करने की योजना है। जिसमें फीस की कटौती करना और जिला प्रशासन को स्कूल पर नियंत्रण करने की मांग करेंगे। डीपीएस के नाम पर दे रहे भारी भरकम फीस अब नहीं चुकाएंगे।
- संगीता रस्तोगी, अभिभावक
मैंने अपने बेटे का दाखिला डीपीएस ब्रांड को देखकर करवाया था, ताकि जब हमारा स्थानांतरण किसी अन्य जनपद में हो तो वहां के डीपीएस में इसी पाठ्यक्रम के साथ बेटा पढ़ सके। प्रवेश शुल्क करीब 40 हजार रुपये दिए थे। फ्रेंचाइजी छिनने पर ट्रस्टियों ने हमें अंधेरे में रखा और अब फीस भी कम नहीं की।
- अजय कुमार सिंह, अभिभावक