फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   pray for peace and brotherhood in the country

Moradabad News: मुल्क में अमन, चैन भाईचारे की दुआ को उठे हजारों हाथ

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 08 Apr 2023 02:41 AM IST
विज्ञापन
pray for peace and brotherhood in the country
मुरादाबाद। माहे रमजान के तीसरे जुमे (शुक्रवार) को शहर की सभी मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ रही। अकीदतमंद रोजेदारों ने मस्जिदों में समय से पहुंच कर जुमे की नमाज अदा की। बाद नमाज सभी ने मुल्क की तरक्की, देश में अमन, चैन व भाईचारा बनाए रखने की दुआ की। शहर की जामा मस्जिद में सबसे अधिक रोजेदार, नमाजियों की भीड़ रही।
विज्ञापन

माहे रमजान का मझला रोजा होने के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से ही जुमे की नमाज और शाम को इफ्तारी आदि की तैयारी में जुट गए थे। जुमे की नमाज के लिए लोगों का समय से आधा घंटे पहले से ही मस्जिदों में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जामा मस्जिद समेत शहर की सभी मस्जिदें जुमे की नमाज के समय फुल नजर आईं। शहर की जामा मस्जिद में नायब शहर इमाम सैयद फहद अली ने जुमे की नमाज अदा कराई। इससे पहले उन्होंने माहे रमजान की फजीलत बयां की। फितरा व जकात पर भी विस्तार से रोशनी डाली। बाद नमाज सभी ने खुदा की बारगाह में हाथ उठाकर देश में अमन, चैन, भाईचारा और तरक्की की दुआ की।
विज्ञापन

इसके अलावा शहर की ईदगाह रोड स्थित जरनैल वाली मस्जिद, लाजपतनगर स्थित बिलाल वाली मस्जिद, शम्शी मस्जिद. गलशदीद चौराहा स्थित पुत्तन शहीद मस्जिद, गलशहीद स्थित मस्जिद जामेउल हुदा, प्रिंस रोड स्थित चांद वाली मस्जिद, पक्की सराय स्थित दादा वाली मस्जिद, ईदगाह स्थित एक रात वाली मस्जिद, हाफिज बन्ने की पुलिया स्थित मुगलों वाली मस्जिद, जीआईसी चौराहा स्थित किले वाली मस्जिद, मोहल्ला पीरजादा स्थित रोजे वाली मस्जिद समेत शहर की सभी मस्जिदें भी जुमे की नमाज के मौके पर नमाजियों से फुल नजर आईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

000
फितरा
जुमे की नमाज से पहले अकीदतमंदों के खिताब करते हुए नायब शहर इमाम सैयद फहद अली ने कहा कि रोजेदार कितना ही एहतमाम कर ले रोजे के दौरान कुछ ना कुछ कोताही हो ही जाती है। खाने-पीने और रोजा तोड़ने वाली बातों से बचना तो आसान होता है, लेकिन फिजूल (बेकार) की बातों से मुकम्मल बचना मुश्किल होता है। इस लिए इस तरह की गलतियों से बचने के लिए रमजान उल मुबारक के खत्म पर सदका तुल फितर को जरूरी करार दिया गया है। जो रोजेदारों के लिए बुरी बातों से पाकीजगी का जरिया और गरीबों के लिए खाने में मददगार बनता है। परिवार के प्रत्येक सदस्य पर पौने दो किलो गेहूं, आटा अथवा उसकी बाजार में कीमत के बराबर फितरा अदा करना होता है।
000
जकात (दान)
इस्लाम में रमजान के पाक महीने में हर हैसियतमंद मुसलमान पर जकात देना जरूरी बताया गया है। आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है उसका 2.5 फीसदी हिस्सा किसी गरीब या जरूरतमंद को दिया जाता है। जिसे जकात कहते हैं। जकात और फितरा गरीबों को देना होता है। इसके लिए सबसे पहले जरूरतमंद अगर कोई रिश्तेदार है तो उसे देना चाहिए। उसके बाद पड़ोसी, फिर अन्य जरूरतमंद को दिया जाता है।

00
सामूहिक रोजा इफ्तार कल
हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसायटी की ओर से शहर के अंसार इंटर कॉलेज में रविवार सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन किया जाएगा। जिसमें विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु व प्रशासनिक अधिकारी मौैजूद रहेंगे। यह जानकारी सोसायटी के अध्यक्ष नोमान मंसूरी ने दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed